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से.-9 अस्पताल में होगी टीबी मरीजों की जांच अमेरिका की मशीन से 2 घंटे में मिलेगी रिपोर्ट

सुपेला और पाटन क्षेत्र के टीबी मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें रोग की जांच के लिए दुर्ग जिला अस्पताल नहीं...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:10 AM IST
से.-9 अस्पताल में होगी टीबी मरीजों की जांच अमेरिका की मशीन से 2 घंटे में मिलेगी रिपोर्ट
सुपेला और पाटन क्षेत्र के टीबी मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें रोग की जांच के लिए दुर्ग जिला अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा। उनका यह काम बीएसपी संचालित जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा अनुसंधान केंद्र सेक्टर-9 में ही हो जाएगा। जहां दुनिया की सबसे एडवांस टेक्नालॉजी वाली अमेरिका की सीबी नाट मशीन स्थापित की गई। जिसकी रिपोर्ट के लिए मरीज को दो-चार महीने नहीं दो घंटे में मिल जाएगी। दुर्ग जिले में यह दूसरी और प्रदेश में यह नौंवी मशीन है।

फिलहाल जिले के मरीजों को टीबी की आशंका होने पर दुर्ग जिला अस्पताल के क्षय नियंत्रण विभाग में जाना पड़ता है। जहां हर साल करीब 4 हजार नए टीबी मरीजों की जांच और इलाज किया जा रहा है। जिले में एकमात्र सेंटर होने के कारण वहां जांच और उसकी रिपोर्ट के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

अब मरीजों को इस तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। केंद्र शासन की पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत बीएसपी के सेक्टर-9 अस्पताल में भी टीबी मरीजों की जांच व इलाज की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र शुरू किया गया है। केंद्र में अमेरिका निर्मित सीबी नाट मशीन शनिवार को स्थापित की गई। जिसके बाद जल्द ही यहां भी मरीजों को रोग की जांच की सुविधा उपलब्ध होने लगेगी।

एडवांस टेक्नालॉजी वाली अमेरिका की लगी मशीन

केंद्र में अमेरिका निर्मित सीबी नाट मशीन शनिवार को स्थापित की गई।

एमडीआर मरीजों की जांच नि:शुल्क की जाएगी

सेक्टर-9 अस्पताल में एमडीआर मरीजों की जांच पूरी तरह निशुल्क की जाएगी। जबकि प्राइवेट सेंटर में इस जांच के दो हजार रुपए तक वसूले जा रहे हैं। एमडीआर का इलाज भी काफी महंगा है जिसे केंद्र शासन ने मरीजों के लिए पूरी तरह निशुल्क रखा है। मरीजों को यह सुविधा पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्र ने इसके लिए मेडिकल आफिसर डॉ विनायक मेश्राम सहित अन्य स्टाफ की पोस्टिंग भी कर दी है।

सुपेला और पाटन इलाके के मरीजों की भी होगी जांच

पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले को चार ट्यूबरक्लोसिस यूनिट (टीयू) में बांटा गया है। इनमें दुर्ग, सुपेला, पाटन और धमधा शामिल है। दुर्ग और धमधा क्षेत्र के मरीजों के लिए जांच और इलाज करा सकेंगे। वहीं सुपेला और पाटन इलाके के टीबी मरीजों की जांच के लिए सेक्टर-9 अस्पताल को निर्धारित किया गया है। फिर मरीज सरकारी अस्पताल से रेफर किया गया हो या प्राइवेट अस्पताल से। सभी की जांच इन केंद्रों में की जाएगी।

जानिए क्या है एमडीआर

मरीज को होने वाला टीबी पहले तो सामान्य होता है। इसका इलाज 6 से 8 महीने तक चलता है। इसके रिफेमपिसिम दवा कारगर होती है। मरीज ने इसका नियमित सेवन किया तो रोग समाप्त हो जाता है। लेकिन बीच में ही मरीज ने दवा का सेवन यह सोच कर बंद कर दिया कि बीमारी ठीक हो चुकी है तो उस पर टीबी दोबारा अटैक करता है। इसे ही मल्टी ड्रग रजिस्टेंस (एमडीआर) कहा जाता है। इसका इलाज दो साल तक चलता है। इसे ठीक करने के लिए दी जाने वाली दवा के साइड इफैक्ट भी बहुत हैं।

डीएनए से होती है टीबी की जांच

सीबी नाट मशीन टीबी के एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंस ) मरीजों की जांच की जाएगी। मरीज के बलगम से उसके डीएनए से रोग का पता लगाया जाता है। इस वजह से रिपोर्ट में किसी भी तरह के आशंका की गुंजाइश नहीं रह जाती। इतना ही नही रिपोर्ट भी मरीज को दो घंटे में उपलब्ध करा दी जाएगी। ताकि रिपोर्ट पाजीटिव आने पर तत्काल इलाज भी शुरू किया जा सके। इसके पूर्व एमडीआर रोग का पता लगाने के लिए सैंपल बड़े शहरों में भेजा जाता था। यहां से रिपोर्ट आने में दो से चार महीने लग जाते थे।

जल्द मरीजों को जांच की सुविधा मिलेगी


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