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कुआंगोंदी के 1200 किसानों ने फसल बीमा करवाया पर एक भी खाते में नहीं आई रकम

प्रधानमंत्री फसल बीमा को लेकर किसान उलझन की स्थिति में है। कुछ किसानोे के खाते में बीमा राशि आ चुकी है। लेकिन कई...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:20 AM IST

कुआंगोंदी के 1200 किसानों ने फसल बीमा करवाया पर एक भी खाते में नहीं आई रकम
प्रधानमंत्री फसल बीमा को लेकर किसान उलझन की स्थिति में है। कुछ किसानोे के खाते में बीमा राशि आ चुकी है। लेकिन कई किसानों के खातों में पैसा अब तक नहीं आया है। जिले में अनुमानित 79496 ऋणि किसान व 3902 अऋणि किसान हैं। बालोद जिले के 4 तहसील डौंडीलोहारा, डौंडी, गुंडरदेही, गुरुर को सूखा घोषित किया गया। डौंडी व डौंडीलोहारा की हालत ज्यादा खराब रही। कई किसानों की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गए थे। जिसके बाद वे सूखा राहत राशि व फसल बीमा की आस लगाए थे। लेकिन कई किसानों के खातों में अब तक पैसा नहीं आया है। किसान सहकारी बैंक की शाखाओं में पता लगाने पहुंच रहे हैं।

डौंडी व डौंडीलोहारा ब्लाॅक के किसानों को फसल बीमा की राशि अब तक नहीं मिली है। किसान सेवा सहकारी समिति का चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन समिति वाले सहीं जानकारी नहीं दे पा रहे है। अधिकारियों का कहना है कि जाे लिस्ट आई है उसी के अनुसार किसानों के खाते में पैसा डाला जा रहा है। कई गांव के किसानों के खाते में प्रधानमंत्री फसल बीमा की राशि नहीं आई है।

जिले के किसानो ंको नहीं मिला योजना का लाभ

बीमा राशि नहीं मिलने की शिकायत करने कलेक्टर के पास पहुंचे किसान।

जल्द बीमा राशि नहीं देने पर आंदोलन की चेतावनी

डौंडीलोहारा तहसील के किसान जीवनंदन पिपरिया, हेमलाल साहू, देवलाल नेताम, धरमराजा, हरिश गंजीर, भोजराज ने बताया कि किसानों की फसल का बीमा करने के बाद कंपनी बीमा राशि नहीं दे रही है। वहीं जिन किसानों के खातों में पैसा आ रहा है, वह भी बहुत कम है। एक एकड़ का 200 से 400 रुपए बीमा राशि दिया जा रहा है। अगर जल्द बीमा राशि नहीं दी गई तो किसान संगठन को साथ लेकर आंदोलन करेंगे।

इन मापदंडों पर मिलता है लाभ: फसल नुकसान होने पर किसानों को क्षतिपूर्ति देने के लिए राज्य शासन फसल कटाई प्रयोग पर आधारित वास्तविक उपज के आंकड़े बीमा कंपनी को उपलब्ध कराती है। यदि फसल की वास्तविक उपज निर्धारित उपज से कम होती है तो अधिसूचित क्षेत्र में फसल लगाने वाले सभी किसानों को बीमा का लाभ दिया जाता है। एक पटवारी हल्के में अगर औसत फसल नष्ट होती है तो लाभ दिया जाता है।

आधे किसानों के खाते में एक भी पैसा नहीं आया

डौंडीलोहारा ब्लाॅक के ग्राम महाराजपुर के किसान नाथूराम, गिरधारी, लोकनाथ, भेरीलाल, बंसीराम, नथ्थूराम ने बताया कि पटवारी हल्का नंबर 1 राजस्व निरीक्षक मंडल खेरथा के महाराजपुर के 200 से अधिक किसानों के 272.54 हेक्टेयर की फसल का बीमा कंपनी ने किया था। जिसकी प्रस्तावित राशि 13 लाख 68 हजार 548 रुपए मिलना था। लेकिन गांव के 50 से अधिक किसानों को फसल बीमा का पैसा मिला ही नहीं है।

हर साल करोड़ों रुपए किसान दे रहे प्रीमियम

वर्ष 2014-15 खरीफ सीजन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 80 हजार 201 किसानों के 1 लाख 18 हजार 581 हेक्टेयर रकबा के लिए बीमा धन 3902160121 निर्धारित किया। इसके लिए किसानों से 7 करोड़ 80 लाख 43 हजार 202.42 रुपए प्रीमियम राशि वसूला गया।

वर्ष 2015-16 के तहत रबी फसल सीजन में एक हजार 423 किसानों के 1311.52 हेक्टेयर रकबा के लिए बीमा धन 2 करोड़ 51 हजार 403.80 रुपए निर्धारित किया गया। किसानों से 3 लाख 771.7 रुपए प्रीमियम राशि वसूला गया।

वर्ष 2016-17 खरीफ सीजन के तहत 83 हजार 398 किसानों के 121602.50 हेक्टेयर रकबा के लिए बीमा धन 4096546265 निर्धारित किया गया। जिले के किसानों से 81930608.95 रुपए प्रीमियम राशि अब तक वसूल किया गया है।

कुआंगोंदी के किसानों का लिस्ट में नाम ही नहीं

आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कुआगोंदी के सभी 1200 किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बीमा कराया था। लेकिन बीमा कंपनी ने एक भी किसान को बीमा राशि नहीं दिया है। समिति के अध्यक्ष रघुबीर सिंह मरकाम ने बताया कि सोसाइटी का एरिया जंगल पहाड़ वाला होने के कारण फसल का उपज कमजोर रहता है। पिछले साल अवर्षा के कारण सूखा पड़ने पर बीज के लायक फसल नहीं हुआ। कुआगोंदी समिति के अंर्तगत आने वाले ग्राम पुसावड़, नर्रालगुड़ा, रजोलीडीह, मगरदाह, मरदेल, जबकसा, काकड़कसा, जिलेवाही, दिघवाडी गांव की फसल से खराब हुई। कुआंगोंदी सोसाइटी के किसानों को बीमा राशि नहीं दी जा रही है।

कर्ज लेने वाले किसानों का भी प्रीमियम जमा किया था

बीते खरीफ सीजन में जिले के 83 हजार 398 किसानों ने लाेन लिया था। कर्ज लेने वाले सभी किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पात्रता रखते है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ओर से प्रीमियम राशि शासन की ओर से अधिकृत कंपनी को भेजी गई थी। जिले में 704 गांव आते हैं। लेकिन बालोद तहसील को सूखा ग्रस्त घोषित नहीं किया गया। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नोडल अधिकारी आरके आलेंद्र ने बताया कि इस बार फसल बीमा योजना के तहत शासन की ओर से अधिकृत कंपनी को 8 करोड़ प्रीमियम राशि भेजी गई थी। विभागीय प्रक्रियाओं को पूरा कर योजना का लाभ संबंधित विभाग के माध्यम से बीमा कंपनी की ओर से दिया जाता है।

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