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भिलाई में डेंगू से 13 दिन में 13वीं मौत

भास्कर न्यूज | भिलाई/रायपुर भिलाई में रविवार को डेंगू से एक और बच्चे की मौत हो गई। वार्ड 20 कैंप-1 के 13 वर्षीय मुकेश...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 13, 2018, 03:30 AM IST

भिलाई में डेंगू से 13 दिन में 13वीं मौत
भास्कर न्यूज | भिलाई/रायपुर

भिलाई में रविवार को डेंगू से एक और बच्चे की मौत हो गई। वार्ड 20 कैंप-1 के 13 वर्षीय मुकेश पिता रघुवीर ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। शहर में डेंगू से 13 दिन में यह 13वीं मौत है। डेंगू से हो रही मौतों के बीच राज्य सरकार ने घोषणा की है प्रदेश के सभी अस्पतालों में डेंगू का मुफ्त इलाज होगा। स्मार्ट कार्ड न होने पर खर्च का भुगतान संजीवनी कोष से होगा। दुर्ग में डेंगू की जांच के लिए 404 ब्लड सैंपल लिए गए और जांच के बाद इसमें से 282 मरीज पॉजिटीव पाए गए। वहीं, भिलाई में वॉलीबॉल प्लेयर पूजा सोना (14) की भी मौत हो गई है। उसे 4 दिन से बुखार था। रोज वह जिला अस्पताल दवा लेने जाती थी। रविवार को उसकी तबीयत बिगड़ी। परिजन जब उसे सेक्टर-9 अस्पताल ले जा रहे थे, तब रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। हालांकि, पूजा का डेंगू टेस्ट नहीं हुआ था। परिजन का कहना है उसमें डेंगू के लक्षण थे। परिजन ने बताया कि छोटी बेटी कीर्ति (11) को भी बुखार है, जिसे रविवार को ही सेक्टर-9 के अस्पताल में भर्ती कराया गया।

रोकथाम के लिए बनाई गईं 35 टीमें

स्वास्थ्य आयुक्त आर प्रसन्ना ने बताया कि डेंगू प्रभावित क्षेत्र में जन जागरूकता अभियान शुरू कर दिया गया है। 35 छात्रों की टीम वार्ड-मोहल्लों में जाकर डेंगू मच्छरों की रोकथाम व बचाव की जानकारी दे रही है। 4 हजार से अधिक कूलर व पानी की टंकियां देखी गईं, 1865 को खाली कराया गया। घरों में टीम ने 1865 टेमीफाॅस लार्वा नष्ट किए। टीम दुर्ग में 36 हजार घरों का दौरा कर चुकी है।

इस साल अब तक 314 केस

स्वास्थ्य विभाग ने जानकारी दी है कि इस साल 1 जनवरी से 10 अगस्त के बीच प्रदेश में डेंगू के 314 मामलों का पता चला। इसमें रायपुर 10, दुर्ग 282, राजनांदगांव 3, बिलासपुर 9, महासमुंद-सूरजपुर-बेमेतरा में 2-2, रायगढ़-कवर्धा-कोरिया-बालोद-धमतरी में 1-1 मरीज मिले हैं।

इलाज में दिक्कत तो 104 पर शिकायत करें

प्रदेश में डेंगू का नि:शुल्क इलाज करने से कोई भी अस्पताल मना करे तो 104 नंबर डायल कर शिकायत करें।

ये होता है संजीवनी कोष

इस कोष के तहत हार्ट, किडनी, हेड इंज्युरी समेत 30 बीमारियों का इलाज होता है। इसके लिए मुंबई के लीलावती अस्पताल सहित प्रदेश के 21 सरकारी व निजी अस्पतालों के साथ एमओयू किया गया है। गरीबी रेखा से ऊपर के जरूरतमंदों को कोष के लिए सीएम से स्वीकृति लेनी होती है। सरकारी अस्पतालों में संजीवनी कोष से इलाज सुविधा मौजूद है। निजी अस्पतालों में अधिक खर्च होने पर मरीजों और उनके परिजन को अलग से कुछ पैसे देने पड़ते हैं। विशेष परिस्थितियों में सरकार नियम शिथिल कर बदलाव भी कर सकती है।

मुफ्त होगा डेंगू का इलाज, स्मार्ट कार्ड नहीं है तो संजीवनी कोष से

एक ऐसी मां जिसके 13 साल के बेटे ने दम तोड़ दिया, पति और 3 बेटे जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं, पर वो बुखार के बाद भी भर्ती नहीं हो रही, ताकि परिवार का ध्यान रख सके; उनकी आपबीती...

विनोद का टेस्ट हुआ है

पति घर-घर जाकर जूता सिलते हैं...

2 बेटे आईटीआई में, 1 पाॅलिटेक्निक में...

हम कैंप-1 के वार्ड-20 रहते हैं। मेरे पति जूता कारीगर हैं। दुकान नहीं है इसलिए घर-घर जाकर काम करते हैं। फिर भी हमने बच्चों को पढ़ाया ताकि वो बेहतर जिंदगी जी सकें। मेरे तीनों बड़े बटों में से दो अनिल और सुनील आईटीआई में, विनोद पाॅलिटेक्निक में पढ़ रहे हैं। इनमें से 1 पति के साथ बीएम शाह अस्पताल में और 2 प्रज्ञा अस्पताल में भर्ती हैं। सबसे छोटे मुकेश को 3 दिन पहले ही बुखार आया। वो पास के ही सरकारी स्कूल में कक्षा 8 में पढ़ता था। उसकी गिनती वहां होशियार बच्चों में होती थी। पति बीएम शाह अस्पताल में मुकेश को भर्ती कराकर घर लौटे ही थे कि वो खुद और 4 बेटों में से सबसे बड़ा बेटा सुनील भी डेंगू की चपेट में आ गए। परिवार में हम 6 सदस्य हैं। बेटे अनिल और विनोद स्वस्थ थे। लेकिन अब उन्हें भी तेज बुखार है, मुझे भी है। पर मैं भर्ती नहीं हो रही। मैं भी अगर भर्ती हो गई तो पति-बच्चों का ध्यान कौन रखेगा। मुकेश को 3 दिन में 20 यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाए गए। डॉक्टर बता रहे हैं उसकी प्लेटलेट्स 15 हजार से ऊपर नहीं पहुंचीं। बुखार आने के 60 से 65 घंटे के भीतर उसने दम तोड़ दिया। हमारे घर के आसपास की स्थिति देखिए... घर के ठीक पीछे सुलभ शौचालय टैंक वर्षों से धंसा हुआ है। नालियों की हालत खराब है। पड़ोसियों ने तक कई बार शिकायत की पर कोई झांकने तक नहीं आया। अब मौतें हो रही हैं तो सभी उपायों हो रहे हैं। उनसे अच्छे तो शहर के लोग हैं... जिसे प्लेटलेट्स की कमी की सूचना मिलती है वो खून देने ब्लड बैंक पहुंच जाता है।'' -जैसा बिम्मा ने भास्कर को बताया।

बिम्मा को बुखार है

रघुवीर डेंगू पीड़ित हैं

अनील का टेस्ट हुआ है

डेंगू से मौत मुकेश

सुनील डेंगू पीड़ित हैं

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