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डेंगू से हो रही मौत को रोकने के लिए इस मशीन का होना भी जरूरी, लेकिन पहल नहीं

डेंगू का डंक हेल्थ रिपोर्टर | भिलाई डेंगू के संक्रमित मरीजों के साथ ही जैसे-जैसे मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 12, 2018, 02:21 AM IST

डेंगू से हो रही मौत को रोकने के लिए इस मशीन का होना भी जरूरी, लेकिन पहल नहीं
डेंगू का डंक

हेल्थ रिपोर्टर | भिलाई

डेंगू के संक्रमित मरीजों के साथ ही जैसे-जैसे मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे प्लेटलेट की अत्याधुनिक एफेरेसिस मशीन की कमी महसूस होने लगी है। मात्र एक व्यक्ति से एक से डेढ़ घंटे के भीतर 60 हजार तक प्लेटलेट निकालने वाली यह मशीन अगर दुर्ग में होती तो डेंगू मरीजों के घटती प्लेटलेट को बढ़ाने में काफी मदद मिलती। यह सिंगल डोनर से प्लेटलेट चढ़ाने वाली मशीन बेहद जरूरी है। जिले में 12 लोगों की मौत डेंगू के अलग-अलग स्टेजों से अब तक हो चुकी है। इसके बावजूद सरकारी और निजी स्तर पर एफेरेसिस मशीन लेने का कोई भी प्रयास नहीं हो सका है। सुनने में यह जरूर आया है कि सेक्टर-9 अस्पताल में इस मशीन को लगाए जाने की प्रक्रिया जारी है। चर्चा तो यह भी जा रहा है कि सेक्टर-9 अस्पताल में इस मशीन को खरीदने के लिए सारा प्रोसेस हो गया है। सिर्फ मैनेजमेंट के फाइनेंस डिपार्टमेंट लटका हुआ है। अब देखना ये होगा कि इस मशीन को खरीदने के लिए पहले कौन पहल करता है। अब भिलाई में डेंगू से 12 लोगों की मौत के बाद शायद सरकार जाग जाए।

अब तक12 की मौत

अब तक12 की मौत

ट्विनसिटी में 50 से ज्यादा अस्पताल लेकिन सिंगल ब्लड डोनर से प्लेटलेट चढ़ाने वाली एक भी मशीन नहीं

अभी एक यूनिट प्लेटलेट बनाने में 4 घंटे का इंतजार

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में प्लेटलेट बनाने के लिए ब्लड सेप्रेटर मशीन है। इस मशीन से प्लेटलेट बनाने में 3 से 4 घंटे लगते हैं।

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चार घंटे की बजाय दो घंटे में ही 60 हजार यूनिट तक प्लेटलेट मिल जाती।

एक ही डोनर से 60 हजार प्लेटलेट मिलती, अभी 60 हजार के लिए आठ डोनर चाहिए।

प्लेटलेट चढ़ने पर कभी-कभार इंफेक्शन की संभावना ही नहीं रहती।

अभी सभी ग्रुपों के खून से प्लेटलेट निकाली जाती है, मिक्स कर ही देते हैं।

सबसे बड़ा फायदा होता की डोनर का एचबी बरकरार रहता क्योंकि ब्लड में मौजूद पी आरबीसी और प्लाजमा तुरंत का तुरंत उसके शरीर में वापस डाल दिया जाता।

डेंगू के बुखार से तप रहे बेटे का शरीर हो गया ठंडा, मां को एक नजर देखने से पहले ही दुनिया छोड़ गया रूद्रप्रताप

स्पर्श हॉस्पिटल में भर्ती रूद्रप्रताप ने शनिवार सुबह दम तोड़ा। जैसे ही खबर मिली मां सीढ़ी में बेसुध हो गई।

रोती हुई मां को देख रो पड़ा स्टाफ

खिड़की से बेटे को देख रही थी मां

रुद्र की मौत के उपरांत पागल हुई मां का हाल, स्पर्श अस्पताल में मौजूद रहा जो भी देखा उसकी आखों से आंसू निकलने लगा। बेटा मृत अवस्था में अस्पताल की इमरजेंसी में पड़ा था। हालात से अनभिज्ञ मां कभी भाग कर शीशे से उसे झांक कर देख आती थी। वहां गेट पर तैनात कर्मचारी जिसे यह बताया गया था कि जब रुद्र की मां रुद्र का हाल पूछे तो कहना की वह ठीक है। वार्ड 25 में डेंगू से यह दूसरी मौत है।

जिले में 572 मरीजों का हो रहा इलाज

जिले के अस्पतालों में अभी भी 572 लोग इलाज करा रहे हैं। डेंगू के स्क्रिनिंग टेस्ट में इनमें से कुछ का एनएस1 पाजीटिव तो कुछ का आईजीएम व आईजीजी पाजीटिव आया है। जिला प्रशासन के मुताबिक 572 मरीजों में से सेक्टर-9 अस्पताल में 100 से 125 मरीज भर्ती है। 65 से 70 मरीजों का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है। शेष निजी अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। इधर शाम को कलेक्टर ने प्रेस ब्रीफिंग कर रोकथाम के बारे में बताया।

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