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20 लाख से ज्यादा के कामों के लिए करना था टेंडर, लेकिन लॉटरी सिस्टम से बंाटा वर्कऑर्डर

कामधेनु यूनिवर्सिटी में सामने आए टेंडर घोटाले में एक और नया खुलासा हुआ है। टेंडर प्रपत्रों की जांच के लिए जो...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:55 AM IST
कामधेनु यूनिवर्सिटी में सामने आए टेंडर घोटाले में एक और नया खुलासा हुआ है। टेंडर प्रपत्रों की जांच के लिए जो छानबीन समिति बनी, उसने भी प्रपत्रों की जांच में अनियमितता बरती। पात्र टेंडर डालने वाली एजेंसियों के भी प्रपत्र गायब कर उन्हें अपात्र कर दिया गया। इतना ही नहीं जिन 6 बड़े कामों का टेंडर जारी हुआ, उसके लिए पहले से ही ठेका एजेंसी तय कर दी। इसके अलावा कुछ एजेंसियों के आवेदन को रिजेक्ट कर दिया।

ठेका के लिए पंजीकृत डाक व स्पीड पोस्ट से टेंडर प्रपत्र जमा लिए गए। इसके बाद किसे कौन सा काम मिलेगा? यह लॉटरी के माध्यम से तय किया गया। इसके लिए बकायदा एक ड्रॉप बाक्स बनाया गया। समिति के सदस्यों के बीच आए टेंडर प्रपत्र को परीक्षण के बाद ड्रॉप बॉक्स में डाला गया और एक-एक कर किस ठेकेदार को कौन सा काम दिया जाए, यह तय कर लिया गया। इसके लिए न तो ऑनलाइन प्रोसेस पूरा किया गया और न ही जानकारी सार्वजनिक की गई। क्रय समिति बनाकर इसे अंजाम दिया गया है।

टेंडर रद्द किया, यह किसी को बताया नहीं

इससे पहले अपरिहार्य कारणों से निविदा तिथि को भी निरस्त किया गया। यह काम करीब 28 करोड़ 62 लाख 18 हजार रुपए के थे। इतना ही नहीं 4 नवंबर 2016 से पहले तक टेंडर की सारी प्रक्रियाएं कामधेनु की वेबसाइट पर अपलोड हुईं, लेकिन इसके बाद हुए इन टेंडरों की जानकारी तक अपलोड नहीं की गई।

आखिर सिस्टम में होना क्या था, यह भी जानिए...

नियमतः टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन होनी थी। तब ई-टेंडर 10 लाख से अधिक के कामों के लिए जारी होना था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ई-टेंडर के लिए बाकायदा पोर्टल बनाया जाना था। यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर अपलोड करना था।

जानिए वो काम, जिसके लिए विवि ने निकाली लॉटरी और दिया ठेका

कामधेनु यूनिवर्सिटी में 28 करोड़ 62 लाख 18 हजार रुपए के 6 बड़े काम थे। इन्हें कराए जाने के लिए मनमाने ढंग से टेंडर की पूरी प्रक्रिया तय की गई। ई-टेंडर के बजाय मैनुअल हुआ, ऐसे वो छह काम, जािनए...

760.42

लाख रुपए से श्रीजी कृपा प्रोजेक्ट को प्रशासनिक भवन

सरकार को लगा दिया पांच करोड़ रुपए का चूना

इस पूरे मामले में लोकायुक्त जांच जारी है। इसमें जो शिकायत की गई है, उसमें कहा गया है कि करीब 5 करोड़ रुपए का सीधा नुकसान सरकार को पहुंचाया गया है। ठेकेदारों ने वर्ष 2015 के एसओआर के हिसाब से काम लिया। इसमें कार्य 2.01 प्रतिशत से लेकर 4.51 प्रतिशत तक बिलो में काम लिया। टेंडर 13 फरवरी 2017, 17 फरवरी 20178 व 10 मार्च 2017 को जारी हुए। अगस्त 2016 तक यूनिवर्सिटी में 18 से 21 प्रतिशत तक बिलो में कर रहे हैं।

272.13

लाख से सिंघल एसोसिएट्स को क्लीनिकल कॉम्प्लेक्स।

609.88

लाख रुपए से गौरी कंस्ट्रक्शन को एक्सटेंशन कॉलेज बिल्डिंग।

टेंडर में हुई धांधली को आप तारीखवार समझें...










अब नए ठेके के लिए नहीं कर रहे मैनुअल टेंडर...


875.25

लाख रुपए से वर्षा कंस्ट्रक्शन को रिसर्च बिल्डिंग निर्माण।

207.47

लाख रुपए से बनेगा मनोज अग्रवाल को वीसी बंगला।

137.03

लाख से केके कंस्ट्रक्शन को स्टॉफ रेसीडेंशियल।