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4 ब्लॉक सूखे, पिछले वर्ष से 6 लाख क्विं. कम खरीदी, फिर भी तीन रैंक की छलांग

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का सिलसिला बुधवार को थम गया। इसी के साथ पोर्टल भी लाॅक हो गया। इस बार सूखा के बाद भी बंपर...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:40 AM IST
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का सिलसिला बुधवार को थम गया। इसी के साथ पोर्टल भी लाॅक हो गया। इस बार सूखा के बाद भी बंपर उत्पादन, फिर ज्यादा खरीदी के मामले में प्रदेश में तीसरा स्थान। पिछले साल की तुलना में धान खरीदी का रिकाॅर्ड तो नहीं टूट पाया लेकिन चार ब्लाॅक सूखे की चपेट में होने के बाद भी 38 लाख से ज्यादा क्विंटल धान खरीदी ने सभी को चौंकाया।

जिले के 110 सोसायटियों में 92 हजार 414 किसानों ने 38 लाख 42 हजार 440.20 क्विंटल धान बेचा। जो पिछले साल की तुलना में 6 लाख क्विंटल कम है। बावजूद इस बार उम्मीद के अनुरूप बंपर उत्पादन हुआ, क्योंकि चार ब्लाक गुरुर, गुंडरदेही, डौंडी व डौंडीलोहारा के गांव सूखे की चपेट में रहे। जिस हिसाब से आंकलन प्रशासन ने आनावरी 56 पैसा बताया। उस हिसाब से ज्यादा खरीदी हुई है। खुद अफसर भी हैरान है कि चार ब्लाक सूखा के बाद भी अच्छी खरीदी हुई है। पिछले साल 44 लाख क्विंटल धान किसानों ने बेचे थे, तब सूखे की स्थिति नहीं थी। इस बार धान बेचने के लिए कुल एक लाख 5 हजार 846 किसान पंजीकृत थे।



बालोद. बुधवार को खरीदी के अंतिम दिन बालोद केंद्र में धान को बारदाने में सुरक्षित रखते हुए लोग।

जिले में पिछले पांच साल खरीदी की स्थिति

वर्ष कुल धान खरीदी क्विंटल में कुल किसान

2012-13 42 लाख 63 हजार 763.40 71 हजार 334

2013-14 49 लाख 64 हजार 684.50 80 हजार 675

2014-15 41 लाख 13 हजार 366.40 83 हजार 247

2015-16 33 लाख 22 हजार 491.60 73 हजार 447

2016-17 44 लाख 62 हजार 92 हजार 564

इस वर्ष भी पतला धान की खरीदी ज्यादा

मोटा धान 8 लाख 66 हजार 939.80 क्विंटल

पतला धान 19 लाख 66 हजार 99.60 क्विंटल

सरना धान 10 लाख 9 हजार 400.80 क्विंटल

कुल राशि 6 अरब 3 करोड़ 44 लाख 25 हजार 958 रुपए।

वास्तविक आनावरी को ऐसे समझें

जिले के 704 गांवों में खरीफ सीजन के तहत 85 हजार 306 हेक्टेयर सिंचित और 89 हजार 970 हेक्टेयर असिंचित रकबा का खरीफ फसल कटाई प्रयोग के आधार पर जिला प्रशासन ने जिलेभर में वास्तविक आनावरी 0.56 पैसा बताया है, यानि 0.37 पैसा से ज्यादा। दिलचस्प तथ्य यह है कि एक भी ब्लाक में आनावरी 0.37 पैसा से नीचे नहीं है। कम बारिश व फसल में माहू के प्रकोप के बाद भी धान की बंपर पैदावार हुई।

नाॅलेज

1. 2015 में भी सूखा घोषित था जिला, तब कम उत्पादन हुआ था

दिलचस्प तथ्य यह भी है कि इसके पहले वर्ष 2015 में भी जिले को सूखा घोषित किया गया था। तब 33 लाख क्विंटल धान खरीदी हुई थी यानि इस साल से 5 लाख क्विंटल कम।

2. ज्यादा धान खरीदी के मामले में प्रदेश में तीसरे नंबर पर बालोद

धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में 27 जिले हैं। जिसमें सबसे ज्यादा धान खरीदी के मामले में बालोद तीसरे नंबर पर रहा। जो चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले वर्ष ज्यादा खरीदी के बावजूद प्रदेश में छठवें स्थान पर रहे। जबकि अनावरी रिपोर्ट के आधार पर इस जिले के चार ब्लॉक को शासन ने सूखा माना गया है।

सूखा प्रभावित 23492 किसानों को मिला 15 करोड़ रुपए: जिले में सूखा से प्रभावित 20 हजार 595 और माहू से प्रभावित 2 हजार 896 किसानों के खाते में 15 करोड़ रुपए स्थानांतरित कर दी गई है।

सीधी बात

ललित हरदेल, नोडल अफसर

गुरुर में है सिंचाई सुविधा


- ये सही है कि बंपर उत्पादन हुआ है, प्रदेश में बालोद तीसरे नंबर पर है। एक एकड़ में 20 से 25 क्विंटल तक उपज होता है। अब इसमें 15 एकड़ खरीदते हैं, फिर भी 12 हजार से ज्यादा किसान तो धान ही नहीं बेच पाए।


- उस समय सूखे की स्थिति ज्यादा थी, इस बार तो बारिश हुई है भले रुककर हुई हो।


- गुरुर ब्लॉक में शुरुआत में बारिश नहीं हुई लेकिन सिंचाई सुविधा है। आखिरी में बारिश भी हुई तो उत्पादन बेहतर हुआ। वैसे जंगल क्षेत्र में कम उत्पादन हुआ है। सभी जगह स्थिति अलग-अलग है। डौंडी, देवरी, खेरथा, खामतराई, पिनकापार, जेवरतला में कम खरीदी हुई है।

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