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शोध व नई खोज को सुरक्षित रखने पैटेंट है जरूरी- डॉ. सुब्रह्मण्यम, छात्रों ने जाने नियम

लगातार हो रहे अविष्कार के बाद भी उसे सुरक्षित तरीके से नहीं रखा जा रहा है। इसकी वजह से नए अविष्कार का दुरुपयोग होने...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:15 AM IST
लगातार हो रहे अविष्कार के बाद भी उसे सुरक्षित तरीके से नहीं रखा जा रहा है। इसकी वजह से नए अविष्कार का दुरुपयोग होने की आशंका है। इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने शोध और अविष्कार से जुड़े लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान शुरू किया है। इसके तहत बुधवार को शंकराचार्य कॉलेज जुनवानी में पेटेंट पर कार्यशाला रखी गई।

इसमें सी कॉस्ट महानिदेशक डॉ. के सुब्रह्मण्यम छात्रों को पैटेंट के बारे में बताया उन्होंने कहा कि आपने कोई नई चीज का अविष्कार किया है तो उसका पेटेंट करवाएं। इसका फायदा आपको मिलेगा। शोध करने वालों को समाज के लिए उपयोगी विषयों पर काम करना चाहिए। चुनौतियों को अवसरों के रूप में तब्दील करना आपको आना चाहिए। तभी आपकी मेहनत सफल होगी और उसका फायदा समाज को मिलेगा।

शंकराचार्य कॉलेज जुनवानी में हुई कार्यशाला में छात्रोंं और शोधार्थियों को पैटेंट की उपयोगिता बताई गई।

अब सी कॉस्ट में कर सकते हैं पैटेंट के लिए आवेदन, मिलंेगी सुविधाएं

उन्होंने कहा कि समय के साथ आगे नहीं बढ़ोगे तो पीछे रह जाओगे। पढ़े लिखे होने के साथ समझदार होना जरूरी है। अपनी कल्पनाओं का हम पैटेंट नहीं करा सकते। हम कोई वस्तु बनाते हैं तो उसका पैटेंट करा सकते हैं। किसी भी वस्तु की कॉमर्शियल वैल्यू उसका पेटेंट दिला सकता है। किसी नई प्रजाति ढूंढा है तो उसे आप पेटेंट नहीं करा सकते।

नए अविष्कारों के पेटेंट से छात्र-छात्राओं व समाज को होगा लाभ

मुख्यअतिथि डॉ. के. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि विषय का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि छत्तीसगढ़ में बौद्धिक संपदा के विषय में जागरूकता आए। सभी स्टूडेंट्स, शोधार्थी और समाज को इससे लाभ होगा। इसकी जानकारी लोगों को देनी जरूरी है। कार्यक्रम में आयोजकीय अतिथि गंगाजली एजूकेशन सोसायटी के अध्यक्ष आईपी मिश्रा व प्राचार्य डॉ रक्षा सिंह थीं।

वस्तु की कॉमर्शियल वैल्यू होना अनिवार्य: अमित दुबे

तकनीकी सत्र में अमित दुबे ने बताया कि पेटेंट 20 साल के लिए होता है। फिर संबंधित काम समाज को समर्पित हो जाता है। उन्होंने अधिकारों के संरक्षण और कॉपीराइट नियम के बारे में बताया कि वस्तु का कॉमर्शियल मोटिव हो। इसमें दूसरे राज्यों के प्रतिभागी भी शामिल हुए। डॉ. समृद्धि एस. चेपे, डॉ. सीएल पटेल, अजय श्रीवास, लता शर्मा आदि उपस्थित थे।

ज्ञान और ध्यान दोनों हैं जरूरी : डॉ. जे दुर्गा राव

संस्था के निदेशक डॉ. जे दुर्गा प्रसाद राव ने कहा कि कार्यशाला के इस विषय पर लोगों का ज्ञान और ध्यान बहुत कम है। इस विषय पर काम बहुत कम हुआ है। यह विषय लोगों को फायदा पहुंचाएगा। इस दौरान आईपी मिश्रा ने कहा कि हमारी संपत्ति का पेटेंट कराना जरूरी है। ज्ञान का भी पेटेंट कराना चाहिए।

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