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डेंगू से भिलाई में 24 घंटे में दो और मौतें, सीएमएचओ की छुट्‌टी

डॉ. गंभीर ठाकुर को दी गई जिम्मेदारी, 12 दिन में अब तक 12 लोगों की मौत

Bhaskar News | Last Modified - Aug 12, 2018, 12:16 AM IST

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    ये है 19 अस्पतालों में मुफ्त इलाज करने का आदेश।-फाइल

    भिलाई/ रायपुर.भिलाई में डेंगू का कहर बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटे में डेंगू से 2 लोगों की मौत हो गई है। इसमें एक 5 साल का मासूम है। शनिवार को कैंप-2 संतोषीपारा के 5 वर्षीय रूद्रप्रताप पिता जयप्रकाश यादव की मौत हुई।

    परिजन ने बताया- दो दिन पहले ही रूद्रप्रताप को बुखार आया था। इसके बाद उसे अस्पताल ले गए। शनिवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। वहीं, शुक्रवार को डेंगू वायरस से कांकेर के रहने वाले 64 वर्षीय रामेश्वर दास ने भिलाई में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वे अपने रिश्तेदार के यहां भिलाई आए थे, तभी उन्हें डेंगू हुआ। पिछले 12 दिन में यह 12वीं मौत है। अब तक जिनकी मौत हुई है, उनमें 8 मासूम है। डेंगू से लगातार हो रही मौतों के बीच प्रदेश सरकार ने दुर्ग सीएमएचओ डॉ. सुभाष पांडेय को हटा दिया है। डॉ. पांडेय के स्थान पर विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर को सीएमएचओ नियुक्त किया है।

    मौत का सिलसिला नहीं थमा तो कार्रवाई होगी:डॉ. पांडेय को सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में संभागीय संयुक्त संचालक में प्रभारी बनाया है। बता दें कि, सीएमएचओ डॉ. पांडेय की कार्यप्रणाली से सरकार ने जिला प्रशासन के सीनियर अधिकारी नाराज चल रहे थे। शुक्रवार को ही चीफ सेक्रेटरी अजय सिंह ने कहा था- अगर मौत का सिलसिला नहीं थमा तो कार्रवाई जरूर होगी। मौत की खबर मिलते ही सरकार ने सीएमएचओ को दुर्ग से हटा दिया। स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को एम्स व अंबेडकर अस्पताल से डॉक्टरों की टीम मौके पर भेजी हैं। अंबेडकर के आईसीयू में 5 बेड डेंगू के मरीजों के लिए आरक्षित हैं।

    दुर्ग भिलाई में अभी तक 209 डेंगू पॉजीटिव:दुर्ग-भिलाई में अभी तक 209 लोगों को डेंगू पॉजीटिव की पुष्टि हो चुकी है। वहीं 171 सैंपल की रिपोर्ट आना बाकी है। विभिन्न अस्पतालों में 321 लोगों का इलाज किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों को फ्री इलाज करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अस्पताल इसका पालन नहीं कर रहे। हेल्थ कमिश्नर आर प्रसन्ना ने बताया किट व दवा की कोई कमी नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में 5 मोबाइल दवा वैन उपलब्ध है।

    मुफ्त इलाज वाले 19 अस्पतालों की सूची जारी, फिर कलेक्टर बोले- छह में ही होगा; अब मंत्री कह रहे-स्वास्थ्य मंत्री जानें:निजी अस्पतालों में डेंगू के मुफ्त इलाज को लेकर 8 अगस्त को प्रदेश के राजस्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय ने मौखिक तौर पर और 9 अगस्त को पूर्व सीएमएचओ डॉ. सुभाष पांडेय ने लिखित आदेश दिया। इस आदेश में 19 अस्पतालों की लिस्ट है। इस आदेश की जानकारी मिलने के बाद कई परिजन मरीज को लेकर लिस्ट में दिए गए नजदीकी निजी अस्पतालों में पहुंचे। लेकिन वहां डॉक्टरों ने मुफ्त इलाज से मना कर दिया। सुपेला में इसी को लेकर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा जमकर बवाल किया गया। लेकिन शनिवार को शासन ने अपने ही आदेश को गलत साबित कर दिया। डेंगू पीड़ितों के इस अस्पताल से उस अस्पताल भटकने के बाद कलेक्टर उमेश अग्रवाल सामने आए और मीडिया को बताया कि अभी जिले के 6 निजी अस्पतालों में ही मुफ्त इलाज होगा।

