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18 साल में विदेश से 7000 छात्रों ने एमबीबीएस किया डॉक्टर बने पर प्रैक्टिस का लाइसेंस सिर्फ 275 के पास

केस 1|महासमुंद के एक युवक ने किरगिस्तान से एमबीबीएस की। 5 बार एफएमजी परीक्षा दी, अब हौसला टूट रहा है। पिता ने खेत...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 09, 2018, 03:10 AM IST

केस 1|महासमुंद के एक युवक ने किरगिस्तान से एमबीबीएस की। 5 बार एफएमजी परीक्षा दी, अब हौसला टूट रहा है। पिता ने खेत बेचकर एमबीबीएस करने भेजा था। कहते हैं- यहां मजबूरी में कंपाउंडर बना, अब सिर्फ एक रास्ता बचा है वहीं जाकर प्रैक्टिस करुं।

केस 2|जांजगीर की एक युवती ने यूक्रेन से डिग्री ली। 7 बार एफएमजी परीक्षा दी, पास नहीं हुईं। कहती हैं- बार-बार परीक्षा देने का अब साहस नहीं है। प्रवाइवेट अस्पताल में एडमिनिस्ट्रेटर बन गई हैं। उनके मुताबिक यूक्रेन की पढ़ाई का स्तर औसत दर्जे का है, इसलिए देश में परीक्षा पास नहीं कर पा रहीं।

मोहम्मद निजाम|रायपुर

छत्तीसगढ़ में 7000 ऐसे छात्र हैं जिनके पास एमबीबीएस की डिग्री तो है, लेकिन वो प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं। इन छात्रों ने यूक्रेन, उजबेकिस्तान, बिस्केक, किरगिस्तान, अजरबैजान, कजाकिस्तान और मलेशिया जैसे देशों से मेडिकल ली डिग्री है। सभी ने 20-20 लाख रुपए की फीस देकर पढ़ाई की थी। पिछले 18 साल के रिकॉर्ड के अनुसार इनमें से सिर्फ 275 एेसे छात्र हैं जिनके पास प्रैक्टिस करने का लाइसेंस है। क्योंकि, ये छात्र विदेश से मेडिकल की डिग्री तो ले आए, पर फॉरन मेडिकल ग्रेजुएट (एफएमजी) टेस्ट पास नहीं कर पा रहे। इसलिए डिग्री होते हुए भी वो देश में मान्य नहीं है। परीक्षा में कई बार की नाकामी के कारण ये छात्र अस्पतालों में कंपाउंडर और एडमिनिस्ट्रेटर जैसे काम कर रहे हैं।

अब नीट की पहली काउंसिलिंग के बाद जिन छात्रों को मेडिकल कालेजों में एडमिशन नहीं मिला, उन्हें विदेशी कालेजों में दाखिला दिलाकर डॉक्टर बनाने का सपना दिखाने वाले एजेंट राज्य में सक्रिय हो गए हैं। एजेंट 20 लाख रुपए में डाॅक्टर बनाने का दावा करते हैं। एजुकेशन एकेडमी के नाम पर प्रदेश में ये ऑफिस खोलते हैं।

वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

एफएमजी परीक्षा क्या है

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) द्वारा फॉरन मेडिकल ग्रेजुएट (एफएमजी) टेस्ट आयोजित किया जाता है। इसे पास किए बिना विदेश से मेडिकल की डिग्री लेने वाला कोई भी व्यक्ति भारत में मरीजों का इलाज नहीं कर सकता। ये टेस्ट साल में दो बार जून व दिसंबर के तीसरे सोमवार और मंगलवार को लिया जाता है।

जानकारी डाॅ. श्रीकांत राजिमवाले, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के अनुसार

प्रदेश में ऐसे चल रहा है विदेश से डॉक्टर बनवाने का रैकेट

विदेश से डॉक्टर बनवाने का दावा करने वाली तीन एजुकेशन एकेडमी के रायपुर में शंकरनगर, शांतिनगर, बूढ़ापारा में ऑफिस हैं। भिलाई के सेक्टर-9, कोरबा, बिलासपुर और अंबिकापुर में भी आॅफिस चल रहे हैं।

100 से अधिक एजेंट नीट/पीईटी जैसी परीक्षा में नाकाम होने पर डाॅक्टर बनवाने का दावा कर रहे हैं। पासपोर्ट बनवाने से एडमिशन दिलाने तक का सौदा कर पूरे 5 साल का ठेका लेते हैं।

2019 से एफएमजी टेस्ट की जरूरत नहीं होगी। ये टेस्ट नेशनल एक्जिट टेस्ट (नेक्सट) में मर्ज हो सकता है। नेशनल मेडिकल कमिशन बिल 2018 में इसका प्रस्ताव शामिल है। जो संसद के मानसून सत्र में पास हो सकता है।

यूक्रेन, उजबेकिस्तान और मलेशिया जैसे देशों से 20-20 लाख रुपए फीस भरकर ली थी डिग्री, कोई कंपाउंडर बना कोई अस्पताल में देख रहा एडमिनिस्ट्रेशन

रोकने का कानून नहीं

इन एजेंटों को रोकने का कोई कानून नहीं है। विदेश पढ़कर आने वालों को एमसीआई के सामने समस्या रखनी चाहिए। -आर प्रसन्ना, हेल्थ डायरेक्टर

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