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डीजीएम से कहा सीपेज वाले घर पहले सुधारें टारफेल्टिंग सीपेज रोकने में कारगर नहीं

टाउनशिप में जिन मकानों में सीपेज अधिक हो रहा है ऐसे मकानों को पहले टारफेल्टिंग के लिए चुना जाए। ताकि समस्या और...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 02:30 AM IST
टाउनशिप में जिन मकानों में सीपेज अधिक हो रहा है ऐसे मकानों को पहले टारफेल्टिंग के लिए चुना जाए। ताकि समस्या और अधिक गंभीर न हो सके। और बीते दिनों रिसाली जैसी दुर्घटना दोबारा न हो।

यह मांग सीटू के प्रतिनिधि मंडल ने डीजीएम इंचार्ज एके पती से की। इस पर डीजीएम इंचार्ज ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन देते हुए बताया कि टार फेल्टिंग के लिए तीन करोड़ का बजट रखा गया है। यह कार्य नवंबर 2017 से चालू हुआ है। जिसके लिए कुल 18 महीने का समय दिया गया है। टाउनशिप के 1500 घरों का टार फेल्टिंग इस दौरान किया जाएगा। रिसाली सेक्टर, सेक्टर 2 तथा ऑफिसर क्वार्टर का टार फेल्टिंग का कार्य चालू हो गया है। अभी तक रिसाली सेक्टर में 149 घर, सेक्टर 2 में 30 घर तथा अधिकारियों के 20 घरों का टार फेल्टिंग हुआ है। इस तरह 199 घरों में टारफेल्टिंग का कार्य पूरा हो चुका है। प्रतिनिधिमंडल में पूरन वर्मा, शेख महमूद, विजय जांगड़े, अमित बर्मन, वीएस साहू, एसएल भूआर्य, आरके सिंह, दुर्गेश बघेल गोकुल प्रसाद , राजेश टावरी , डी सूर्यनारायण तथा संतोष कुमार ठाकुर शामिल थे।

जर्जर मकान का निरीक्षण करता सीटू।

बेहतर है फर्शीकरण करना

सीटू प्रतिनिधि मंडल ने यह मांग भी की है कि टारफेल्टिंग सीपेज रोकने के लिए कारगर नहीं है । कई कर्मियों ने बताया कि टार फेल्टिंग से ज्यादा कारगर सीमेंट फर्शीकरण है। कई कर्मियों ने बताया कि उन्होंने अपने छत का पुराने टार फेल्टिंग को उखाड़ कर सीमेंट से फर्शीकरण कर दिया है। जिसके बाद सीपेज बिल्कुल बंद है।

शिकायत की, मेंटेनेंस नहीं

शिकायत के 15 महीने बीतने के बाद भी उनके मकान का संधारण नहीं हुआ। यूनियन का मानना है कि यदि समय पर कंप्लेंट अटेंड होता, तो इतनी बड़ी घटना नहीं घटती।चूंकि इसमें कर्मी की कोई गलती नहीं है, अतः इस दुर्घटना से घायल हुए कर्मी को अनफिट अवधि के लिए विशेष अवकाश दिया जाए। क्योंकि हादसे के लिए प्रबंधन जिम्मेदार है।