    इन अस्पतालों में मुफ्त इलाज:बीएम शाह हास्पिटल (साक्षरता चौक, भिलाई), एसआर हास्पिटल (पावर हाउस, भिलाई), चंदूलाल हाॅस्पिटल (नेहरू नगर, भिलाई), सूरज नर्सिंग होम (कोहका, भिलाई), गिंदौड़ी देवी ट्रस्ट हाॅस्पिटल (खुर्सीपार), स्पर्श हास्पिटल (केवल10 बेड, सुपेला)।

    कलेक्टर बोल रहे हैं तो सही होगा:कलेक्टर बोल रहे होंगे तो सही होगा। क्रियान्वयन कलेक्टर को करना है। वो ही जाने। जिन अस्पतालों को मानवता के नाते फ्री इलाज करना है वो करें। जो मुझे करना था, वो मैंने कर दिया। अब स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव जाने।’’- प्रेमप्रकाश पांडेय, राजस्व मंत्री

    सूची देखकर गए पर इनका नहीं हुआ मुफ्त इलाज

    टिलेश्वर: 7 वर्षीय बच्चे टिलेश्वर को बापूनगर पीएचसी से जिला अस्पताल के लिए रेफर किया था। वहां भर्ती नहीं हो सका तो मां बीएम शाह अस्पताल पहुंची। मुफ्त में भर्ती कर इलाज करने की विनती की तो डॉक्टर ने बताया कि हमारे पास कलेक्टर का कोई लिखित आदेश नहीं है।

    रुखसाना: लड़की को 3 दिन से बुखार था। एसआर हॉस्पिटल पहुंचीं। डॉक्टर को दिखाकर मुफ्त इलाज की बात की तो डॉक्टर ने कहा- हम मुफ्त इलाज कर रहे हैं, लेकिन हमारे बेड भर गए हैं।

    ...और इधर, रुबेला के टीके पर छत्तीसगढ़ में रोक, क्योंकि 14 हजार कर्मचारी हड़ताल पर :छत्तीसगढ़ में 6 अगस्त से मीजल्स और रूबेला टीकाकरण शुरू होना था। राज्य में लगभग 84 लाख बच्चों को टीका लगाना है। वैक्सीन भंडार से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों आैर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भेजा जा चुका है। लेकिन लगभग 14 हजार एनएमएम आैर एमपीडब्लू के हड़ताल पर चले जाने से टीकाकरण का काम रोक दिया गया है। जबकि 16 राज्यों में सफलतापूर्वक लगाए जा चुके हैं। राज्य टीकाकरण अधिकारी अमर सिंह ठाकुर का कहना है कि जब स्वास्थ्य संयोजको की हड़ताल समाप्त होगी उसके बाद से इसे शुरु किया जा सकेगा। हड़ताल कब खत्म होगी यह अभी तक तय नहीं है। बताया गया है कि अभी तक सिर्फ मीजल्स यानी खसरे का टीका लगाया जाता था। रूबेला और मीजल्स के टीके को मिलाकर नया टीका तैयार किया गया है। बच्चों को यह टीका लगाने पर उसकी अगली पीढ़ी भी इस बीमारी से सुरक्षित हो जाएगी।

