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भिलाई में डेंगू से 13 दिन में 13वीं मौत; 4 दिन से बुखार में तप रही वॉलीबॉल प्लेयर पूजा ने दम तोड़ा, परिजन बोले- डेंगू था

मुफ्त होगा डेंगू का इलाज, स्मार्ट कार्ड नहीं है तो संजीवनी कोष से

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2018, 01:17 AM IST
एक ऐसी मां, जिसके 13 साल के बेटे न एक ऐसी मां, जिसके 13 साल के बेटे न

भिलाई/रायपुर. भिलाई में रविवार को डेंगू से एक और बच्चे की मौत हो गई। वार्ड 20 कैंप-1 के 13 वर्षीय मुकेश पिता रघुवीर ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। शहर में डेंगू से 13 दिन में यह 13वीं मौत है। साथ ही वॉलीबॉल प्लेयर 14 वर्षीय पूजा सोना की भी मौत हो गई। उसे 4 दिन से बुखार था।

इस साल अब तक 314 केस: स्वास्थ्य विभाग ने जानकारी दी है कि इस साल 1 जनवरी से 10 अगस्त के बीच प्रदेश में डेंगू के 314 मामलों का पता चला। इसमें रायपुर 10, दुर्ग 282, राजनांदगांव 3, बिलासपुर 9, महासमुंद-सूरजपुर-बेमेतरा में 2-2, रायगढ़-कवर्धा-कोरिया-बालोद में 1-1 मरीज मिले हैं।

इलाज में दिक्कत तो 104 पर शिकायत करें: प्रदेश में डेंगू का नि:शुल्क इलाज करने से कोई भी अस्पताल मना करे तो 104 नंबर डायल कर शिकायत करें।

ये होता है संजीवनी कोष: इस कोष के तहत हार्ट, किडनी, हेड इंज्युरी समेत 30 बीमारियों का इलाज होता है। इसके लिए मुंबई के लीलावती अस्पताल सहित प्रदेश के 21 सरकारी व निजी अस्पतालों के साथ एमओयू किया गया है। गरीबी रेखा से ऊपर के जरूरतमंदों को कोष के लिए सीएम से स्वीकृति लेनी होती है। सरकारी अस्पतालों में संजीवनी कोष से इलाज सुविधा मौजूद है। निजी अस्पतालों में अधिक खर्च होने पर मरीजों और उनके परिजन को अलग से कुछ पैसे देने पड़ते हैं। विशेष परिस्थितियों में सरकार नियम शिथिल कर बदलाव भी कर सकती है।

रोकथाम के लिए बनाई गई 35 टीम: स्वास्थ्य आयुक्त आर प्रसन्ना ने बताया कि डेंगू प्रभावित क्षेत्र में जन जागरूकता अभियान शुरू कर दिया गया है। 35 छात्रों की टीम वार्ड-मोहल्लों में जाकर डेंगू मच्छरों की रोकथाम व बचाव की जानकारी दे रही है। 4 हजार से अधिक कूलर व पानी की टंकियां देखी गईं, 1865 को खाली कराया गया। घरों में टीम ने 1865 टेमीफाॅस लार्वा नष्ट किए। टीम दुर्ग में 36 हजार घरों का दौरा कर चुकी है।

पति घर-घर जाकर जूता सिलते हैं... दो बेटे आईटीआई में, एक पाॅलिटेक्निक में... हम कैंप-1 के वार्ड-20 रहते हैं। मेरे पति जूता कारीगर हैं। दुकान नहीं है इसलिए घर-घर जाकर काम करते हैं। फिर भी हमने बच्चों को पढ़ाया ताकि वो बेहतर जिंदगी जी सकें। मेरे तीनों बड़े बटों में से दो अनिल और सुनील आईटीआई में, विनोद पाॅलिटेक्निक में पढ़ रहा है। इनमें से एक अभी पति साथ ही बीएम शाह अस्पताल में और दो प्रज्ञा अस्पताल में भर्ती हैं। सबसे छोटे बेटे मुकेश को मुकेश 3 दिन पहले ही बुखार आया था। वो पास के ही सरकारी स्कूल में कक्षा 8 में पढ़ता था। पता है... उसकी गिनती वहां के होशियार बच्चों में होती थी। पति बीएम शाह अस्पताल में मुकेश को भर्ती कराकर घर लौटे ही थे कि वो खुद और 4 बेटों में से सबसे बड़ा बेटा सुनील भी डेंगू की चपेट में आ गए। अब इनका बीएम शाह अस्पताल में ही इलाज चल रहा है। परिवार में हम कुल 6 सदस्य हैं। बेटे अनिल और विनोद स्वस्थ थे। लेकिन अब उन्हें भी तेज बुखार आ गया है। मुझे भी बुखार है पर मैं भर्ती नहीं होना चाहती। क्या करूं... कुछ समझ नहीं आ रहा। मैं भी अगर भर्ती हो गई पति और बच्चों का ध्यान कौन रखेगा। उनकी सेहत बिगड़ती जा रही है... मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा...। मुकेश की हालत सुधरने की बजाय बिगड़ती चली गई। उसे तो... तीन दिन में 20 यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाए थे। लेकिन डॉक्टर बता रहे हैं उसकी प्लेटलेट्स की संख्या 15 हजार से ऊपर पहुंच ही नहीं पाई। बुखार आने के केवल 60 से 65 घंटे के भीतर सुबह ही उसने दम तोड़ दिया। जाकर हमारे घर के आसपास की स्थिति देखिए... घर के ठीक पीछे सुलभ शौचालय का टैंक वर्षों से धंसा हुआ पड़ा है। घर के सामने की नालियों की हालत देखिए। पड़ोसियों ने तक कई बार शिकायत की लेकिन छिड़काव करना तो दूर की बात... कोई झांकने तक नहीं आया। अब मौतें हो रही हैं तो सभी उपायों के प्रयास किए जा रहे हैं। उनसे अच्छे तो शङर के लोग हैं... जिसे प्लेटलेट्स की कमी की सूचना मिलती है वो खून देने ब्लड बैंक पहुंच जाता है। -जैसा बिम्मा ने भास्कर को बताया।

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