• Hindi News
  • Chhattisgarh News
  • Doundilohara News
  • 3 दिन बाद जिम्मेदारी से बचने किया रेफर रास्ते में आॅक्सीजन खत्म, नवजात की मौत
--Advertisement--

3 दिन बाद जिम्मेदारी से बचने किया रेफर रास्ते में आॅक्सीजन खत्म, नवजात की मौत

बुधवार को फिर एक नवजात की मौत हो गई। 12 करोड़ के जच्चा-बच्चा अस्पताल में पिछले महीने शुरू किए शिशु गहन चिकित्सा वार्ड...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:40 AM IST
बुधवार को फिर एक नवजात की मौत हो गई। 12 करोड़ के जच्चा-बच्चा अस्पताल में पिछले महीने शुरू किए शिशु गहन चिकित्सा वार्ड में भी बच्चे की जान नही बचाई जा सकी। तीन दिन से इलाज के बाद भी बच्चा ठीक नहीं हुआ तो जिम्मेदारी से बचने डाॅक्टरों ने उसे रेफर कर दिया। लेकिन बालोद से भिलाई जाते समय गुंडरदेही पहुंचने तक बच्चे की मौत हो गई।

डौंडीलोहारा ब्लाक के ग्राम गंजईडीह निवासी विमल कुमार हल्बा व गिरिजा बाई को शादी के बाद पहला बच्चा बेटा हुआ था। संजारी उपस्वास्थ्य केंद्र में 27 दिसंबर को प्रसव हुआ। बच्चा दूध नहीं पी रहा था। सांस लेने में दिक्कत थी तो एएमओ डॉ एचआर कौमार्य की सलाह पर परिजनों ने बच्चे को जिला अस्पताल लाया। 28 दिसंबर को उसे जच्चा बच्चा अस्पताल के शिशु वार्ड में भर्ती किया गया था। पर तीन दिन इलाज के बाद भी बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं आया। बच्चे की मां गिरिजा बाई ने डाॅक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बच्चा ठीक नहीं हो रहा था तो पहले दिन ही बता देना था। हमें पूरी जानकारी नहीं दी गई।

आॅक्सीजन खत्म होने के बाद दोबारा आकर दूसरा सिलेंडर भर बच्चे को रेफर किया

बालोद. आॅक्सीजन खत्म होने के बाद दूसरा सिलेंडर भर बच्चे को रेफर किया।

गंजईडीह के एक और बच्चे की जान है जोखिम में, अस्पताल में चल रहा इलाज

बुधवार को उसी गांव गंजईडीह से मनोज कुमार व सुखबाई निर्मलकर की बच्ची को दोपहर दो बजे शिशु वार्ड में भर्ती किया गया है। इसकी स्थिति भी डाॅक्टर गंभीर बता रहे हैं। डॉक्टरों ने बताया कि प्रसव दोपहर 12 बजे संजारी अस्पताल में हुआ। तब से बच्चा रो नहीं रहा है। बच्चे के परिजनों को डाॅक्टर ने पहले से बता दिया है कि कुछ भी हो सकता है। बच्चे को इलाज के लिए दूसरी जगह ले जाने की तैयारी कर लो।

शिशुओं में संक्रमण से फैलती है न्यूटेलस सेप्टीसीमिया की बीमारी

न्यूटेलस सेप्टीसीमिया यानि नवजात में संक्रमण होता है। यह शिशुओं में गंभीर बीमारी व मौत का एक मुख्य कारण है। यह संक्रमण मां से आता है। मां को बुखार, योनि का संक्रमण, बार-बार असुरक्षित योनि परीक्षण, कुपोषण से संक्रमण बच्चे में आता है। जन्म के बाद बच्चे की नाल को असुरक्षित औजार से काटना, बिना हाथ साफ किए बच्चे को छूने से भी होता है। इससे बच्चे के शरीर का तापमान कम होता है, दूध नहीं पीता है।

इलाज के साथ बच्चे को रेफर करने में भी लापरवाही बरती गई। दोपहर 1.50 बजे जिस एंबुलेंस से बच्चे को भिलाई ले जा रहे थे, उसका आॅक्सीजन पांच किमी दूर सिवनी के पास खत्म हो गया। वहां से एंबुलेस लौटी। आनन फानन में दूसरा आॅक्सीजन सिलेंडर लगाकर बच्चे को दोबारा रेफर किया गया। पर गुंडरदेही पहुंचते तक बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने कहा एंबुलेंस में अधूरी व्यवस्था के बीच प्रबंधन ने उनके बच्चे की जान जोखिम में डाल दी थी। बिना आॅक्सीजन के जब वापस आए तो मन घबरा रहा था कि कुछ अनहोनी न हो जाए और आखिर वही हो गया।

बच्चे के पिता ने कहा- नर्स भी करती रही बुरा बर्ताव

बच्चे के पिता विमल कुमार ने कहा वार्ड के नर्स भी उनके साथ बुरा बर्ताव कर रहे थे। जब बच्चे को दुबारा लाए तो उसे आॅक्सीजन देने के लिए कहते रहे कि हम नहीं आप सिलेंडर लाओ। जब उन्होंने नाराजगी जाहिर की। तब एक नर्स बच्चे को आक्सीजन देने के लिए आई।

समय से पहले जन्म


सेप्टीसीमिया से पीड़ित था


X
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..