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कोचिंग के लिए भिलाई आने वाले बच्चों की संख्या में इस साल दस फीसदी इजाफा, वाइजेक से आधा तो कोटा से पांच गुना कम खर्च

खर्च के बारे में वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं (राशि औसत में) शहर कुल खर्च ट्यूशन फीस रहना व खाना पॉकिट मनी ...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:15 AM IST
कोचिंग के लिए भिलाई आने वाले बच्चों की संख्या में इस साल दस फीसदी इजाफा, वाइजेक से आधा तो कोटा से पांच गुना कम खर्च
खर्च के बारे में वह सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं (राशि औसत में)

शहर कुल खर्च ट्यूशन फीस रहना व खाना पॉकिट मनी

कोटा 4 लाख (औसत) 1.36 लाख 8-10 हजार 3-4 हजार

विशाखापटनम 1.50 लाख (औसत) उपलब्ध नहीं 7-9 हजार 1-2 हजार

भिलाई 90,000 55 हजार 5-6 हजार 2-3 हजार

छत्तीसगढ़ में हर साल 4000 बच्चे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं। इनमें से 2000 से अधिक छात्र भिलाई में कोचिंग लेने के लिए आते हैं। इसकी संख्या बढ़कर अब 2200 से अधिक हो गई है। वे यहां पर आकर परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश के आईआईटी, नीट, एम्स और पीईटी आदि प्रतियोगी परीक्षा में चयनित होते हैं।

भिलाई में सिविक सेंटर को कोचिंग हब माना जाता है।

सड़क से है सीधी कनेक्टिविटी

भिलाई स्टील प्लांट और आईआईटी होने की वजह से भिलाई को पूरे देश में जानते हैं। यहां पहुंचने के लिए ट्रेन और बस की सीधी सुविधाएं लगभग सभी राज्यों में है। इसके अलावा राजधानी रायपुर स्थित एयरपोर्ट यहां से सिर्फ 32 किलो मीटर दूर है।

आईआईटी में प्रवेश पाने वाले छात्रों में भिलाई का पूरे प्रदेश में दबदबा

वर्ष दाखिला

2010 60%

2011 55%

2012 35%

2013 60%

वर्ष दाखिला

2014 51%

2015 62%

2016 61%

2017 81%

ये चार्ट सिर्फ आईआईटी में प्रवेश लेने वालों के हैं। एग्जाम विलयर करनेवालों की रैकिंग 19500 तक बनती है लेकिन आईआईटी की सीट्स 12 हजार रैंक वाले स्टूडैंट्स मिलती है।

आईआईटी में सिलेक्शन के मामले में भिलाई देश के टॉप 20 सिटी में

भिलाई से हर साल औसतन 200 बच्चे आईआईटी में सिलेक्ट हो रहे हैं। प्रदेश में सबसे बेहतर रिकॉर्ड भिलाई का 1980 के दशक से है। यहां से नेशनल टॉपर भी निकल चुके हैं। पिछले तीन सालों के आंकड़े देखें तो टॉप 100 में दस बच्चे तक सिलेक्ट हो रहे हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक भिलाई देश के 20 सर्वाधिक संभावनाशील शहरों में शामिल है।

स्मार्ट क्लास में वीडियो क्लिपिंग और सोशल मीडिया का उपयोग

परंपरागत पढ़ाने के तरीके के साथ ही वीडियो क्लिपिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारियां दी जा रही हैं। उनके डाउट्स क्लियर किए जा रहे हैं। जो बच्चे किसी कारणवश क्लास अटेंड नहीं कर पाए हैं तो उस लेक्चर का वीडियो क्लिपिंग देख सकते हैं और छूटी हुई पढ़ाई को पूरा कर सकते हैं। बच्चों के साथ शिक्षक अधिक से अधिक समय बीता रहे हैं, ताकि वे प्रतियोगी परीक्षा में ज्यादा से ज्यादा अंक अर्जित कर सकें।

ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, बंगाल के बच्चे आते हैं पढ़ने

भिलाई में प्रतियोगी परीक्षा की अच्छी तैयारी को देखते हुए मध्यप्रदेश के बालाघाट और शहडोल, ओडिसा के खरियार रोड, झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के सरगुजा और बस्तर से भी विद्यार्थी आ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कि मध्य भारत में भिलाई एजुकेशन हब के साथ साथ कोचिंग के लिए भी लगातार नाम कमा रहा है। यहां पढ़ने वाले बच्चे आईआईटी और एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के लिए चयनित होते रहे हैं।

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