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किसान की तरह कर्म करते हुए विश्वास का भाव रखें, जीवन में सफल जरूर होंगे

धर्म सर्वोत्कृष्ट मंगल है। अहिंसा, संयम और तप युक्त धर्म ही मंगलकारी होगा। नमस्कार महामंत्र को पंचपरमेष्ठी मंत्र...

Dainik Bhaskar

Aug 07, 2018, 02:11 AM IST
किसान की तरह कर्म करते हुए विश्वास का भाव रखें, जीवन में सफल जरूर होंगे
धर्म सर्वोत्कृष्ट मंगल है। अहिंसा, संयम और तप युक्त धर्म ही मंगलकारी होगा। नमस्कार महामंत्र को पंचपरमेष्ठी मंत्र कहा गया है। नमस्कार से मंगल होता है। नमस्कार कभी विनय और नम्रता के बिना नहीं होता है। विनय समस्त सद्गुणों का मूलाधार है। नम्रता सभी सद्गुणों की जननी है। सांसारिक जगत में पद की अपेक्षा रखने वाले जीव यदि पंच परमेष्ठी में पद प्राप्त करने की भावना रखे और पुरुषार्थ करे तो उसे सिद्ध पद का मार्ग प्राप्त होगा। यह विचार पार्श्व तीर्थ नगपुरा में चातुर्मास आराधकों की व्याख्यानमाला में साध्वी लक्ष्ययशा मसा ने रखे।

प्रवचन श्रृंखला में लब्धियशा मसा ने कहा कि कर्म सत्ता की अदालत में न तो गवाही की जरूरत होती है और न सबूत की। भौतिक जगत में लिप्त जीव मान-मर्यादा, यश कीर्ति, पद प्रतिष्ठा के लिए संघर्ष करता है। वहीं परमात्मा के प्रति प्रीति रखने वाले जीव सांसारिक मान-सम्मान, पद प्रतिष्ठा का विसर्जन कर परमात्म चरण में मन और बुद्धि को समर्पित करता है। परमात्मा के चरण में समर्पण का भाव रखने वाले जीव को यश कीर्ति, लक्ष्मी स्वतः प्राप्त हो जाती है। नमस्कार की आधारशिला हैं श्रद्धा।श्रद्धा किसान की तरह होनी चाहिए। किसान जब खेत को जोतकर उसमें बीज बोता हैं। तब उसे पता नहीं होता है कि उनमें से कितने बीज अंकुरित होंगे। बारिश होगी या नहीं। बीज सड़ भी सकते हैं। जल भी सकते हैं। इतनी संभावनाओं के बीच भी किसान हताशा हुए बिना बीज बोता है। बस एक ही श्रद्धा के साथ कि मेरा खेत फसल से भर जाएगा। कुछ दिनों बाद खेत में फसल लहलहाने लगेगी। यह श्रद्धा ही किसान का हौसला बनाए रखती है। आम तौर पर लोग श्रद्धावान को कमजोर सम-हजय लेते हैं। लेकिन यह बात बिल्कुल गलत है, क्योंकि श्रद्धा यानी अनजान में उतरने का साहस। यह साहस श्रद्धा से ही जागता है।

दादाबाड़ी दुर्ग में प्रवचन सुनने रोजाना भक्त पहुंच रहे

सोमवार के प्रवचन में साध्वी मणिप्रभा मसा ने मन की चंचलता पर नियंत्रण की सीख दी।

साध्ना में होती है विश्व कल्याण की बड़ी शक्ति: चंद्रप्रभा

भास्कर न्यूज|जामगांव आर

भखारा चातुर्मास में सोमवार को दादी गुरुवर्या कान कवर मसा की स्मृति दिवस पर जैन साध्वी डॉ. चंद्रप्रभा श्रीजी ने कहा कि साधना में अद्भुत शक्ति होती है। साधना की शक्ति से जग का भला करने वाले महापुरुषों की लंबी लाइन भारत भूमि में है। इनमें एक नाम आध्यत्म योगिनी कानकंवर मसा का है।

डॉ. चंद्रप्रभा प्रत्यक्षदर्शी घटना बताते हुए कहा कि 28 साल पहले दादी गुरुवरिया के साथ विहार किए। पहाड़ी इलाके से निकल रहे थे, एक शेर नदी में पानी पीते दिखे, हम कम उम्र की साध्वियां घबराईं, लेकिन दादी गुरुवर्या ने हमें आगे बढ़ते रहने को कहा। देखते ही देखते शेर पालतू कुत्ते की तरह आगे बढ़ गए। तब हम लोगों ने साधना का चमत्कारिक स्वरूप अपनी आंखों से देखा।

भखारा में सोमवार को दादी गुरुवर्या कान कंवर का स्मृति दिवस मनाया गया।

कर्मों का भार समाप्त होने पर ही मनुष्य बनता है भगवान

साध्वी श्रीजी ने कहा कि इंसान, शैतान और भगवान बनने में कर्मों के ही खेल है। विवेक जागृत कर जो संभल गया वह इंसान, जो नही संभल पाया वह शैतान और जो कर्मों के भार को समाप्त कर लेता है वह भगवान बन जाता है।

सत्संग सिर्फ सुनने के लिए नहीं, जीवन में उतारें:मणिप्रभा

दादाबाड़ी दुर्ग के चातुर्मास प्रवचन में साध्वी मणिप्रभा मसा ने कहा कि सत्संग सिर्फ सुनने के लिए नहीं है, उसे जीवन में उतारने से ही सार्थकता होगी। मनुष्य मन की इजाजत के बिना कोई कार्य नहीं करता। इसलिए मन को साधे बिना कुछ भी संभव नहीं हैं। तन, मन और वचन के योग में किसी एक योग की अस्वीकृति भी हो तो धार्मिक क्रियाएं नहीं छोड़ना चाहिए। जीवन में इसी भाव से आगे बढ़ें।

मर्यादा में रहकर जीवन जीएं हमेंशा दूसरों के सुख की सोचें

डॉ. चंद्रप्रभा ने कहा कि सबसे सुंदर जीवन समाज में उनका होता है जो मर्यादामय जीवन जीने का सतत प्रयास करते है,औरों की भावनाओं का ध्यान रखते है। हमेशा दूसरों को सुख पहुंचाने का भाव रखकर कर्म करें।

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