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बीएसपी में उत्पादन घटने से जनवरी में कर्मियों का इन्सेंटिव भी घट गया

जनवरी में बीएसपी कर्मचारियों को इनसेंटिव नहीं के बराबर मिला है। इस्पात श्रमिक मंच का मानना है कि अगर एनजेसीएस की...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:10 AM IST
जनवरी में बीएसपी कर्मचारियों को इनसेंटिव नहीं के बराबर मिला है। इस्पात श्रमिक मंच का मानना है कि अगर एनजेसीएस की सदस्य यूनियनें फिक्स इनसेंटिव को बढ़ा पाती तो ये स्थिति उत्पन्न नहीं होती। वर्ष 1986 से फिक्स इनसेंटिव 19 रुपए चला आ रहा है। इस बीच में पांच से 6 बार वेतन समझौता हो चुका है लेकिन एनजेसीएस में भाग लेने वाली यूनियनें फिक्स इनसेंटिव को नहीं बढ़ा पाई है। इससे कर्मियों में नाराजगी है।

इसे लेकर मंच के महासचिव राजेश अग्रवाल ने उपश्रमायुक्त केंद्रीय रायपुर के समक्ष इनसेंटिव स्कीम रिवाइज करने के लिए परिवाद दायर किया है। वर्तमान में एस-10 का ही इनसेंटिव मिल रहा है जो कि गलत है और 2007 से इनसेंटिव स्कीम रिवाइज नहीं हुई। उस समय प्रति व्यक्ति प्रति टन वार्षिक उत्पादन क्षमता 290 थी। कर्मचारियों का उनका हक दिलाने परिवाद लगाया गया है।

इसलिए होना चाहिए पॉलिसी रिवाइज

वर्तमान में प्रति व्यक्ति प्रति टन वार्षिक उत्पादन क्षमता 390-410 टन को गई है। 2007 में इनसेंटिव पालिसी चार मीट्रिक टन थी और वर्तमान में जो उत्पादन हो रहा है 5 से 6 मीट्रिक टन हो रहा है। इस हिसाब से भी इनसेंटिव पालिसी रिवाइज होना चाहिए। प्रबंधन से चर्चा विफल होने के कारण उप श्रमायुक्त रायपुर ने प्रकरण श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को रेफर कर दिया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इस्पात श्रमिक मंच इनसेंटिव स्कीम की जानकारी मांगी है। जिस पर मंच ने नई इनसेंटिव स्कीम बनाकर भेजा है। जिसके मुताबिक कर्मचारियों को 2000 से 4000 तक अतिरिक्त आर्थिक लाभ होगा।

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