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अवैध निर्माण को वैध करने राज्य में एक ही शुल्क, रिमांडर जारी

निकाय में जमीन भले ही आपकी हो, पर उसमें निर्माण की अनुमति जरूरी है। बिना अनुमति किया गया निर्माण अवैध माना गया है।...

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 02:35 AM IST
निकाय में जमीन भले ही आपकी हो, पर उसमें निर्माण की अनुमति जरूरी है। बिना अनुमति किया गया निर्माण अवैध माना गया है। अब ऐसे मामलों के नियमितीकरण को लेकर शासन ने नई गाइड लाईन जारी की है। आप समझौता शुल्क जमा कर अपने अवैध निर्माण को वैध करा सकते हैं। क्षेत्रफल के हिसाब से दरें तय कर दी गई हैं। 100 वर्गमीटर तक अनुज्ञा शुल्क का 15 गुना समझौता शुल्क लेकर ऐसे निर्माण को निकाय वैध कर सकेगा। कॉलोनाइजर्स के मामले में विकास अनुमति की दरों में भी परिवर्तन किया गया है। अब तक जहां 1 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 25 सौ रुपए विकास अनुमति लगती थी।

एक नजर में समझे पूरी स्थिति को...

अभी क्या स्थिति: फिलहाल नियमि तीकरण के मामले में समझौता शुल्क की दरें तय हैं। भू विकास अधिनियम के तहत तय अनुज्ञा शुल्क 825 से 3700 रुपए के हिसाब से समझौता शुल्क वसूली की जाती है। इसके लिए विकास अनुमति के मामले में दर अधिकतम 25 सौ रुपए रही। इसके हिसाब से ही वसूली की जा रही।

अब ये होगा: शासन द्वारा 26 अप्रैल 2018 को एक आदेश जारी किया गया है। इसमें समझौता शुल्क के लिए नए स्लैब तय कर दिए गए हैं। इसके अलावा विकास अनुमति शुल्क बढ़ाकर 3750 रुपए कर दिया गया है। इसके भी स्लैब तय किए गए हैं। इसके हिसाब से ही अनुमति जारी होगी।

अब प्रदेश के सभी निकायों में यही शुल्क रहेगा लागू

अवैध निर्माण का क्षेत्रफल देय शुल्क

100 वर्गमीटर अनुज्ञा का 15 गुना

101 से 200 वमी से कम 20 गुना

201 से 300 वमी 25 गुना

301 से 400 वमी 30 गुना

401 से 500 वमी 35 गुना

501 से 600 वमी 40 गुना

601 से 700 वमी 45 गुना

701 से अधिक 50 गुना


कॉम्प्लेक्स मामले में विकास शुल्क भी तय

क्षेत्रफल शुल्क

1 हेक्टेयर 3750

1 से 2.5 हे. कम 7500

2.5 से 5 हे. कम 15,000

5 हे. से अधिक पर 3750

राजपत्र में भी जारी हुआ

सरकार ने इस आदेश के संबंध में राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशन कर दिया है। वहीं शासन ने सभी निकायों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए निर्देश दिए हैं।

दुर्ग में 66 हजार मकान, 25 फीसदी अवैध

शहर में इस समय 66 हजार पंजीकृत मकान है। इनमें 25 फीसदी में अवैध निर्माण कर रखा है। इस निर्माण तक की जानकारी निगम को नहीं है। इसे देखते हुए निगम ने तय किया है कि अब सभी मकानों का सर्वे किया जाए। पूर्व में जारी बिल्डिंग परमिशन व अन्य दस्तावेजों का परीक्षण कर अतिरिक्त निर्माण की जानकारी जुटाई जाए। इसके आधार पर नोटिस भेजकर संबंधित से समझौता शुल्क लिया जाए। संपत्तिधारक चाहे तो वह स्वयं भी नियमितीकरण को लेकर आवेदन कर सकता है।

सभी जगह एक जैसा होगा समझौता व विकास शुल्क


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