• Hindi News
  • Chhattisgarh
  • Bhilaidurg
  • अपनी अज्ञानता और गलती स्वीकारने वाला होता है ज्ञानी, जो सुधरने का प्रयास करे वही बनता है सफल
--Advertisement--

अपनी अज्ञानता और गलती स्वीकारने वाला होता है ज्ञानी, जो सुधरने का प्रयास करे वही बनता है सफल

पृथ्वी पर हमें अस्तित्व सहजता से प्राप्त हो गया है, लेकिन व्यक्तित्व का निर्माण हमें स्वयं को करना होगा। सत्संग,...

Dainik Bhaskar

Aug 09, 2018, 02:30 AM IST
अपनी अज्ञानता और गलती स्वीकारने वाला होता है ज्ञानी, जो सुधरने का प्रयास करे वही बनता है सफल
पृथ्वी पर हमें अस्तित्व सहजता से प्राप्त हो गया है, लेकिन व्यक्तित्व का निर्माण हमें स्वयं को करना होगा। सत्संग, ज्ञानवाणी, परोपकार, सद्भावना, सद्साहित्य का वाचन ऐसे अनेकों माध्यम है, जिसे हम आचरण में लाकर अपने व्यक्तित्व का सृजन कर सकते हैं। पृथ्वी का अलंकार मनुष्य है और मनुष्य का अलंकार संस्कार है। संस्कार विहिन व्यक्ति बिना सिंग और पूछ के पशु तुल्य है। सद्गुणों का महत्व समझने के लिए हमें ज्ञानार्जन करना जरूरी है। बिना ज्ञान के क्रिया और भाव भी पूर्ण नहीं बनता। ज्ञान होने पर ही अहिंसा का पालन संभव है। यह विचार उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ नगपुरा में चातुर्मास व्याख्यानमाला के दौरान साध्वी लक्ष्यय यशा मसा व्यक्त किए।

प्रवचन श्रृंखला में साध्वी लब्धि यशा ने कहा कि अपनी अज्ञानता, गलती को स्वीकारने में ही सुख है। इनकार की प्रवृत्ति दुख का कारण बनता है। स्वीकारने की प्रवृत्ति सुधरने की भावना जागृत करता है और जो सुधरने का प्रयास करेगा, वहीं विकास के मार्ग पर आगे बढ़ता है। दुनिया को मूर्ख बनाकर बच निकलना संभव है, लेकिन अपने आप को जो मूर्ख बनाता है वह अपना ही नुकसान करता है। हम अपनी वक्रता के कारण अपने अज्ञान को स्वीकार नहीं करते। जो सरल होता है वह अपने को अज्ञानी मानने में संकोच नहीं करता। अपने आपको अज्ञानी मानने पर ही ज्ञानी बनने का पुरुषार्थ संभव होगा। जैसे तल छिद्रयुक्त बर्तन में पानी ठहर नहीं सकता वैसे ही अशुद्ध हृदय में धर्म नहीं टिकता।

प्रवचन सुनने मुंबई और अहमदाबाद से भी भक्त पहुंचे

पार्श्व तीर्थ नगपुरा में देशभर से पहुंचे आराधकाें के अलावा समाज के लोग भी रोजाना प्रवचन सुन रहे।

साधना से राग, माेह का होता है क्षय: मणिप्रभा

दुर्ग|कर्म बंधन की शृंखला सूक्ष्म रूप में हरभव में हमारी आत्मा के साथ जाती है। संसार में जीव का जड़ और चेतन दोनों से कर्मबंध होता है। जड़ जगत से राग, द्वेष अधिक रहता है। जड़ के निमित्त से आत्मा का उत्थान और पतन दोनों होते है। यह बातें विचक्षण सत्संग सभा में साध्वी मणिप्रभा मसा ने कहीं। उन्होंने कहा कि कर्मबंध का भुगतान जन्म के साथ ही शुरु हो जाता है। श्रोताओं को साधना के लिए प्रेरित करते हुए मसा ने कहा कि उत्कृष्ट साधना में राग का, मोह का क्षय होता है। अच्छे कार्यों से अशुभ कर्मों की निर्जरा होती है। साथ ही शुभ कर्म बंध भी संग्रह होता है। अच्छे कर्मों से कल की अभिलाषा न रखने वालों को उसका शुभ परिणाम ज्यादा से ज्यादा बिना मांगे मिलता है। उन्होंने कहा कि मांगने से भाव जगत में बदलाव आ जाता है। सभा में बताया गया कि चतुदर्शी 10 अगस्त को आयंबिल तप का आयोजन किया गया है।

दादाबाड़ी दुर्ग में प्रवचन देती साध्वी मणिप्रभा।

शाकाहारी भोजन करने से मन होता है शांत, सद् विचार आते हैं: डॉ. चंद्रप्रभा

जामगांव आर में डाॅ. चंद्रप्रभा मसा व जिनप्रभा को सुनने महिलाएं भी पहुंच रहीं।

जामगांव आर|भखारा में चल रहे चातुर्मास प्रवचन में जैन साध्वी डॉ. चंद्रप्रभा श्रीजी ने कहा कि आग में तपाने पर सोने में चमक आती है और चमकते सोने के आभूषण से मानव अपना शृंगार करके सुंदर दिखने का हर संभव प्रयास करते हैं।

ठीक इसी प्रकार मानव तप, त्याग करके अपने मन में आने वाले विकृतियों को दूर करे तो वह सुंदर से सुंदरतम लगेगा। मानव जीवन सार्थक बन जाएगा। जैन साध्वी ने कहा कि मानव को अपनी आहार पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आहार के अनुरूप मन काम करने लगता है। स्वास्थ्य पर भी असर होता है। शाकाहारी आहार पाचन में अनुकूल होती है। नशापान करने वालों के व्यवहार से मानव समाज परिचित है। समाज का सभ्रांत वर्ग इनके रवैये से दुखी रहते हैं। मन पर कुप्रभाव डालने वाला कोई आहार न करें।

गर्भस्थ अवस्था में भोजन व भजन महत्वपूर्ण होता है

साध्वी ने कहा कि जब मां के गर्भ में शिशु आता तब मां के सभी क्रियाकलापों का असर उस पर पड़ता है। भोजन और भजन का प्रभावी असर होता है। गर्भ में अभिमन्यु ने युद्ध कला सुनकर सीख ली। माँ को नींद आ गई, इसलिए वह चक्रव्यूह से बाहर निकलने की कला नहीं सीख पाया। इससे सीख लेना चाहिए कि गर्भस्थ अवस्था में मां अपने बच्चे के सुंदर भविष्य के लिए भक्ति भजन, विचारों के साथ बच्चे को दुनिया में लाएं।

अपनी अज्ञानता और गलती स्वीकारने वाला होता है ज्ञानी, जो सुधरने का प्रयास करे वही बनता है सफल
अपनी अज्ञानता और गलती स्वीकारने वाला होता है ज्ञानी, जो सुधरने का प्रयास करे वही बनता है सफल
X
अपनी अज्ञानता और गलती स्वीकारने वाला होता है ज्ञानी, जो सुधरने का प्रयास करे वही बनता है सफल
अपनी अज्ञानता और गलती स्वीकारने वाला होता है ज्ञानी, जो सुधरने का प्रयास करे वही बनता है सफल
अपनी अज्ञानता और गलती स्वीकारने वाला होता है ज्ञानी, जो सुधरने का प्रयास करे वही बनता है सफल
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..