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भोग त्याग कर योग करें, व्यक्ति जरूर शक्तिशाली होगा: मनहरण

डौंडीलोहारा. गैंजी के ग्रामवासी मानस मंडली की कथा सुनते। डौंडीलोहारा|गैंजी में र|ावली मानस मंडली सहगांव का मानस...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:30 AM IST
डौंडीलोहारा. गैंजी के ग्रामवासी मानस मंडली की कथा सुनते।

डौंडीलोहारा|गैंजी में र|ावली मानस मंडली सहगांव का मानस गान हुआ। व्याख्याकार मनहरण वर्मा ने कहा कि हनुमंतलला के शक्तिशाली होने के अनेकों कारण है। जिसमें एक यह भी है कि जब बाली और सुग्रीव का झगड़ा हुआ तो अनुमान जी ने सुग्रीव का साथ दिया। और यह सुग्रीव कौन है? सूर्य का पुत्र, और सूर्य का अर्थ होता है ज्ञान और ज्ञान का बेटा होता है ध्यान और ध्यान का संबंध है योग-साधना से। बाली इंद्र का बेटा है, इंद्र का संबंध है हमारी इंद्रियों से जिसका संबंध होता है। भोग से अर्थात श्री हनुमान जी ने भाेग रूपी बाली को छोड़ा और योग रूपी सुग्रीव का साथ दिया और योग का साथ देने के कारण ही उन्हें प्रभु श्री राम मिले। अर्थात तन की शक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि हम भोग विलासिता को छोड़कर योग साधना को अपनाए। भोगी व्यक्ति का संबंध सीधा रोग से होता है और रोगी कभी शक्ति सम्पन्न नहीं हो सकता। भोगी व्यक्ति में तन की शक्ति उतनी नहीं हो सकती।