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पानी से कॉपर व क्रोमियम को अलग करेगी जेली

साइंस कॉलेज की शोधार्थी रेणु वर्मा ने चूने की एक ऐसी जेली बनाई है, जिससे पानी में पाए जाने वाले भारी तत्वों जैसे...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:20 AM IST
साइंस कॉलेज की शोधार्थी रेणु वर्मा ने चूने की एक ऐसी जेली बनाई है, जिससे पानी में पाए जाने वाले भारी तत्वों जैसे कॉपर, आर्सेनिक और लेड जैसे तत्वों को अलग किया जा सकता है। यह जेली इन भारी तत्वों को सोखकर पानी को शुद्ध करता है। बड़े पैमाने पर यदि इसका उपयोग किया जाए तो इसका उपयोग फिल्टर प्लांट या फिर सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट कर सकते हैं। उनके शोध की उपयोगिता को देखते हुए डीयू में हुई यंग साइंटिस्ट कांग्रेस में उनको पहला इनाम दिया गया है। वहीं अन्य रिसर्च स्कॉलर ने भी अपने रिसर्च पेपर कॉलेज में पेश किए। जिसे एक्सपर्ट्स ने सराहा भी।

यंग साइंटिस्ट कांग्रेस फर्स्ट प्राइज प्राप्त करने वाली में रेणु वर्मा ने किया अविष्कार, देशभर के एक्सपर्ट्स हुए शामिल

पानी की अशुद्धता को देखते हुए रेणुका ने किया इस विषय में रिसर्च

रेणु ने बताया कि पानी की अशुद्धता और इससे होने वाली बीमारियों को देखते हुए उन्होंने इस विषय पर काम किया। उनके विषय का शीर्षक एब्जार्व कॉपर बाई लाइजिन फंक्शनल लाइफ मैकेनिक नैनो कैल्शियम एलिग्नेट बीड। इसमें लाइजिन और कैल्शियम को लेकर रासायनिक प्रक्रिया से एक अलग तरह की जेली या बीड बनाई। पानी के ऊपर इसे डाल देते हैं। कुछ देर बाद यह पानी में पाए जाने वाले भारी तत्वों को शोख लेता है।

निगम की ओर से देने वाले पानी से किया प्रयोग

शहर में निगम की ओर से दिए जा रहा पानी का नमूना लिया गया। जेली डालने के पहले इस पानी का केमिकल रिपोर्ट देखा गया। इसमें पाए जाने वाले भारी तत्वों की मात्रा देखी गई। फिर जेली डाली गई। उसके करीब आधे घंटे बाद फिर पानी का केमिकल रिपोर्ट लिया गया। इसमें भारी तत्वों की मात्रा 40 ले 45 फीसदी कम मिली। जैसे चॉक स्याही के डाई को सोख लेता है, ठीक उसी तरह यह जेली भी पानी में पाए जाने वाले कॉपर को शोख लेता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस प्रयोग को अगर उपयोग में लाया जाए तो काफी लाभ होगा।

बड़ी बीमारियों में होगा लाभदायक

लेड और आर्सेनिक की अधिक मात्रा से पेट संबंधी बड़ी बीमारी होने की आशंका रहती है। इसकी लगातार अनदेखी करने से कैंसर की आशंका बनने लगती है। इन तत्वों को पानी से अलग करना आसान भी नहीं होता है। ऐसे में यह जेली इन भारी तत्वों को पानी से अलग करने में कारगर साबित हो सकता है।

पानी को शुद्ध करने में होगा कारगर

साइंस कॉलेज की रसायन विभाग की प्राध्यापिका डॉ. अनुपमा अस्थाना और रेणु का गाइड का कहना है कि सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट में या फिर ज्यादा प्रदूषित पानी को शुद्ध करने में इसका उपयोग किया जा सकता है। प्रयोगशाला में कॉपर के साथ लेड को भी प्रायोगिक तौर पर अलग करके देखा गया है। व्यापक स्तर पर इसका उपयोग करने से समाज के सभी वर्गों को इसका लाभ हो सकता है। यंग साइंटिस्ट कान्फ्रेंस में देशभर के रिसर्च स्कॉलर ने अपना प्रेजेंटेशन दिया।