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आयोग की अनुशंसा ताक पर, इस बार भी लंबी होगी वेज रिवीजन की प्रक्रिया

Durg Bhilai News - आयोग ने जितना एमजीबी और पर्क्स तय किया उससे अधिक मांग रहे कर्मचारी यूनियनें सिटी रिपोर्टर | भिलाई वेज रिवीजन...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 02:20 AM IST
आयोग की अनुशंसा ताक पर, इस बार भी लंबी होगी वेज रिवीजन की प्रक्रिया
आयोग ने जितना एमजीबी और पर्क्स तय किया उससे अधिक मांग रहे कर्मचारी यूनियनें

सिटी रिपोर्टर | भिलाई

वेज रिवीजन के लिए चार्टर अॉफ डिमांड तैयार करते समय यूनियनों ने कर्मियों को खुश करने के लिए आयोग की अनुशंसाओं का भी ध्यान नहीं रखा। वहीं एनजेसीएस सदस्य यूनियनों की अलग-अलग डिमांड के चलते भी हर बार की तरह इस बार भी वेज रिवीजन की प्रक्रिया लंबी खींचना तय है। यानि कर्मियों को कम से कम एक साल तक वेज रिवीजन का इंतजार करना पड़ सकता है।

बीएसपी सहित सेल की सभी इकाइयों में कार्यरत कर्मी वेज रिवीजन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जो एक जनवरी 2017 से लंबित है। बढ़ती महंगाई और कम होते इंसेंटिव के कारण भी कर्मी वेज रिवीजन को लेकर बेताब है। वहीं अब तक वेतन समझौते में लगा लंबा समय और मांगों की अव्यवहारिकता से इस बार भी यूनियनों और प्रबंधन के बीच समझौता जल्द होगा इसकी संभावना कम ही है। इस बार वेज रिवीजन को अंतिम रूप देने में सबसे बड़ा पेंच मिनिमम ग्यारंटीड बेनीफिट (एमजीबी) रहेगा। पूर्व में जितने भी वेतन समझौता हुए किसी में भी एनजेसीएस आयोग द्वारा निर्धारित एमजीबी से अधिक नहीं दिला पाई है। इस बार आयोग ने 16 प्रतिशत एमजीबी निर्धारित किया है। उसके बाद भी ज्यादातर यूनियनों ने 30 से 50 प्रतिशत तक एमजीबी की मांग को चार्टर ऑफ डिमांड में रखा है।

अलग-अलग डिमांड होने के कारण बैठक में विवाद होना तय

हर वेतन समझौते में अपनाया नया फार्मूला

तीन वेतन समझौते में सेल कर्मियों के वेतन को लेकर तीन अलग-अलग फार्मूले के आधार पर तय किए गए। वर्ष 1997 में कर्मियों को पुराने बेसिक का 10 प्रतिशत एमजीबी दिया गया था। वहीं 2007 के वेतन समझौते में बेसिक और महंगाई भत्ते को मिला कर 21 प्रतिशत एमजीबी तय हुआ था लेकिन यहां कर्मियों का पे स्केल क्लोज एंडेड कर दिया गया। वर्ष 2012 में बेसिक और ड ए का 17 प्रतिशत दिया गया लेकिन बाकी भत्ते 6% पर्क्स के अंदर समेट दिए गए। कर्मियों को लग रहा है कि इस बार भी प्रबंधन वेज रिवीजन तय किसी नए फार्मूले पर तय किया जाएगा। लिहाजा उनकी नजर उस फार्मूले पर टिकी है।

कभी नहीं मिला आयोग की सिफारिश से ज्यादा फायदा

वर्ष आयोग एनजेसीएस डिमांड

1997 5400 मिनिमम बेसिक 10% एमजीबी 23% एमजीबी

2007 30% एमजीबी व 46%पर्क्स 21% एमजीबी, पर्क्स नहीं 45% एमजीबी व पर्क्स नहीं

2012 ------------ 17% एमजीबी व 6% पर्क्स 30%एमजीबी व 46% पर्क्स

2017 16% एमजीबी व 35% पर्क्स ------------ 40% एमजीबी व 50% पर्क्स

फिर वेतन समझौता में देरी होने की आशंका

सेल में 5 केंद्रीय यूनियनों के प्रतिनिधि से मिलकर बनने वाली समिति नेशनल ज्वाइंट कमीशन फार स्टील (एनजेसीएस) कर्मचारियों का वेतन समझौता करती है। इस बार 5 यूनियनों के डिमांड ड्राफ्ट में दो यूनियन के द्वारा प्रस्तावित एमजीबी में ही 25% का अंतर है। एक यूनियन 45 प्रतिशत एमजीबी ओर 50 प्रतिशत पर्क्स मांग रही है। वही दूसरी यूनियन 20 % एमजीबी और 35 पर्क्स मांग रही है। सदस्य यूनियन की अलग-अलग मांग से भी वेतन समझौता में देरी होने की आशंका है। जो कर्मचारियों के लिए किसी नुकसान से कम नहीं होगा।

54 महीने तक लगा चुका वेज रिवीजन में

विभिन्न मुद्दों पर यूनियनों के बीच मतभेद के चलते वेज रिवीजन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया इतनी लंबी खींच जाती है कि उसका फायदा कर्मियों तक पहुंचते-पहुंचते नए वेज रिवीजन का समय आ जाता है। 5वें वेज रिवीजन को फाइनल होने में 54 महीने लगे थे। वहीं छठे वेज रिवीजन के लिए कर्मियों को 40 महीने इंतजार करना पड़ा था। अंतिम वेज रिवीजन को भी फाइनल होने में 31 महीने का समय लगा था। इसके चलते इस बार भी वेज रिवीजन को अंतिम रूप देने में लंबा समय लगना तय माना जा रहा है।

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