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लापरवाही

शहर के विकास के लिए बने मास्टर प्लान में शुरू से गलतियां होती रही। नया मास्टर प्लान 2011 में बनकर तैयार हो जाना था। यह...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:10 AM IST
शहर के विकास के लिए बने मास्टर प्लान में शुरू से गलतियां होती रही। नया मास्टर प्लान 2011 में बनकर तैयार हो जाना था। यह काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। मास्टर प्लान तैयार करने में हुई दर्जनों गलतियों को सुधारने के लिए बार-बार रिव्यू किया जा रहा है। डेवलपमेंट प्लान तैयार करने में हुई त्रुटियों को सुधारने के लिए शासन से गठित विशेषज्ञों की कमेटी मास्टर प्लान को बार-बार लौटा रही है।

मास्टर प्लान तैयार करने में शुरू से कई गलतियां हुई। बड़ी खामियों का पता तब चला जब जन सुनवाई की गई। दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान 1154 आपत्तियां आई। 8 जून 2016 से 10 जून 2016 तक आपत्तियों की सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा आपत्तियां एग्रीकल्चर लैंड को आबादी भूमि में बदलने के प्रस्तावों को लेकर रही। अब फिर से अफसर रिव्यू करने वाले हैं।

2011 में लागू होना था मास्टर प्लान, 7 साल देरी हुई, लागू हुआ तो सिर्फ 13 साल रहेगा प्रभावी

जिले के नए मास्टर प्लान के लिए अफसरों ने कागजों में ही सर्वे किया था।

पिछला मास्टर प्लान 1991 में लागू हुआ, अभी सिर्फ सर्वे में ही 7 साल बीत गए, अब भी विभागीय अफसर करेंगे रिव्यू

पिछला मास्टर प्लान 1991 में लागू हुआ जिसकी अवधि 20 साल की थी। यानी यह मास्टर प्लान 2011 तक प्रभावशील रहा। 2011 में नया मास्टर प्लान तैयार कर अगले 20 साल यानी 2031 तक लागू करने की बजाय पुराने मास्टर प्लान के आधार पर ही काम चलता रहा। 2018 में भी नए मास्टर प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। मास्टर प्लान बनाने का काम देर से शुरू करने और ढेरों गलतियों के कारण बार-बार रिव्यू करने से 7 साल बीत चुके हैं। इस साल मास्टर प्लान लागू होने पर यह सिर्फ 2031 तक लागू होगा। यानी नया मास्टर प्लान 20 साल की बजाय सिर्फ 13 साल के लिए प्रभावी रहेगा। अभी तक अफसरों ने सिर्फ सर्वे किया है।

2031 के लिए तैयार हुआ मास्टर प्लान में हुई इस तरह की खामियां, जानिए...

1 कृषि भूमि घोषित: अंजोरा, नगपुरा सहित जिन इलाकों में अवैध प्लाटिंग हो चुकी हैं, उनमें से कई इलाकों को मास्टर प्लान में कृषि भूमि घोषित कर दिया गया। जिन इलाकों में प्लाटिंग नहीं हुई थी उन्हें आवासीय घोषित कर दिया गया।

4 पॉपुलेशन डेंसिटी का ध्यान नहीं: मास्टर प्लान में दुर्ग, भिलाई और आसपास के सौ गांवों की आबादी को ध्यान में रखकर प्रस्ताव तैयार किए गए।

रिव्यू के बाद पूरा प्लान रखा जाएगा...

2 इंडस्ट्रीयल सेंटर के प्रस्ताव: मास्टर प्लान तैयार करते समय धमधा ब्लाक के जेवरा सिरसा व आसपास के एरिया में कृषि भूमि पर इंडस्ट्रियल सेंटर स्थापित करने सहित प्लान के कई प्रस्ताव रखे गए थे। सांसद ताम्रध्वज साहू की आपत्ति के बाद इन्हें रद्द किया गया।

5आईआईटी तक को छोड़ दिया: मास्टर प्लान में कुटेलाभाठा में प्रस्तावित आईआईटी के आसपास डेवलपमेंट पर फोकस नहीं किया गया। जबकि इसे डेवलप करना था।


6 ग्रामीण इलाकों के साथ असंतुलन: ग्रामीण इलाकों में कॉमर्शियल सेंटर, इंडस्ट्रियल सेंटर, पार्क और मनोरंजन के साधनों में असंतुलन पाया गया। शहरी व ग्रामीण का बैलेंस नहीं।

3 कनेक्टिविटी का ध्यान नहीं: मास्टर प्लान में दुर्ग, भिलाई से जुड़े राजनांदगांव और रायपुर की रोड कनेक्टिविटी का ध्यान नहीं रखा गया। 2031 तक दोनों शहरों से रोड ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम को ध्यान में रखकर मास्टर प्लान नहीं बनाया गया।

7नदी किनारे की जमीन आबादी: शिवनाथ नदी और शंकर नाला, पुलगांव नाला से सटे एरिया को आबादी भूमि घोषित करने में कई गलतियां की गई। इसमें लापरवाही हुई।