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चरोदा निगम में एमआईसी के गठन को लेकर सामान्य सभा में दिन भर चलता रहा हंगामा

पांच महीने बाद हुई चरोदा निगम की सामान्य सभा में एमआईसी के गठन प्रकिया पर हंगामा हुआ। कांग्रेसी पार्षद नगरीय...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 07, 2018, 02:15 AM IST

चरोदा निगम में एमआईसी के गठन को लेकर सामान्य सभा में दिन भर चलता रहा हंगामा
पांच महीने बाद हुई चरोदा निगम की सामान्य सभा में एमआईसी के गठन प्रकिया पर हंगामा हुआ। कांग्रेसी पार्षद नगरीय प्रशासन विभाग के पत्र को आधार मान कर मेयर चंद्रकांता मांडले से इस पर जवाब चाह रहे थे। विपक्ष ने मेयर से जवाब नहीं मिलने के बाद आयुक्त से इस संबंध में जवाब मांगा। जवाब नहीं मिलने पर सभा में जमकर हंगामा हुआ। जिसको देखते हुए सभा को आधे घंटे के लिए स्थगित किया। लंच के बाद शुरू हुए सभा में भी उसी तेवर के साथ विपक्षी पार्षदों ने जवाब मांगना शुरू किया।

सभा के अंत में शासन को पत्र भेजे जाने की बात पर मामला थोड़ा शांत हुआ। निगम की सामान्य सभा सुबह 11 बजे शुरू हुई। विषय सूची में शामिल पहला मुद्दा महापौर परिषद की बीती चार बैठकों के पारित संकल्प पर चर्चा के लिए जैसे ही रखा गया कांग्रेसी पार्षद दल नेता संतोष तिवारी, राजेश दांडेकर, लावेश मदनकर, एवं ने एमआईसी के गठन की वैधानिकता पर सवाल उठा दिया।

पंाच माह बाद हुई सामान्य सभा की बैठक में सोमवार को कांग्रेसी पार्षदों ने जमकर हंगामा किया।

सभापति को एमआईसी में रखना या ना रखना मेरा विशेषाधिकार: मेयर

सभापति विजय जैन ने मेयर चन्द्रकांता मांडले से उक्त पत्र से सदन को अवगत कराने कहा तो पहले मेयर ने यह जवाब दिया कि पत्र की प्रतिलिपि आपके पास भी आई है। बेहतर है कि सदन को आप अवगत करा दें। इसके बाद मेयर ने स्वयं ही स्थिति संभालते हुए पत्र पढ़कर सुनाया। वहीं यह भी कहा कि सभापति को एमआईसी में रखाना ना रखना मेरा विशेषाधिकार है और जिस नियम की सभापति बात कर रहे हैं उसमें 2004 में संशोधन भी हो गया है। वे चाहे तो इसे लेकर न्यायालय जा सकते हैं। इसके बाद कांग्रेसी पार्षदों ने हंगामा किया।

पांच माह बाद हुई सामान्य सभा की बैठक में इन मुद्दों को मिली स्वीकृति

सदन में अंत में आसंदी ने जनहित से जुड़े मुद्दों पर सभी सदस्यों से गंभीरता दिखाते हुए चर्चा करने कहा। मेयर ने भी इसका समर्थन किया। इसमें बाद सभा में पीएम आवास योजना के तहत 2022 तक कुल 15907 आवास बनाने घटक राशि 736.61करोड़ व्यय की स्वीकृति दी। इसके अलावा मुख्यमंत्री पालिका बाजार की 22 दुकानों की नीलामी की उच्चतम राशि को भी स्वीकृति दी गई। इसके अलावा प्रतीक चिह्न, डोर टू डोर कचरा कलेक्शन वाले समूहों को वित्त वर्ष 2018-19 के भुगतान के लिए राशि स्वीकृति का मुद्दा था।

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