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सिर्फ मौतों को गिनने का काम कर रहे दो शिशु रोग विशेषज्ञ और एमडी मेडिसिन, 1 फिजिशियन और 3 शिशु रोग डॉक्टर ही ग्राउंड में

डेंगू के रोकथाम में लगा स्वास्थ्य विभाग लापरवाही की हद ही पार कर दी है। सम्यक इलाज नहीं मिलने के कारण 10 दिनों में...

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2018, 02:20 AM IST
सिर्फ मौतों को गिनने का काम कर रहे दो शिशु रोग विशेषज्ञ और एमडी मेडिसिन, 1 फिजिशियन और 3 शिशु रोग डॉक्टर ही ग्राउंड में
डेंगू के रोकथाम में लगा स्वास्थ्य विभाग लापरवाही की हद ही पार कर दी है। सम्यक इलाज नहीं मिलने के कारण 10 दिनों में डेंगू से 10 लोगों की मौत हो गई है, इसके बाद भी डेंगू इलाज में अहम रोल अदा करने वाले एमडी मेडिसिन और बच्चों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से मौतें गिनने का काम करवाया जा रहा है। ऐसा हाल तब है, जब संक्रमित क्षेत्र के अस्पतालों में डेंगू के इलाज के लिए एमडी मेडिसिन व बच्चों के डॉक्टरों की आवश्यकता है। लेकिन 4 के 4 अस्पतालों में एक भी बच्चों के तथा मेडिसिन के डॉक्टर नहीं हैं। यह जानकार हैरानी होगी कि अपने जिला अस्पताल में दुर्ग की 8 सीएचसी , 21 पीएचसी तथा सुपेला के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल से मरीजों के रेफर करने का सिलसिला जारी है, फिर भी वहां सबके इलाज के लिए मात्र एक एमडी मेडिसिन व तीन बच्चों के डॉक्टर हैं।

डेंगू संक्रमित एरिया का प्रमुख सरकारी अस्पताल, जहां प्रतिदिन डेंगू का 100 से 150 से मरीज पहुंच रहा है, सीएमएचओ वहां का रोज मुआयना कर रहे हैं, इसके बाद भी अपने यहां मौजूद दो बच्चों के डॉक्टर व एक मेडिसिन के डॉक्टर से मौतें गिनवा रहे हैं। इधर, डेंगू रोकथाम के सभी नुस्खे फेल हो गए हैं, आठ घंटे की जांच में ही डेंगू मरीजों की संख्या सवा से के पार चली गई है। ये आंकड़े सिर्फ भिलाई के 5 सरकारी अस्पताल सुपेला, खुर्सीपार, छावनी, बैकुंठधाम व छावनी के है। शुक्रवार को कुल 400 बुखार के मरीजों की जांच हुई, इनमें 153 को डेंगू पाजीटिव आया।

इधर, सरकारी अस्पतालों में 8 घंटे में डेंगू के सवा सौ मरीज मिले

शासकीय सुपेला अस्पताल में डेंगू की जांच के लिए शुक्रवार को 155 लोग पहुंचे। शाम तक भीड़ रही।

8 घंटे में सरकारी अस्पतालों में इतने मरीज हुए भर्ती






सीएमएचओ डॉ. सुभाष पांडेय अपने साथ तीन डॉक्टरों को अटैच कर करवा रहे बाबूगिरी अगर इन तीनों डॉक्टरों की योग्यता की सेवाएं ली जाए तो कंट्रोल करने में मिलेगी मदद

सीएस आए तो कचरा उठाने दिखी गाड़ियां, यह काम पहले ही कर लेते तो स्थिति नहीं बिगड़ती

निगम ने शुक्रवार से विशेष सफाई अभियान की शुरुआत की। इसे उन्होंने चीफ सेक्रेटरी को दिखाया भी। जब सीएस भिलाई का दौरा कर दुर्ग जा रहे थे तो सभी 30 ट्रैक्टरों को हाइवे में खड़ा कर दिया गया।

डेंगू का मुफ्त इलाज का आदेश 12 घंटे बाद सीएमएचओ दफ्तर से निकला, दिनभर इलाज के लिए भटकते रहे मरीज

हेल्थ रिपोर्टर | भिलाई

डेंगू रोकथाम और इलाज के प्रति सीएमएचओ तथा उनके दफ्तर से लगातार बरती जा रही लापरवाही शुक्रवार को उजागर हो गई। कैबिनेट मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय का बयान अखबारों में छपने के बाद निजी अस्पतालों में डेंगू के इलाज के लिए अभिभावक पूरा दिन भटकते रहे, 9 को ही साइन हुए आदेश को निगम को 10 अगस्त को रिसीव कराया गया। अब इन 19 अस्पतालों व नर्सिंग होम में डेंगू का मुफ्त इलाज होगा। कलेक्टर और मंत्री के बयान का जब हवाला दिया तो कुछ निजी अस्पतालों ने कह दिया कि उनके पास कोई लिखित आदेश नहीं आया तो कुछ ने मुफ्त इलाज की सुविधा मांगते ही कहा कि बेड भर गए हैं।

इधर, डेंगू मरीजों की भीड़ के कारण एक को हार्ट अटैक दूसरी चक्कर खाकर गिरी और तीसरी ने दिया रिजाइन

बुखार के हर मरीज की डेंगू जांच करने के आदेश के कारण शुक्रवार को सुपेला के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में तैनात एक लैब टेक्नीशियन को अटैक पड़ गया। विनाेद कुमार देशमुख नाम के इस परमानेंट एलटी को अभी अस्पताल के अधिकारी चंदूलाल अस्पताल से लौटे ही थे कि एस कुमार नाम की दूसरी परमानेंट एलटी चक्कर खाकर गिर पड़ी। डेंगू जांच के साथ ही रूटीन जांच कराने वाले मरीजों का भीड़ का दबाव नहीं झेल पाने के कारण शाम में यहां की संविदा एलटी आरती केसरी ने इस्तीफा दे दिया। बताया जा रहा कि विनोद देशमुख को पहले भी एक बार अटैक आया है। कर्मचारियों की संख्या पूर्ववत और मरीजों की संख्या तीन-गुनी हो जाने से वह समय से काम नहीं दे पाने के कारण परेशान थे। इधर बाहर से पहुंचने वाले अधिकारियों की कुछ ज्यादा ही सुननी पड़ रही थी। इसी वजह उनको अटैक पड़ गया।

10 अगस्त को निगम को मिला आदेश

अब भी बच्चे ज्यादा प्रभावित।

19 अस्पताल व नर्सिंग होम को सीएमएचओ ने जारी किया आदेश।

5 घंटे में तीन निजी अस्पतालों की भागदौड़

पीएचसी खुर्सीपार से शाम तीन बजे गंभीर हाल में 3 वर्षीय शीतल को रेफर कर दिया गया। पिता छेदीलाल अखबार में केबिनेट मंत्री का बयान के कारण शाम करीब साढ़े 3 बजे गिरदौड़ी अस्पताल पहुंचे, मुफ्त में इलाज की बात की तो उसने कह दिया कि बेड खाली नहीं है। यहां से वह बीएम शाह पहुंचे यहां के जिम्मेदार ने कहा कि उनके पास लिखित आदेश नहीं है। हार-थक कर वह स्पर्श पहुंचे, वहां कहा गया कि पहले हम जांच करेंगे, उसके अनुसार भर्ती करेंगे। जबकि सभी स्वयं के खर्चे पर भर्ती करने को तैयार थे।

जिम्मेदारों ने कहा...



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