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गजलों की महफिल में सुनाई छत्तीसगढ़ी रचनाएं

भिलाई में सुरुज नवा उवइया हे कार्यक्रम के तहत गजरों की महफिल सजी। सिटी रिपोर्टर | भिलाई रविवार को सुरुज नवा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:10 AM IST

गजलों की महफिल में सुनाई छत्तीसगढ़ी रचनाएं
भिलाई में सुरुज नवा उवइया हे कार्यक्रम के तहत गजरों की महफिल सजी।

सिटी रिपोर्टर | भिलाई

रविवार को सुरुज नवा उगइया हे पर केंद्रित गजलों की महफिल न्यू आदर्श नगर में सजी। गजलकार बलदाऊ राम साहू के संग्रह पर ये कार्यक्रम आयोजित था। इस दौरान गायक और संगीतकार देवीप्रसाद तिवारी, डॉ. चितरंजन कर, सोहन साहू और रमेश यादव ने संगत किया। इस संग्रह के कुछ गजलों की प्रस्तुति

इस दौरान गजलों पर चर्चा करते हुए देवी प्रसाद तिवारी ने कहा कि बलदाऊ राम साहू के गजलों की खास बात है कि उन्हें एक ही सांस में पढ़ने की इच्छा होती है। महफिल की शुरूआत संग्रह में से ठलहा ला सरकार बना दे राम जी गजल के साथ हुई। डॉ. चितरंजन कर ने कहा कि बलदाऊ राम साहू के गजलों में लोक ही प्रधान है।

तरन्नुम के साथ गीत गाकर बटोरी तालियां

डॉ. कर ने संग्रह से गीत देश के गाए बर हे.., कोन जनी जिंदगी कइसे गुजरही.., तरन्नुम के साथ गाकर तालियां बटोरी। साथ ही सोहन साहू ने श्रृंगारिक गजल-सपना म तोर संग मुलाकात हो जातिस को पेश किया। तबले पर साथ सतीश मिश्रा ने दिया। मुकुंद कौशल, रवि श्रीवास्तव, डॉ.कोमल सार्वा, पूनाराम साहू, सीआर साहू, संजीव तिवारी, शिव बालक साहू, मुकुंद साहू आदि शामिल थे।

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