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सालभर पहले आई थी 1154 आपत्तियां, निराकरण के बाद दोबारा प्रकाशन किया तो 1206 हो गई

नए मास्टर प्लान के प्रकाशन के बाद दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के अाखिरी दिन 264 आपत्तियां मिलीं। एक माह तक चली...

Dainik Bhaskar

Aug 09, 2018, 02:30 AM IST
सालभर पहले आई थी 1154 आपत्तियां, निराकरण के बाद दोबारा प्रकाशन किया तो 1206 हो गई
नए मास्टर प्लान के प्रकाशन के बाद दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के अाखिरी दिन 264 आपत्तियां मिलीं। एक माह तक चली दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान कुल 1206 लोगों ने लिखित आपत्ति की। साल भर पहले मास्टर प्लान को लेकर 1154 लोगों ने आपत्ति की थी। इनका निराकरण करने के बाद दूसरी बार प्रकाशन करने पर आपत्तियां कम होने की बजाए और बढ़ गई।

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में बुधवार को शाम 5 बजे तक आपत्तियां लेने का काम जारी रहा। अफसरों ने बताया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अनुसार सभी आपत्तियों को अलग-अलग किया जाएगा। आपत्तियों का अध्ययन करने के बाद शासन के निर्देश पर सुनवाई की जाएगी। कलेक्टर सहित मास्टर प्लान समिति के सदस्यों की मौजूदगी में आपत्तियों का निराकरण किया जाएगा।

मास्टर प्लान में दुर्ग, भिलाई और चरोदा नगर निगम के अलावा आसपास के 99 गांव शामिल किए गए हैं। दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान सबसे ज्यादा आपत्तियां ग्रामीण इलाकों से आई हैं। ग्राम सभा का अनुमोदन किए बगैर गांव का लैंडयूज बदलने पर आपत्तियां ज्यादा हैं। चारागाह, तालाब, बांध की जमीन का लैंड यूज बदलने पर राजस्व और पंचायत एक्ट के उल्लंघन पर भी आपत्तियां की गई है।

दावे-अापत्ति के आखिरी दिन ही टाउन एंड कंट्री विभाग को मिलीं 264 आपत्तियां

6 बार रिव्यू किया, दो सौ से ज्यादा त्रुटियां सुधारी

मास्टर प्लान को तैयार करने की प्रक्रिया अक्टूबर 2014 में शुरू हुई। मैदानी सर्वे न होने और लैंड रिकॉर्ड का अध्ययन किए बगैर प्रस्ताव बनाने पर संचालनालय से 6 बार मास्टर प्लान को लौटाया गया। उच्चाधिकारियों ने हर बार मास्टर प्लान का रिव्यू कर जरूरी संशोधन करने के निर्देश दिए। अब तक 2 सौ से ज्यादा त्रुटियों को सुधारा गया है। लगातार त्रुटियों के कारण साढ़े 3 साल बाद भी इसे मंजूरी नहीं मिल पाई है।

इन आपत्तियों पर हाईकोर्ट में याचिका लगाएंगे

1. लैंड रिकॉर्ड में पाटन ब्लॉक के अम्लेश्वर में खसरा नंबर 94 की 0.94 हेक्टेयर जमीन बगीचे के लिए दर्ज है। इसे मास्टर प्लान में आवासीय घोषित किया गया है। गौठान की 0.20 हेक्टेयर जमीन को आवासीय घोषित किया गया है।

3. पंचायत एक्ट के अनुसार गांव की सरकारी जमीन का भू उपयोग यानी लैंड यूज ग्राम सभा का अनुमोदन मिलने के बाद ही बदला जा सकता है। इसके लिए नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने के बाद कलेक्टर लैंड यूज बदल सकते हैं। ग्राम सभा का अनुमोदन किए बगैर 99 गांवों का लैंडयूज बदल दिया गया। इसी तरह रेवेन्यू एक्ट का पालन न होने पर भी कोर्ट में याचिका दर्ज की जाएगी।

गहरा जमुनी रंग वाला एरिये को मास्टर प्लान में औद्योगिक क्षेत्र बनाया गया है।

2. सांकरा में करीब डेढ़ सौ एकड़ एरिया में चारागाह के लिए सुरक्षित जमीन को आवासीय घोषित कर दिया गया। यहां की 1.48 हेक्टेयर जमीन लैंड रिकॉर्ड में तालाब के रूप में दर्ज है, जिसे आवासीय घोषित किया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग के प्रस्ताव पर भी आपत्ति

खपरी और चिखली के आसपास की औद्योगिक प्रयोजन के लिए जमीन सुरक्षित करने पर आपत्ति की गई है। चिखली के सरपंच स्वरूप साहू ने कहा िक आवासीय और कृषि भूमि पर पहले से संचालित उद्योगों के कारण धूल-धुएं की समस्या है। खपरी के सरपंच दिनेश ठाकुर ने भी प्रदूषण की समस्या बताई है। दोनों गांवों के आसपास की जमीन का लैंडयूज उद्योगों के लिए करने पर आपत्ति की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करें अफसर

सुप्रीम कोर्ट ने जंगल, बांध, तालाब, पोखर, पठार को उनके मूल स्वरूप में ही रखने के आदेश दिए हैं। तालाब की जमीन पर दिए गए पट्‌टों को निरस्त करने का आदेश भी दिया जा चुका है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य निशांत शर्मा ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मास्टर प्लान में बांध और तालाब सहित चारागाह की जमीन का लैंडयूज बदल दिया है। पंचायत एक्ट और रेवेन्यू एक्ट को ताक पर रखकर मास्टर प्लान तैयार किया गया है। उनकी आपत्तियों का उचित निराकरण न होने पर वे हाईकोर्ट में याचिका लगाएंगे। मास्टर प्लान में अभी भी कई त्रुटियां हैं। इनमंे सुधार आवश्यक है।

आपत्तियां सही होने पर उनका निराकरण किया जाएगा


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सालभर पहले आई थी 1154 आपत्तियां, निराकरण के बाद दोबारा प्रकाशन किया तो 1206 हो गई
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