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सेफ्टी कमेटियों के गठन में तटस्थ कर्मी किए जाएंगे शामिल, यूनियनों को प्रबंधन ने कर दिया दरकिनार

बीएसपी में सेफ्टी कमेटियों के गठन को लेकर यूनियनों के बीच चल रहे घमासान के बीच प्रबंधन ने कमेटियों में ऐसे तटस्थ...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:20 AM IST
सेफ्टी कमेटियों के गठन में तटस्थ कर्मी किए जाएंगे शामिल, यूनियनों को प्रबंधन ने कर दिया दरकिनार
बीएसपी में सेफ्टी कमेटियों के गठन को लेकर यूनियनों के बीच चल रहे घमासान के बीच प्रबंधन ने कमेटियों में ऐसे तटस्थ कर्मियों को शामिल किए जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसका किसी भी यूनियन से संबंध नहीं है। प्रबंधन ने सेफ्टी कमेटियों में यूनियनों को दरकिनार कर दिया है।

प्रबंधन ने हाल ही में उन सभी विभाग प्रमुखों को जहां सेफ्टी कमेटी का गठन किया जाना है, उन्हें मेल के जरिए तटस्थ कर्मियों को शामिल करते हुए जल्द से जल्द कमेटी का गठन करने के निर्देश दिए हैं ताकि सुरक्षा कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके। यूनियन के सदस्यों ने जीएम सेफ्टी टी पांडियाराजा का घेराव करते हुए कमेटियों के गठन के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। इसके बाद दबाव में आए प्रबंधन ने कमेटियों के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। इसकी भनक मिलते ही विरोधी यूनियनें सक्रिय हो गई और एक दलीय व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए अन्य यूनियनों को भी उसमें शामिल किए जाने की मांग करते हुए आईआर विभाग को ज्ञापन सौंपा।

जहां 250 से ज्यादा कर्मी काम करते हैं वहां सेफ्टी कमेटी जरूरी

डिप्टी डायरेक्टर दे चुके कार्रवाई की चेतावनी

बीएसपी में सेफ्टी कमेटियों का गठन नहीं किए जाने को औद्योगिक स्वास्थ एवं सुरक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने गंभीरता से लेते हुए सितंबर में प्रबंधन को एक और नोटिस जारी किया था। चेतावनी भी दी कि निरीक्षण के दौरान कमेटियों का गठन नहीं होने की स्थिति में संबंधित फैक्ट्री के मैनेजर के खिलाफ लेबर कोर्ट में जुर्म दर्ज कराया जाएगा।

श्रमिकों की सुरक्षा के लिए ये जरूरी

श्रमिकों की सुरक्षा के लिए सेफ्टी कमेटी का गठन करना है। इसमें प्रबंधन व श्रमिक वर्ग का प्रतिनिधित्व होता है। सुरक्षा की समीक्षा की जाती है कि नियमों का सही पालन हो रहा है या नहीं। डिप्टी डायरेक्टर के लिए इन कमेटियों की अहमियत इसलिए है कि घटना को लेकर प्रबंधन की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाती है।

हर 3 माह में कमेटी की होती है बैठक

प्लांट में 39 फैक्ट्रियां हैं। इनमें से 26 को खतरनाक मानकर वहां सेफ्टी कमेटियां गठित की जाती है। प्रत्येक कमेटी में वहां के चार-चार कर्मियों को प्रतिनिधित्व दिया जाता है। कमेटी की हर तीन महीने में बैठक आयोजित किया जाना अनिवार्य है। फैक्ट्री की सेफ्टी कमियों पर चर्चा कर निराकरण किए जाने का प्रावधान है।

एएलसी के यहां लंबित है मामला

प्रबंधन द्वारा सेफ्टी कमेटियों का गठन नहीं किए जाने पर सीटू द्वारा केंद्रीय श्रमायुक्त के यहां याचिका भी दायर कर रखी है। 18 जनवरी को सुनवाई के बाद 30 जनवरी दे दी गई थी। इस दिन एएलसी अखिलेश राय के उपलब्ध नहीं होने से सुनवाई टालनी पड़ी। यूनियनों ने भी एएलसी के यहां शिकायत दर्ज करा चुके हैं।

ये कहता है कमेटी के लिए अधिनियम

कारखाना अधिनियम 1948 की धारा 41 के अनुसार जिस फैक्ट्री में 250 या उससे अधिक कर्मी कार्य करते हैं, वहां सेफ्टी कमेटी अनिवार्य है। सुरक्षा समिति में वहीं सदस्य के रूप में शामिल किया जाता है जो कर्मियों का प्रतिनिधित्व करता हो। कमेटी के कुल सदस्यों में से आधे कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाले होते हैं।

स्थायी समाधान जरुरी


संवैधानिक संकट होगा


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