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संस्कृति के विकास में काम करने पर मिलती है संतुष्टि : तीजन बाई

पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई ने कहा कि एक व्यक्ति अपनी संस्कृति के विकास के लिए काम करता है तो एक अलग तृप्ति...

Danik Bhaskar | Aug 12, 2018, 02:20 AM IST
पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई ने कहा कि एक व्यक्ति अपनी संस्कृति के विकास के लिए काम करता है तो एक अलग तृप्ति महसूस होती है। तीजन बाई ने युवा फिल्मकार अभिलाष अग्रवाल की छत्तीसगढ़ी फिल्म तोरे बिना देखने के बाद यह विचार व्यक्त की।

इसके माध्यम से काफी कुछ सीखा और महसूस कर सकते हैं। फिल्मों के माध्यम से छिपी हुई लोक कला को सामने लाना बहुत अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे नए कंटेंट बनाए जाएं, जो शहरी वर्ग का आकर्षण फिर से लोक कला की ओर बढ़ाए। कलाकार ठंडे दिमाग का होना चाहिए। मजाकिया और हर चीज को गंभीर रूप से लेने पर आगे बढ़ना मुश्किल होता है। अभिलाष के प्रयास की उन्होंने सराहना की। हार जीत की परवाह किए बिना अपने भीतर के कलाकार को लाने का प्रयास करना चाहिए। लोगों की परवाह भी न करें। अभिलाष ने उनसे छत्तीसगढ़ी फिल्मों और नए कलाकारों की मानसिक स्थिति के बारे में चर्चा की।

कलाकारों के साथ हुए कठिनाइयों पर चर्चा

तीजन बाई से चर्चा में कलाकारों की कठिनाइयों पर भी विचार विमर्श किया गया। वह किन किन कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं पर चर्चा की गई। उन्होंने अभिलाष के फिल्म की सराहना की। इसमें लोक कला और मॉडर्न आर्ट के फ्यूजन को नया प्रयास बताया।