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किट होने के बाद भी डेंगू की जांच नहीं, लाचार सिस्टम से पांचवी मौत

अब तक 05 की मौत हेल्थ रिपोर्टर | भिलाई डेंगू रोकथाम और उससे हो रही मौतों को रोकने के लिए सरकारी स्तर पर हुए...

Dainik Bhaskar

Aug 08, 2018, 02:30 AM IST
किट होने के बाद भी डेंगू की जांच नहीं, लाचार सिस्टम से पांचवी मौत
अब तक 05 की मौत

हेल्थ रिपोर्टर | भिलाई

डेंगू रोकथाम और उससे हो रही मौतों को रोकने के लिए सरकारी स्तर पर हुए ढेर सारे इंतजामों के बावजूद मंगलवार को डेंगू ने सुपेला के पांच रास्ता वार्ड-छह निवासी दीपाली को मौत के घाट उतार दिया।

मौत से एक दिन पहले छह अगस्त को डेंगू संक्रमित एरिया के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में डेंगू जांच की किट रहते हुए उसकी मलेरिया की जांच कर इलाज की खानापूर्ति की गई। वहां से घर आने के बाद तबीयत बिगड़ने पर घर के सदस्य उसे पास के निजी अस्पताल बीएम शाह अस्पताल ले गए। रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि होने पर उस दिशा में इलाज शुरू किया। मंगलवार शाम को उपचार के दौरान मौत हो गई।

सुपेला अस्पताल से मलेरिया का टेस्ट कर भेज दिया, गुहार लगाते रहे पिता

पिता बोले-सरकारी सिस्टम से हुई मेरी बेटी की मौत


दीपाली के पिता अवतार सिंह ने कहा कि, लालबहादुर शास्त्री अस्पताल के डॉक्टर की लापरवाही से मेरी बच्ची की मौत हुई है। मैंने उनसे कहा था कि डॉक्टर साहब दीपाली की डेंगू जांच कराइए लेकिन उन्होंने मलेरिया की जांच कराई। निगेटिव आने पर इंजेक्शन लगवाकर घर भेज दिया। शाम में तबीयत बिगड़ी तो मैं बेटी को लेकर बीएम शाह अस्पताल गया। जांच करने पर उसे डेंगू होने की पुष्टि हुई।

जांच कराने के बाद करुंगा कार्रवाई

सरकारी अस्पताल के चौखट पर दीपाली को नहीं मिला इलाज

डेंगू रोकथाम के लिए सरकारी तंत्र चाहे जितना दावेदारी कर ले हकीकत यह कि डेंगू का इलाज छोड़िए उसकी जांच तक नहीं कर पा रहे हैं। डेंगू संक्रमित क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ही, व्यवस्था रहते हुए अपनी चौखट से कुछ दूर रहने वाले डेंगू संक्रमित मरीज की जांच तक नहीं कर सका है। वहां तैनात डॉक्टर ने डेंगू की जांच तब नहीं कराया है। जब संक्रमित मरीज के पिता डेंगू की जांच के लिए निवेदन किए थे।

भिलाई|शहर में डेंगू का प्रकोप बढ़ते जा रहा है। इसके लिए कहीं न कहीं हमारा सिस्टम दोषी है। क्योंकि, डेंगू जैसे संक्रमित बीमारी को रोकने के लिए जो प्लानिंग की थी। उसकी एक्जीक्यूशन बेहतर नहीं हुआ। सफाई के नाम पर दो-तीन सालों में तीन बड़े घोटाले हुए। उसका असर अब शहर में देखने को मिल रहा है।

पहले टेंडर में धांधली, अब टेंडर ही नहीं कर पाए : किवार जाने के बाद कलेक्टर दर पर शहर की सफाई होती रही। इसके बाद निगम ने ग्लोबल टेंडर किया। बावजूद अपने लोगों को ठेका दिया। 16 करोड़ रुपए के ठेके में गड़बड़ी के कई आरोप लगे।

असर क्या: दो साल से सफाई का ठेका नहीं हुआ। इसलिए कलेक्टर दर पर सफाई हो रही है। यानि कि सफाई कार्य में सीधे से कटौती। पहले 1500 कर्मियों का अमला था। अब 1000 में सिमट गया। अन्य काम भी प्रभावित हुए।

करोड़ रुपए का घोटाला

भिलाई निगम में ये घोटाले नहीं होते तो इतना विकराल नहीं होता डेंगू का कहर

वो तीन धांधलियां जिस पर न मेयर ने ध्यान दिया और न ही मेयर की टीम ने, अफसर भी आंख मूंदे रहे..

ट्रेंचिंग ग्राउंड का समतलीकरण नहीं, जगह-जगह नुक्कड़: सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद निगम शहर के ट्रेंचिंग ग्राउंड को समतलीकरण करने की योजना बनी। पर काम से पहले ही पेमेंट करने की बात सामने आई।

असर क्या: ट्रेंचिंग ग्राउंड का समतलीकरण नहीं करने का असर सीधे शहर पर पड़ा। जगह-जगह नुक्कड़ हो गए। जहां कचरा अटा पड़ा है। हर वार्ड में ट्रेंचिंग ग्राउंड जैसा नुक्कड़ बन गया।

जो वाहन चलते नहीं, उसमें भी डीजल: शहर के नुक्कड़ों से कचरा उठाने के लिए निगम ने कचरा परिवहन का ठेका दिया। निगम के वाहनों को भी इस काम में लगाया। पर जिम्मेदारों ने यहां भी गड़बड़ी को अंजाम दिया। करीब 35 लाख की धांधली हुई।

असर क्या: शहर में कचरा नहीं उठा। सिर्फ कागजों में सफाई वाहन चलाते रहे। वार्डों में कचरा अटा और डंप पड़ा रहा। संक्रमित बीमारी अपना पैर पसारती रही। ज्यादातर वार्डों में सिर्फ कचरा ही पड़ा हुआ है।

सीधी बात

घोटाले से नहीं हुआ कोई असर, हम डेंगू पर गंभीर

लक्ष्मीपति राजू, चेयरमैन, स्वास्थ्य विभाग, भिलाई




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