    करोड़ों खर्च पर अटका प्रोजेक्ट: केंद्र सरकार के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों को इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन प्रदेश में अचानक 14 हजार शहरी एवं ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों के हड़ताल पर जाने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इनके जिम्मे ही पूरा टीकाकरण कार्यक्रम है। 9 माह से 15 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को मीजल्स-रूबेला का टीका लगाना जरूरी है। अभियान में उन बच्चों को भी टीका लगाया जायेगा जिन्हें पहले से खसरा-रूबेला का टीका लगाये गये हों या कभी उनको खसरा-रूबेला संक्रमण या रोग भी हुआ हो।
    पहले चरण में स्कूलों आैर फिर गांवों में लगाया जाना था टीका: यह टीका लगभग एक से डेढ़ महीने में पूरा किया जाना था। पहले चरण में प्रदेश के स्कूलों आैर दूसरे चरण में गांवों में इसका अभियान चलाया जाना था। इस दौरान 15 साल तक की उम्र के सभी बच्चों को लगाया जाना था। लेकिन अभियान पर अनिश्चितकालीन रोक लगाए जाने से विभाग के लोगों की चिंता भी बढ़ गई है।
    15 सौ का एल वायल:चिकित्सकों के मुताबिक इस टीके का एक वायल 15 सौ रुपए का आता है। एक वायल से दस बच्चों को टीका लगाया जा सकता है। इस लिहाज से प्रदेश के 84 बच्चों को टीका लगाने में करोड़ों रुपए खर्च होंगे। हालांकि केन्द्र सरकार की इस योजना में डब्ल्यएचआे आैर अन्य संस्थाआें की भी भागादारी है।
    क्या है मीजल्स-रुबेला: मीजल्स जिसे आम बोलचाल की भाषा में खसरा (माता) कहा जाता है। लोग माता समझकर इसका इलाज कराना उचित नहीं समझते, जिससे कई बच्चे गंभीर बीमारी का शिकार हो जाते हैं। वहीं रूबेला को हल्का खसरा (माता) के रूप में जाना जाता है। इसका कई बार पता ही नहीं लग पाता है। यह गर्भवती माताओं को वायरस के संपर्क में आने से होता है, जिसमें प्रसव के बाद बच्चे को दिमागी कमजोरी, हार्ट में छेद, देखने में तकलीफ जैसी परेशानियां हो जाती हैं। मीजल्स, रूबेला बीमारियों से हर साल दुनियाभर में 1.40 लाख बच्चों की मौत होती है। भारत में हर साल 50 हजार से ज्यादा बच्चों की इसकी मौत होती है।

    हड़ताल खत्म होने के एक सप्ताह बाद शुरु होगा अभियान: टीकाकरण का काम हड़ताल के कारण शुरु नहीं हो पाया है। एएनएम आैर एमपीडब्ल्यू के हड़ताल पर चले जाने से टीकाकरण अभियान रोका गया है। हड़ताल शुरु होने के एक सप्ताह बाद इसे शुरु किया जाएगा। - अमर सिंह ठाकुर, राज्य टीकाकरण अधिकारी

    अधिकारियों से और ध्यान देने के लिए कहा :लोगों से अपील है कि वे एहतियात बरतें, जागरुक रहें। अधिकारियों से और ध्यान देने के लिए कहा गया है। अस्पतालों में इलाज के पुख्ता इंतजाम हैं।’’ - डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री

    आरोप निराधार हैं: मरीज अगर भर्ती होने लायक है, तो भर्ती कर रहे हैं। कोई मरीज आरोप लगाता है कि भर्ती नहीं किया तो निराधार है।’’ -डॉ. विकास अग्रवाल, डायरेक्टर, बीएम शाह अस्पताल

    कोई मरीज नहीं आया:हमारे यहां रुकसाना नाम का कोई मरीज नहीं आया। हम डेंगू के मरीजों को मुफ्त इलाज कर रहे हैं। आज भी मेरे यहां 8 मरीज भर्ती हैं।’’ -डॉ. शीतल यादव,
    निदेशक, एसआर अस्पताल

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    अस्पताल में भर्ती टिलेश्वर।
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    रुकसाना को डॉक्टर ने कहा- हमारे यहां बेड भर गए हैं।
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