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40 के बाद बोन डेंसिटी होने लगती है कम बचने के लिए खाएं हरी सब्जियां और टमाटर

मेडिकल सेंटर प्रभारी डॉ. रेशमा लाकेश ने कहा कि 40 के बाद महिलाओं में कैल्शियम की कमी के कारण हड्डियों में खनिज...

Dainik Bhaskar

Aug 09, 2018, 02:16 AM IST
40 के बाद बोन डेंसिटी होने लगती है कम बचने के लिए खाएं हरी सब्जियां और टमाटर
मेडिकल सेंटर प्रभारी डॉ. रेशमा लाकेश ने कहा कि 40 के बाद महिलाओं में कैल्शियम की कमी के कारण हड्डियों में खनिज तत्वों का घनत्व कम होने लगता है। इससे कमर और पीठ दर्द की शिकायत आम हो जाती है। इससे बचने के लिए हरी सब्जियों का उपयोग करना चाहिए। इसमें टमाटर, पालक भाजी और आयरन देने वाले त्वव ज्यादा लाभदायक साबित होते हैं।

गर्ल्स कॉलेज में दुर्ग मेडिकल सेंटर के सहयोग से लगे हेल्थ चेकअप कैंप में उन्होंने कहा कि 40 के बाद महिलाओं को वेट कंट्रोल करना चाहिए, ताकि जोड़ों में ज्यादा प्रभाव न पड़े। नहीं तो जोड़ों की परेशानियां भी शुरू हो सकती हैं। साथ ही दो से तीन महीने के अंतराल में आयरन और कैल्शियम का सप्लीमेंट लेते रहना चाहिए। नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज भी करना जरूरी है। इससे इन परेशानियों को दूर किया जा सकता है।

गर्ल्स कॉलेज में छात्राओं और स्टॉफ के सदस्यों की हडि्डयों की जांच की गई।

बोनमाॅस डेंसिटी, बाॅडी मॉस और न्यूरोपैथी टेस्ट किया

कैंप में उपस्थित छात्राओं और प्राध्यापिकाओं समेत शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक स्टॉफ के सदस्यों का बोन मॉस डेनसिटी, बॉडी मॉस और न्यूरोपैथी टेस्ट किया गया। इसके लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया। सभी की उम्र, वजन और ऊंचाई की नाप ली गई। उन्हें आयरन और कैल्शियम सप्लीमेंट लेने के तरीके बताए।

पुरुषों में भी हो रही हड्डियों की कमजोरी : डॉ. केसी भगत

डॉ. केसी भगत ने बताया कि महिलाओं के साथ अब पुरुषों में भी ऐसे लक्षण दिखने लगे हैं। ऐसे में नियमित एक्सरसाइज वेट कंट्रोल ही सबसे बढ़िया साधन है। जरूरत पड़ने पर आयरन और कैल्शियम सप्लीमेंट ले सकते हैं। दवाइयां लेने के पहले अपने फिजिशियन से सलाह अवश्य लें। उनके परामर्श के बाद ही दवाइयां शुरू करें।

140 छात्राओं की हुई जांच

कैंप में कॉलेज की 140 छात्राओं की बोन डेनसिटी, बॉडी मॉस इंडेक्स और न्यूरोपैथी टेस्ट किया गया। इसमें अधिकांश छात्राएं खून की कमी और कमजोर हड्डियों वाली मिली। इसके अलावा पुरुष स्टॉफ के सदस्यों में भी ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण दिखाई दिए। उन्हें कैल्शियम और आयरन सप्लीमेंट लेने के लिए कहा गया। नियमित हल्की एक्सरसाइज और योग आदि करने की सलाह दी गई।

एड़ी और पैर की भी जांच की

शिविर में जांच के लिए आए लोगों के पैर के तलुवा, एड़ी और पैरों में होने वाली तकलीफों की जांच की गई। यह जांच मधुमेह की आशंका में की गई। क्योंकि शिविर में आए लोगों ने जो लक्षण बताए उसके आधार पर न्यूरोपैथी जांच की गई। डॉ. अंकिता भगत ने उन्हें पोषण एवं आहार प्रबंध पर चिकित्सीय परामर्श दिया। उन्हें मौसम के अनुसार अपने खान पान के तरीकों में बदलाव लाने को कहा गया। इससे बीमारियों को एक सीमा तक नियंत्रित किया जा सकता है। इससे तकलीफ कम होगी और राहत भी मिलेगी। समय समय पर चिकित्सक की सलाह भी लें। इस अ‌वसर पर संस्था के प्राचार्य डॉ. सुशीलचंद्र शर्मा, यूथ रेडक्रॉस की छात्राएं और स्टॉफ के सदस्य उपस्थित थे। इसमें तापस भगत, मुकेश कुमार और प्रीति ठाकुर ने सहयोग दिया।

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