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14 हजार युवाओं ने की फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई, 14 सौ को भी नहीं मिल पाई नौकरी

राज्य के विश्वविद्यालयों आैर कॉलेजों से फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई कर निकले युवा बेरोजगारी के दिन काट रहे हैं।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:15 AM IST

14 हजार युवाओं ने की फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई, 14 सौ को भी नहीं मिल पाई नौकरी
राज्य के विश्वविद्यालयों आैर कॉलेजों से फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई कर निकले युवा बेरोजगारी के दिन काट रहे हैं। सरकारी स्कूलों आैर काॅलेजों में पद खाली हाेने के बाद भी उन्हें नाैकरी नहीं मिल रही है। हालात ये हैं कि पिछले 14 साल में लगभग 14 हजार से ज्यादा युवा बीपीएड आैर एमपीएड कर निकल चुके हैं, लेकिन 1400 को भी नौकरी नहीं मिली है। स्कूलों में 2010 के बाद से तो कॉलेजों में 1994 के बाद से स्पोर्ट्स टीचर्स की भर्ती ही नहीं की गई है। जबकि स्कूलों में खेल को जरूरी बनाने के लिए संसद में बिल लाने की तैयारी की जा रही है।

देश में खेलो इंडिया स्कीम लागू करने के बाद अब स्कूलों का कोर्स आधा करने की तैयारी की जा रही है। छत्तीसगढ़ में खेलों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। स्कूलों में खेल की फीस लेने के बाद भी उन्हें सिखाने वाला कोई नहीं होता है। जबकि राज्य के मिडिल आैर हाई स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन के एक-एक टीचर जरूर होने चाहिए। 2010 में शिक्षाकर्मी के कुछ पद के लिए बीपीएड वालों की भर्ती की गई थी। इसके पहले और न तो इसके बाद शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।

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कॉलेजों सें खत्म किए जा रहे हैं पद

स्कूलों की तरह कॉलेजों में भी स्पोर्ट्स टीचर होना बहुत जरूरी है। वहां पर इनकी संख्या ना के बराबर है। बताया गया है कि पीएससी द्वारा 1994 में स्पोर्ट्स टीचर की भर्ती की गई थी। इसके बाद से अब तक कॉलेजों में स्पोर्ट्स टीचर नहीं रखे गए हैं। जानकारों के मुताबिक अब इन पदों को डेड घोषित किया जा रहा है। एमपीएड कर चुके छात्रों का कहना है कि निजी कॉलेजों में तो एक न एक स्पोर्ट्स टीचर रखे जाते हैं लेकिन सरकारी कॉलेजों से इस पद को ही खत्म किया जा रहा है। ऐसे में उनके भविष्य को लेकर संकट छा गया है।

50 से अधिक एनआईएस खोज रहे नौकरी

खेल का बजट, फीस भी

भले ही स्कूलों आैर कॉलेजों में खेल सुविधाएं न हों, स्पोर्ट्स टीचर न हों लेकिन सभी स्कूलों आैर कॉलेजों में खेल का बजट निर्धारित किया गया है। इसके अलावा स्कूल आैर कॉलेज की फीस की पर्ची में खेल के फीस का भी उल्लेख रहता है आैर इसकी शुल्क भी निर्धारित होती है।

किसी भी खेल में कोच बनने के लिए एनआईएस की डिग्री मान्य होती है। हमारे स्टेट में वर्तमान में 10 से अधिक खेलों में 50 से अधिक एनआईएस कर चुके प्रतिभागी बिना नौकरी के हैं। विभाग में 34 कोच के पद खाली हैं। इनकी अगर भर्ती की जाती है तो राज्य में बने इंफ्रास्ट्रक्चर का भी सही उपयोग खिलाड़ी कर पाएंगे। वर्तमान में अधिकतर का उपयोग लगातार नहीं हो पा रहा है। नेशनल और इंटरनेशनल इवेंट में मेडल के लिए लगातार प्रैक्टिस करना जरूरी है।

60-70 खेलों का पता नहीं

इस कोर्स के कुछ टीचर्स का कहना है कि प्रदेश के स्कूलों में ही खेल का बेस तैयार किया जा सकता है। लेकिन बच्चों को बिना ट्रेनर के खेलना पड़ता है। लगभग 60 से 70 अलग-अलग तरह के खेल स्कूलों के लिए तैयार किए गए हैं लेकिन बच्चों को दो-तीन खेल के अलावा आैर कुछ नहीं पता।

हर साल 1000-1200 पासआउट

राज्य के विश्वविद्यालयों के अलावा कई कॉलेजों में भी शारीरिक शिक्षा के पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। अलग-अलग कॉलेजों आैर यूनिवर्सिटी लगभग 1200 से ज्यादा सीटें फिजिकल एजुकेशन कोर्स की हैं। रायपुर के रविशंकर विश्वविद्यालय, विप्र कॉलेज, मैट्स कॉलेज, रावतपुरा सरकार कॉलेज, हरिशंकर कॉलेज, डिग्री गर्ल्स कॉलेज, अभनपुर, धमतरी, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर के कॉलेज आैर विवि में यह कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से हर साल करीब 1000 से 1200 युवा पासआउट हो रहे हैं। पड़ताल में पाया कि सरकार द्वारा इनकी भर्ती के लिए कोई नीति तैयार नहीं की गई हैै। आज एजुकेशन के साथ खेल को करियर के रूप में देखा जा रहा है तो लेकिन प्रदेश में इस कोर्स के युवाओं के करियर पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

अन्य राज्यों में दी जाती है प्राथमिकता

छत्तीसगढ़ के विवि आैर कॉलेजों में शारीरिक शिक्षा का कोर्स कर रहे दूसरे राज्यों के बच्चों की संख्या भी काफी अधिक है। बताया गया है कि दूसरे राज्यों में इसे एक विषय के रुप में मान्यता दी गई है। इसके कारण इस कोर्स को करने वालों की नौकरी लगभग तय होती है। यही वजह है कि अन्य प्रदेशों के छात्र यहां आकर बीपीएड कर निकल जाते हैं। जबकि प्रदेश में इसे अनिवार्य विषय के रूप में नहीं रखा गया है।

प्रदेश के स्कूलों में 2010 और कॉलेजों में 1994 के बाद से नहीं हुई है स्पोर्ट्स टीचर्स की भर्ती

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Web Title: 14 हजार युवाओं ने की फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई, 14 सौ को भी नहीं मिल पाई नौकरी
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