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कैसे दूर होगा कुपोषण : बांट रहे घटिया पोषण आहार, सैंपल जांच में फेल

मुंबई लैब की टेस्ट रिपोर्ट में खुलासा : पोषण आहार में प्रोटीन कम, इसलिए बच्चे व महिलाएं भी इसे खाने से हिचकते हैं

dainikbhaskar.com | Last Modified - Aug 07, 2018, 10:07 AM IST

कैसे दूर होगा कुपोषण :  बांट रहे घटिया पोषण आहार, सैंपल जांच में फेल

बालोद।जिले में कुपोषण दूर करने के लिए चल रही योजनाओं में गड़बड़ी रुकने का नाम नहीं ले रही। अब रेडी टू ईट पोषण आहार योजना में गड़बड़ी सामने आई है। स्व सहायता समूह द्वारा बनाए गए पोषण आहार की जांच हुई तो प्रोटीन की कमी उजागर हुई।

- जिले में कुल 56 समूह काम कर रहे हैं। जो 1483 आंगनबाड़ी के 58 हजार से ज्यादा बच्चों व उनके मां के लिए रेडी टू ईट की सप्लाई करती है। पर इसे बनाने में निर्धारित मापदंड पालन नहीं कर रहे। मुंबई से आई जांच रिपोर्ट में 10 समूहों के सेंपल में प्रोटीन की कमी पाई गई है।

- जो साबित करती है कि जिले में घटिया रेडी टू ईट बांटे जा रहे हैं। जिसे खाने से बच्चे व महिलाएं तक हिचकते हैं। जिन 10 समूहों के सेंपल में कमी पाई गई है, उन पर अफसर कार्रवाई की बजाय एक और मौका देने की तैयारी कर रहा है। नियम से प्रति 100 ग्राम रेडी टू ईट में 12.12 ग्राम प्रोटीन रहना चाहिए।

नियम तो हर महीने में जांच का, पर करते नहीं
- जिले में जो भी समूह रेडी टू ईट की सप्लाई कर रही है, उनका आहार सही है या नहीं? इसकी जांच नियम से हर महीने में होनी है। लेकिन अफसर जानबूझकर नहीं करते। बीच बीच में दिखावे के लिए जांच होती है और जब गड़बड़ी सामने आती है तो कार्रवाई के नाम से भी औपचारिकता पूरी की जाती है। जिससे जिले में कुपोषण दूर नहीं हो पा रहा है।

यहां के समूहों में पाई गई गड़बड़ी: बालोद परियोजना में सांकरा ज, डौंडीलौहरा परियोजना चिल्हाटी सेक्टर में देवरी , गुंडरदेही में एक समूह, देवरी परियोजना में गिधवा, डौंडी में लखमाटोला, चिखलाकसा में एक समूह व अन्य चार समूह।


ये है नियम, इस तरह से होती है जांच
- रेडी टू ईट में प्रोटीन की जांच के लिए पर्यवेक्षक समूहों में जाकर सेंपल लेते हैं। फिर इस सेंपल को जिला कार्यालय में एकत्रित कर मुंबई लैब भेजा जाता है। वहां से नियम से 15 दिन में जांच रिपोर्ट मिलना चाहिए। पर अधिकतम 20 से 25 दिन में रिपोर्ट मिलती है। जिस समूह के सेंपल में प्रोटीन की कमी मिलती है, उन्हें हटाकर दूसरे समूह को काम देना होता है।

इन समूहों को बर्खास्त किया गया था:बालोद परियोजना में जुंगेरा, गुंडरदेही के भाठागांव बी, बरबसपुर, टिकरी, कोटगांव, भोथीपार, गुरूर में बोरतरा, बागतराई, डौंडीलौहरा में कमकापार, रेंगाडबरी, डौंडीलौहरा, देवरी परियोजना में देवरी, चिखलाकसा के दो समूह, गुजरा, दल्ली में भी दो समूह पर कार्रवाई हुई थी।


पहले नोटिस देंगे नहीं सुधरी गुणवत्ता तो करेंगे कार्रवाई
- जिला महिला बाल विकास अधिकारी सीएस मिश्रा ने कहा हर महीने रेडी टू ईट का सैंपल मुंबई भेजा जाता है। जिस सेंपल में प्रोटीन व कैलोरी की कमी पाई जाती है, उनके समूहों पर कार्रवाई होती है। फिलहाल जिनमें कमियां हैं, उन्हें एक बार नोटिस दिया जाएगा। इसके बाद सेंपल जांच में भी फेल हुए तो समूह को हटाने कार्रवाई होगी। निगरानी सभी पर्यवेक्षक करते हैं।

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