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सड़क नहीं होने से चिकित्सक नहीं आते गांव इसलिए डॉक्टर बनने की ठानी: कुसुम गोटे

घोर नक्सली आतंक। गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं। बिजली है पर लो वोल्टेज की समस्या। पानी के लिए भी एक अलग...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 10, 2018, 03:15 AM IST

सड़क नहीं होने से चिकित्सक नहीं आते गांव इसलिए डॉक्टर बनने की ठानी: कुसुम गोटे
घोर नक्सली आतंक। गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं। बिजली है पर लो वोल्टेज की समस्या। पानी के लिए भी एक अलग संघर्ष। ऐसे इलाके में चिकित्सक जाने से इनकार कर देते हैं। इससे लोगों को मौके पर उचित इलाज नहीं मिल पाता। इन्हीं परेशानियों को देखते हुए 10वीं कक्षा में पढ़ते समय ही डॉक्टर बनने की ठान ली थी। पिता ने सपनों को साकार करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसमें कुछ कमियां रही तो उसे सचदेवा पीटी कॉलेज के चेयरमैन डॉ. चिरंजीव जैन और उनके सहयोगियों ने पूरा कर दिया।

यह कहना है कि मेडिकल में चयनित मानपुर से करीब 8 किलोमीटर दूर हथरेल गांव की कुसुम गोटे की। उनके सम्मान में सचदेवा पीटी कॉलेज की ओर से एक होटल में आयोजित सितारे सचदेवा के कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि वह तीन बहनें हैं।

एक होटल में मेडिकल में चयनित छात्रा कुसुम गोटे को 51 हजार का चेक प्रदान किया गया।

शिक्षकों ने मॉक और विकली टेस्ट लेकर किया मोटिवेट और प्रीपेयर

11वीं और 12वीं की पढा़ई के दौरान जीव विज्ञान विषय लिया, लेकिन नीट की तैयारी के लिए मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं था। तब किसी ने सचदेवा कॉलेज के बारे में बताया। सेंटर पहुंचे तो पहले टेस्ट लिया गया। सफल होने पर शिक्षकों ने उनकी हर समय सहायता की। परिणाम रहा कि नीट में चयन हुआ और जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला।

25 साल में 3000 विद्यार्थी हुए चयनित : डॉ. चिरंजीवी जैन

संस्था के चेयरमैन डॉ. चिरंजीव जैन ने बताया कि संस्था सिल्वर जुबली वर्ष है। स्थापना के 25 साल में संस्था से 3000 छात्र पढ़कर निकले हैं। इंजीनियरिंग और मेडिकल में चयन हुआ है। कई बच्चे प्रॉपर मार्गदर्शन और आर्थिक समस्या के कारण बढ़ नहीं बाते। इसे देखते हुए पढ़़ाने के साथ आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की सहायता कर रहे हैं।

संस्था ने 51 हजार रुपए का चेक देकर की सहायता

कार्यक्रम में कुसुम को संस्था के चेयरमैन डॉ. जैन और मोती जैन ने 51 हजार का चेक दिया। उन्हें यह चेक संस्था में कोचिंग करके मेडिकल में प्रवेश पाने वाले आदेश जंघेल के हाथों यह चेक दिलाया गया। इससे पहले संस्था से ही पढ़कर निकले डॉ. हेमराज देवांगन के हाथों जंघेल को आर्थिक सहायता करने के लिए चेक दिलाया गया था।

तीन बहनों में सबसे छोटी है कुसुम, पिता हैं शिक्षक

बड़ी बहन जनपद में है। उससे छोटी फिजिक्स मे एमएससी कर रही है। वह सबसे छोटी है। स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर में 10वीं तक पढ़ाई की। तब गांव में डॉक्टरों की कमी को करीब से महसूस किया। तभी ठान लिया कि चिकित्सक बनना है और गांव की सेवा करना है। पिता ने हौसले को उड़ान दिया।

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