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दुर्ग यूनिवर्सिटी के रिसर्च एग्जाम में अर्थशास्त्र के छात्र सबसे ज्यादा सफल, फिजिक्स में सिर्फ 1 पास

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में हुई पहली बार प्री पीएचडी परीक्षा के नतीजे जारी किए गए हैं। परीक्षा में शामिल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 08, 2018, 02:26 AM IST

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग में हुई पहली बार प्री पीएचडी परीक्षा के नतीजे जारी किए गए हैं। परीक्षा में शामिल होने के लिए 1062 ने पंजीयन कराया था। इसमें से 986 परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें 122 को इसमें सफलता मिली है। परिणाम दो साल तक के लिए मान्य होगा। फिर अगली परीक्षा होगी। इसकी आरडीसी के लिए 9 कुलपतियों की समिति बनाई गई है। साथ हो शोध कार्य और उसकी जांच के लिए भी समय सारणी तय कर दिया गया है। सबसे ज्यादा एजुकेशन में 146 उम्मीदवारों ने पंजीयन कराया था।

साइंस कॉलेज में हुई थी परीक्षा, अब 122 छात्रों के लिए खुला शोध करने का द्वार

इतिहास, अंग्रेजी और गणित में एक भी योग्य नहीं मिले

इतिहास में शोध करने के लिए 25 लोगों ने पंजीयन कराया था, लेकिन 5 ही परीक्षा में शामिल हुए। उनमें से किसी को भी सफलता नहीं मिली। अंग्रेजी में शोध करने के लिए परीक्षा में शामिल 51 उम्मीदवारों में से भी किसी को भी शोध करने के योग्य नहीं माना गया। गणित रिसर्च करने के इच्छुक 92 उम्मीदवारों में भी कोई योग्य नहीं मिला। इतिहास में परिणाम शून्य रहा।

फिजिक्स व जियोलॉजी में 1-1 और जूलॉजी में दो हुए सफल

17 विषयों में शोध के लिए आयोजित की थी परीक्षा

डीयू ने बॉयोकेमिस्ट्री, बॉटनी, केमेस्ट्री, कॉमर्स, अर्थशास्त्र, एजुकेशन, अंग्रेजी, जियोलॉजी, हिंदी, इतिहास, होम साइंस, गणित, माइक्रोबॉयोलॉजी, भौतिकी, राजनीति शास्त्र, समाज शास्त्र और जूलॉजी विषयों में शोध करने के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की थी। इसमें डीयू के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों बेमेतरा, कवर्धा, राजनांदगांव, दुर्ग और बालोद में परीक्षा हुई थी।

जारी परिणाम के अनुसार फिजिक्स और जियोलॉजी में सिर्फ1-1 छात्र को ही परीक्षा में सफलता मिली है। डीयू की जांच समिति ने उन्हें शोध करने के योग्य माना है। जूलॉजी में भी सिर्फ दो ही छात्रों को सफलता मिली है।

अब गाइड तय करेंगे चयनित हुए उम्मीदवार

आने वाले दिनों में शोध के लिए चयनित उम्मीदवार अपने गाइड तय करेंगे। उनके पास रिक्त सीटों पर छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। उनकी गाइडेंस में वे अपना सिनोप्सिस बनाएंगे। इसके बाद वे चयन समिति के सामने प्रस्तुत होंगे। सालभर शोध कार्य करेंगे। फिर इसकी परीक्षा होगी। इसमें सफल होने के बाद उन्हें शोध करने की पात्रता मिलेगी। फिर रिसर्च पूरा कर सकेंगे।

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