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14 साल पहले निगम ने 752 बेटियों की कराई एफडी, क्लेम का वक्त आया तो दबा दी फाइल

सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर शासन-प्रशासन कितना गंभीर है, यह बुधवार को देखने को मिला। वर्ष 2004 में केंद्र...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:40 AM IST

सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर शासन-प्रशासन कितना गंभीर है, यह बुधवार को देखने को मिला। वर्ष 2004 में केंद्र सरकार द्वारा एक योजना शुरू की गई। इसका नाम रखा गया समृद्धि जमा योजना। इसका लाभ उन दंपत्तियों को दिया जाना तय किया गया, जिनकी दो लड़कियां हैं और जिन्होंने परिवार नियोजन करा लिया है। शासन ने बाकायदा एफडी कराया, वह भी 500 रुपए का, जो 10 सालों बाद उन बच्चियों या उनके परिजनों को 885 रुपए मिलते। जून 2014 से इस योजना के तहत राशि का मिलना शुरू होना था, लेकिन दुर्ग निगम में इसका कोई रिकार्ड ही नहीं है। इसके चलते पिछले करीब 4 सालों से हितग्राही निगम के चक्कर काट रहे हैं। खास बात यह है कि कहीं किसी प्रकार की जानकारी निगम के किसी अधिकारी, कर्मचारी या जनप्रतिनिधि को ही नहीं है। 752 लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे दंपत्तियों की संख्या और भी हो सकती है।

परिजन काट रहे चक्कर

वांबे आवास की बबली क्लेम लेने के लिए चक्कर काट रही है।

निगम के चक्कर काट रहे हितग्राही

पड़ताल में यह सामने आई है कि ऐसे 752 लोगों में अधिकांश अब निगम व बैंक के चक्कर काटकर थक चुके हैं। उन्हें अब उम्मीद भी नहीं है कि यह राशि उन्हें मिल पाएगी। जबकि बैंक के खाते में यह राशि अब भी जमा हैं। बैंक के अधिकारी ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि यह राशि खाते में है। इसका कहीं कोई ट्रांजक्शन या जानकारी निगम या अन्य किसी सरकारी एजेंसी द्वारा नहीं ली गई है। इसके चलते यह राशि जमा है। अब तक इस योजना की किसी ने भी सुध नहीं ली थी।

पार्षद ने की जांच, नहीं मिला कुछ

ऐसे ही एक हितग्राही ने पार्षद डी प्रकाश व लोककर्म प्रभारी दिनेश देवांगन को इसकी जानकारी दी। डी प्रकाश ने निगम के सारे दफ्तरों से जानकारी जुटाने का प्रयास किया, लेकिन कहीं किसी प्रकार की फाइल इस मामले को लेकर नहीं मिली। न ही ओरिजनल सर्टिफिकेट का पता चल सका। केवल इतनी जानकारी मिल पाई कि ऐसा कुछ हुआ था, उसकी सूची भी है। लेकिन मौके पर नहीं मिला।

2004 में निगम ने दिया था डुप्लीकेट सर्टिफिकेट

वांबे आवास की रजनी जगने आैर अंबिका जगने को 2004 में दुर्ग निगम ने डुप्लीकेट सर्टिफिकेट दिया था। जिसे लेकर उनके परिजन भटक रहे हैं।

ऐसे समझिए इस पूरे मामले को

समृद्धि जमा योजना के तहत योजना शुरू हुई। इसमें अगस्त 2004 को पहली बार तत्कालीन महापौर सरोज पांडेय द्वारा एक साधारण कार्यक्रम में करीब 40 महिलाओं को इसके सर्टिफिकेट बांटे। वह भी फोटो कॉपी। ओरिजनल अब तक नहीं दिया गया। यह कहां है? इसकी जानकारी किसी को नहीं है। इसके शुरू होने के क रीब 2 साल बाद तक लोगों के आवेदन लिए गए और इसी प्रकार के सर्टिफिकेट कराकर दिए गए। इसके तहत दुर्ग-राजनांदगांव ग्रामीण बैंक से अनुबंध भी किया गया। जहां राशि जमा कराई गई।

सिर्फ सर्टिफिकेट दिया है पैसा अब तक नहीं मिला...

इसमें कहा गया था कि बच्चियों के 18 साल होने पर एक निर्धारित राशि मिलेगी। हिंदी भवन में हुए कार्यक्रम में उन्हें यह सर्टिफिकेट दिया गया, लेकिन पैसा अब तक नहीं मिल पाया है। बबली जगने, वाम्बे आवास उरला

इस योजना का क्या हुआ किसी ने सुध तक नहीं ली...

यह एक अजीब विडंबना है। वर्ष 2004 में कोई योजना शुरू हुई, लोगों को जोड़ा गया। उसके बाद क्या हुआ, किसी को कुछ नहीं पता। इसका क्या हुआ किसी को पता नहीं। डी प्रकाश, पार्षद नगर निगम दुर्ग

आपकी जानकारी पर मैंने नोटिस जारी कर दिया है

आपके जानकारी देने के बाद पता लगाया। उस समय इस काम को केशव भारद्वाज नामक कर्मचारी देखा करते थे। उन्हें नोटिस दिया है। एसके सुंदरानी, आयुक्त नगर निगम दुर्ग

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