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जिला अस्पताल: कृत्रिम अंग निर्माण के लिए नहीं मिले 5 लाख, सेंटर बंद

पांच लाख सालाना बजट के अभाव में दिव्यांगों के काम आने वाले कई प्रकार के कृत्रिम अंगों का निर्माण करीब पांच साल से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:45 AM IST

पांच लाख सालाना बजट के अभाव में दिव्यांगों के काम आने वाले कई प्रकार के कृत्रिम अंगों का निर्माण करीब पांच साल से ठप पड़ा हुआ है। जिससे जरूरतमंदों को आवश्यक अंग और उपकरण महंगे कीमतों पर खरीदना पड़ रहा है। कुछ साल पहले तक यहां कटे हाथ-पैर के अलावा कई बीमारियों में काम आने वाले जरुरी उपकरण का निर्माण यहां होता था।

जिला अस्पताल के कक्ष संख्या 88 में जिला नि:शक्त पुनर्वास केन्द्र की स्थापना की गई है। करीब पांच साल पहले यहां से सैकड़ों पीड़ित खुशियां लेकर लौटते थे। मगर सरकार द्वारा बजट न दिए जाने से यहां की हालत बेहद खराब हो चुकी है। अब यहां पर तैनात कर्मचारी केवल विकलांग प्रमाण पत्र बनाने के लिए काम करते हैं।

पांच साल से बंद पड़ा है सेंटर, कर्मी बना रहे सिर्फ प्रमाण पत्र।

अस्पताल में इन उपकरणों का किया जाता था निर्माण

पुनर्वास केंद्र पर कटे हाथ, पैरों का कृत्रिम तरीके से निर्माण होता था। पोलियो ग्रस्त मरीजों के शरीर के सपोर्ट के लिए कैलिपर्स, कमर दर्द में काम आने वाला एलेज बेल्ट, रीढ़ की हड्डी में दिक्कत होने पर लगने वाला ट्रेलर बेल्ट का निर्माण किया जाता था।

बजट मिलने पर इसे दोबारा शुरू किया जा सकता है

अब तक बजट न मिलने से केंद्र पर कृत्रिम अंग का निर्माण नहीं हो पा रहा है। बजट मिलने पर इसे दुबारा शुरू किया जा सकता है। राशि की डिमांड की गई है। डॉ. विपिन जैन, नोडल प्रभारी नि:शक्त पुनर्वास केंद्र

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