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पहले के कार्यकाल में प्रतिनिधि यूनियन कर्मियों से हर काम के लिए पहले वसूलती थी रकम : सीटू

सीटू महासचिव डीवीएस रेड्डी ने रविवार को बिना किसी यूनियन का नाम लिए बड़ा आरोप लगाया पहले कर्मी कदम-कदम पर ठगे जाते...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:10 AM IST

सीटू महासचिव डीवीएस रेड्डी ने रविवार को बिना किसी यूनियन का नाम लिए बड़ा आरोप लगाया पहले कर्मी कदम-कदम पर ठगे जाते थे। जैसे स्थाई अथवा अस्थाई ऋण लेने, मेडिकल रैफरल करवाने, अनफिट प्रक्रिया,शिक्षा में बच्चों का एडमिशन प्रक्रिया, आवास आवंटन प्रक्रिया, जैसे तमाम कार्यों में बिना पैसे के लेनदेन की कुछ भी नहीं होता था। आज इन सभी कार्यों को करने के लिए कर्मियों को ना तो किसी नेता का सहारा लेना पड़ता है, ना ही किसी को पैसे देने की आवश्यकता होती। सभी कार्य पारदर्शी तरीके से होता है इस व्यवस्था को पैदा करने के लिए सीटू को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

दरअसल, उनका यह आरोप पूर्व की प्रतिनिधि यूनियन पर था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आज सीटू इन कार्यों की पारदर्शिता से परेशान कुछ यूनियन नेता फिर से पुरानी स्थिति को बहाल कर फलना फूलना चाहते हैं। इसीलिए ये यूनियनें केंद्र के दबाव के चलते बीएसपी सहित सभी संयंत्रों में हुई कटौतियों के बारे में कर्मियों को बताने की बजाए उसका ठीकरा सीटू पर फोड़ने की नाकाम कोशिश में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि बीएसपी में ज्यादातर यूनियनें कुछ नहीं किया विषय पर ही चुनाव लड़ने की तैयारियां कर रही हैं।

जब कंपनी नुकसान में रहती हे तो मूल वेतन व भत्ते मिलती रहती है

महासचिव डीवीएस रेड्डी ने बताया कि संयंत्र में काम करने के एवज में हमको मिलने वाली तनख्वाह में 2 भाग होता है। पहला अधिकार एवं दूसरी सुविधाएं। अधिकार के तहत बेसिक, मूल वेतन, महंगाई भत्ता, ग्रेच्युटी आदि आते हैं। वहीं सुविधाओं के तहत पर्क्स, रात्रि पाली भत्ता, वाहन भत्ता, एलटीसी, एलएलटीसी, ईंधन भत्ता, इंसेंटिव सहित अन्य भत्ते होते हैं। अधिकार के रूप में मिलने वाला वेतन भारत सरकार के कानून से संचालित होता है। इसलिए कंपनी जिस भी हालत में हो,वेतन एवं महंगाई भत्ता दिया जाना कंपनी की जिम्मेदारी है। इसलिए कंपनी नुकसान में रहती है तो वेतन भत्ता मिलते रहती है।

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