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पत्नी ने कहा- सास को वृद्धाश्रम भेजो, कोर्ट ने माना क्रूरता

शादी के कुछ साल से ही पति से अलग अपने मायके में रह रही महिला अपने पति पर मां से अलग रहने या उन्हें वृद्धाश्रम भेजने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 03:15 AM IST

शादी के कुछ साल से ही पति से अलग अपने मायके में रह रही महिला अपने पति पर मां से अलग रहने या उन्हें वृद्धाश्रम भेजने के लिए दबाव बनाती थी। आरोप है कि उसने अपनी सास से मारपीट भी की। समझाइश के बाद भी प|ी के व्यवहार में बदलाव नहीं आने और ससुराल में रहने से इनकार करने पर पति ने तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। इस पर हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की गई थी। हाईकोर्ट ने प|ी के व्यवहार को क्रूरता मानते हुए तलाक की अर्जी मंजूर कर ली है।

भिलाई में रहने वाले प्रवीर कुमार दास की शादी राजिम में रहने वाली युवती के साथ जनवरी 2002 में हुई थी। शादी के कुछ साल तक प|ी ससुराल में रही, इस बीच उनकी दो बेटियां हुई। पति का आरोप है कि शादी के बाद ही उसकी मां के साथ प|ी गलत व्यवहार करती थी। पति पर अलग रहने या अपनी मां को वृद्धाश्रम भेजने के लिए दबाव बनाती थी। इकलौता बेटा होने और 68 वर्षीय मां के हृदयरोगी होने की वजह से प्रवीर ने इससे इनकार कर दिया। इसके बाद वह अपनी बेटियों को लेकर मायके चली गई।



समझाइश देने के बाद भी नहीं लौटने पर पति ने रायपुर फैमिली कोर्ट के समक्ष हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13(1)(आई-ए) के तहत तलाक के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। फैमिली कोर्ट ने 5 सितंबर 2014 को इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद उसने अधिवक्ता सुनील ओटवानी के जरिए हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की। मामले पर जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस अरविंद सिंह चंदेल की बेंच में सुनवाई हुई। पति की तरफ से बताया गया कि शादी के बाद से ही उसकी मां के साथ प|ी का व्यवहार ठीक नहीं रहा है। प|ी उसकी मां को वृद्धाश्रम भेजने या उन्हें छोड़कर अलग रहने के लिए दबाव बनाती है। मना करने पर वह मायके में रहने लगी। वहीं, प|ी की तरफ से आरोपों को गलत बताते हुए पति व सास के व्यवहार पर ही सवाल उठाए गए। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि महिला पति के साथ नहीं रहना चाहती। साथ ही वह सास को वृद्धाश्रम भेजने के लिए भी कहती है। हाईकोर्ट ने प|ी द्वारा वृद्ध व बीमार मां को वृद्धाश्रम भेजने और अलग रहने के लिए दबाव बनाने को क्रूरता मानते हुए हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत तलाक की अर्जी मंजूर कर ली है।

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