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दूसरों के प्रति घृणा और द्वेष की जगह हमेशा प्रेम भाव रखें, जीवन का असली आनंद इसी में

व्यवहार तीन प्रकार के होते हैं, सजा, प्रेम और क्षमायुक्त। अपने साथ हुए व्यवहार के प्रत्युत्तर में दंड देने की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 10, 2018, 03:16 AM IST

दूसरों के प्रति घृणा और द्वेष की जगह हमेशा प्रेम भाव रखें, जीवन का असली आनंद इसी में
व्यवहार तीन प्रकार के होते हैं, सजा, प्रेम और क्षमायुक्त। अपने साथ हुए व्यवहार के प्रत्युत्तर में दंड देने की भावना रखना, सजा देने की श्रेणी में आता है। हमारा व्यवहार पाप से घृणा करने का होना चाहिए। पापी से नफरत की भावना नहीं होना चाहिए। प्रेमयुक्त व्यवहार कभी दूसरों के प्रति घृणा की दृष्टि नहीं रखती। वहीं क्षमायुक्त व्यवहार प्रत्येक जीव के साथ मैत्री भाव, करूणाभाव रखना सिखाता है। यह विचार उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ में चातुर्मास आराधकों की व्याख्यानमाला में साध्वी लक्ष्ययशा मसा ने रखे।

प्रवचन श्रृंखला में साध्वी लब्धियशा श्रीजी ने कहा कि धर्म एक ऐसा अनुपम तत्व है, जिसकी नींव में वाणी, व्यवहार और विचार शुद्धि है। दूसरों के प्रति घृणा और द्वेष की जगह हमेशा प्रेम भाव रखें, जीवन का असली आनंद इसी में है। जीवन की पवित्रता धर्म का प्रथम चरण है। हृदय में धर्म का वास होते ही दुर्गुण रूपी अशुद्धियां जलकर भस्म हो जाती है। सूर्य के प्रकाश का खिड़कियों द्वारा प्रवेश होते ही जैस घर में से अंधकार भाग जाता है। वैसे ही हृदय में प्रवेश करके धर्म अनंतकाल से आत्मगृह में व्याप्त दुगुर्णों का सफाया करके ही रहता है। जिन दोषों ने हमें दुर्भावना के की दलदल में फंसाने का काम किया। वे दुर्गुण धर्म के प्रवेश से दूर होते हैं।

साध्वी के सांसारिक परिजनों का किया सम्मान

दुर्ग में साध्वी संयम रूचि मसा के सांसारिक परिजनों का सम्मान हुआ।

सदगुणों की संपन्नता विचलित नहीं होने देती

न जन्म हमारे हाथ में है न मृत्यु। इसके बीच का समय हमारे हाथ में है। इस जीवन में समय का उपयोग सद्गुणों के विकास में त्याग, तप, उदारता, करूणा, सेवा और परोपकार कर पुण्य बल संग्रह करें। सद्गुणों की संपन्नता गरीबी हो या अमीरी दोनों में ही हमें विचलित नहीं होने देती। यह विचार साध्वी मणिप्रभा मसा ने विचक्षण सत्संग सभा में व्यक्त किए। सभा में संयम रूचि मसा के सांसारिक परिजन उज्जैन से पहुंचे। उनका श्वेताबर मूर्तिपूजक संघ की ओर से समान किया गया।

भखारा: साधना की शक्ति से जीवन को बना सकते हैं तनावमुक्त: साध्वी

भखारा में चातुर्मास प्रवचन सुनने जैन श्रीसंघ के सदस्य पहुंच रहे।

जामगांव आर|भखारा के चातुर्मास प्रवचन में डॉ. चंद्रप्रभा श्रीजी ने भक्तों को प्रत्येक गुरुवार गणधर गौतमस्वामी की साधना के रहस्य बताए। कहा कि साधना जीवन के लिए वरदान है। इसके तीसरे गुरुवार साधना से दिनचर्या में आ रहे परिवर्तन को देखते हुए साधना प्रेमियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। लोगों को लगने लगा है कि साधना आज के भाग दौड़ के फेर में उत्तपन्न होने वाले तनाव से मुक्ति दिलाने में कारगर साबित होगी।जो गृहस्थ जीवन के लिए वरदान साबित होगा। जैन साध्वी ने कहा कि साधना में अद्भुत शक्ति होती है और इस साधना की कला को सीखने के लिए गुरु पथ प्रदर्शक होते हैं। सौभाग्य है गणधर गौतमस्वामी जैसे गुरु हमारे दर्शन को मिला जिनकी साधना करके हम बैतरणी पार कर सकते है। श्रीजी ने कहा कि गुरु के बिना जीवन अंधकारमय होता है।

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