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चना दाल के आटे से बनाए पकवान, धनेश्वरी जीतीं

छत्तीसगढ़ हल्बा आदिवासी समाज इकाई दुर्ग-भिलाई ने हरिहर सावन मिलन समारोह का आयोजन रविवार को शक्ति भवन में किया। इस...

Dainik Bhaskar

Aug 07, 2018, 02:15 AM IST
चना दाल के आटे से बनाए पकवान, धनेश्वरी जीतीं
छत्तीसगढ़ हल्बा आदिवासी समाज इकाई दुर्ग-भिलाई ने हरिहर सावन मिलन समारोह का आयोजन रविवार को शक्ति भवन में किया। इस अवसर पर महिलाओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं रखी गई। पाक कला प्रतियोगिता में समाज की महिलाओं ने चना दाल के आटे से विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए। धनेश्वरी भेड़िया प्रथम, अल्पना पौषार्य का दूसरा और चंद्रिका रावटे को तीसरा स्थान मिला।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला प्रभार की अध्यक्ष केसर पिस्ता ने स्वागत भाषण से की। उन्होंने कहा कि हल्बा समाज में शिक्षा को बढ़ावा देना बेहत जरूरी है। समाज में व्याप्त बुराइयों का भी त्याग करना भी जरूरी है। शराब सहित अन्य प्रकार के नशे से समाज की छवि धुमिल हाेती है। साथ ही हम समय के साथ-साथ आगे नहीं बढ़ पा रहे। नशापान और कुरीतियों को त्याग कर ही समाज आगे बढ़ सकता है। इसके लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्य महिला आयोग अध्यक्ष हर्षिता पांडे ने महिलाओं से कहा कि जिस तरह से आने वाले समय में तीज, त्योहार की शुरुआत होने जा रही, उसी तरह हम अपने परंपराओं को उत्सव के रूप में मनाकर आगे बढ़ाएं। छत्तीसगढ़ में तीज का पर्व हर महिला के लिए मायने रखता है। उन्होंने हल्बा समाज से बेटा और बेटी में अंतर न करने की सीख दी। उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में माता-पिता का मान बढ़ा रहीं। उनके विशेष ख्याल रखें।

सावन मिलन

शक्ति भवन में जुटी छत्तीसगढ़ हल्बा समाज की महिलाएं, समाज को आगे बढ़ाने कुरीतियों का त्याग करने का लिया संकल्प

शक्ति भवन में जुटी समाज की महिलाओं ने बड़े उत्साह से हिस्सा लिया।

स्पर्धा के विजेताओं का पौधा देकर किया सम्मान

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि अनिला भेड़िया, बालोद महासभा उपाध्यक्ष चिदाकाश आर्य, प्रदेश महिला उपाध्यक्ष अनुसुइया ठाकुर और अल्पना पौषार्य ने भी विचार रखे। इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना से की गई। अंत में विजेताओं को औषधि पौधे देखकर सम्मानित किया गया। समाज के निर्वाचित नवनियुक्त पदाधिकारियों को महिला उपाध्यक्ष अनुसूया ठाकुर ने शपथ दिलाई।

नाटक से प्रेरित हो बेटी बचाने का लिया संकल्प

दुर्ग और भिलाई की विभिन्न परिक्षेत्रों से पहुंची महिलाओं ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया। लघु नाटिका के रूप में बेटी बचाओ का सदृश्य चित्रण किया गया। इसमें गर्भ में पल रही बेटी मां के सपनों में आकर कहती है कि मां मुझे कपड़ा मत देना, मुझे पढ़ने के लिए कॉपी किताब मत लेना। मैं अपने बड़े भाई का सारी पुरानी चीजों का उपयोग कर लूंगी। इस प्रस्तुति से महिलाओं ने भावपूर्ण होकर बेटी बचाने का संकल्प लिया। इसी तरह समाज की युवतियों और महिलाओं ने एक से बढ़कर पारंपरिक व लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी। समारोह में समाज की सैकड़ों महिलाएं उत्साह से शामिल हुईं।

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