• Hindi News
  • Chhattisgarh
  • Bhilaidurg
  • निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए 80 हजार सीटें लेकिन इस बार 46 हजार पर नहीं हो पाया दाखिला
--Advertisement--

निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए 80 हजार सीटें लेकिन इस बार 46 हजार पर नहीं हो पाया दाखिला

निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए आरक्षित 80 हजार सीटों में से इस बार करीब 34 हजार में ही छात्रों को एडमिशन मिल पाया...

Dainik Bhaskar

Aug 10, 2018, 02:35 AM IST
निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए 80 हजार सीटें 
 लेकिन इस बार 46 हजार पर नहीं हो पाया दाखिला
निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए आरक्षित 80 हजार सीटों में से इस बार करीब 34 हजार में ही छात्रों को एडमिशन मिल पाया है। पहली बार है कि 46 हजार सीटें खाली रह गई। रायपुर में सबसे ज्यादा 5103 बच्चों को प्रवेश मिला, फिर भी तीन हजार सीट रिक्त रही। इसके बाद रायगढ़ दूसरे स्थान पर रहा, जहां 3051 बच्चों को निजी स्कूलों में जगह मिली। बिलासपुर जिले में 3026 बच्चों को एडमिशन मिला। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत इस सत्र में दाखिले की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब इन बचे सीटों पर शिक्षा विभाग से प्रवेश नहीं दिलाया जाएगा। यह सीटें निजी स्कूलों को दी गई है। वे अपनी मर्जी से इसे भर पाएंगे।

अफसरों का कहना है कि जिन बच्चों का एडमिशन हुआ है, उनकी पूरी जानकारी स्कूलों से मांगी गई है। शिक्षा विभाग से इनकी मॉनिटरिंग की जाएगी। आरटीई में अधिक से अधिक सीटों पर प्रवेश के लिए इस बार ऑनलाइन का फार्मूला अपनाया गया। पूरे राज्य में इसी सिस्टम से ही आवेदन मंगाए गए। इसके बाद लॉटरी और जहां आवेदन कम मिले, वहां सीधे सीटें बांटी गई। शुरुआत में 80 हजार सीटों के लिए करीब 77 हजार आवेदन आए। आवेदन ज्यादा होने बाद भी सिर्फ 20,000 बच्चों को ही प्रवेश मिल पाया। शेष सीटें खाली रह गई। शिक्षा विभाग से जब इस मामले की छानबीन की गई तो पता चला कि ऑनलाइन आवेदन में करीब 60 हजार आवेदन ऐसे थे, जिसमें विकल्प के तौर पर सिर्फ एक स्कूल का चयन किया गया। जबकि वे एक से लेकर चार तक ऑप्शन दे सकते थे। सिर्फ एक ऑप्शन की वजह से ज्यादातर बच्चों को सीटें नहीं मिली। इसके अलावा कई बच्चों के आवेदन अधूरे थे। इसे लेकर दोबारा आवेदन मंगाए गए। इसके आधार पर फिर बच्चों को सीटें बांटी गई। आखिरी में करीब 34 हजार सीटों पर ही बच्चाें का प्रवेश हुआ। आधी से ज्यादा सीटें खाली रह गई। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी एएन बंजारा का कहना है कि इस बार नर्सरी, केजी-1 और कक्षा पहली में बच्चों की उम्र के अनुसार प्रवेश दिया गया। दाखिले की यह प्रक्रिया खत्म हो गई है।

रायपुर में सबसे ज्यादा 5103 बच्चों को मिला एडमिशन, फिर भी तीन हजार सीेटें खाली

इस सत्र में अब आरटीई से नहीं होगा प्रवेश, सीटें निजी स्कूलों को वापस

आरटीई में अंग्रेजी स्कूलों में दाखिले की मांग ज्यादा रही।

निजी स्कूलों में पढ़ रहे गरीब बच्चों पर नजर

साल 2010 से आरटीई के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों का प्रवेश हो रहा है। इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। इन बच्चों का प्रदर्शन कैसा है? यह पढ़ रहे हैं या नहीं? स्कूल छोड़ चुके हैं या हैं? इन सब पर शिक्षा विभाग की नजर है। अफसरों का कहना है कि नोडल अफसरों से दाखिल हुए बच्चों के बारे में जानकारी ली जाएगी। कितने बच्चे स्कूल में हैं? कितने छोड़ चुके हैं। इसके अलावा इन बच्चों के प्रदर्शन को लेकर भी संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों से भी बात की जाएगी।

यूनिफॉर्म और किताबों के लिए मिलेंगे पैसे

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में आरटीई से निजी स्कूलों पहुंचने वाले बच्चों की सिर्फ फीस ही माफ नहीं है, बल्कि उन्हें स्कूली यूनिफॉर्म व किताबों के लिए भी पैसे दिए जाते हैं। बावजूद इसके आरटीई के तहत स्कूलों में दाखिले कम हो रहे हैं। नियमानुसार किताबों के लिए 250 और ड्रेस के लिए 400 रुपए देने का प्रावधान है। इस बार जिन बच्चों का निजी स्कूलों में प्रवेश हुआ है उन्हें ड्रेस और किताबों के लिए जल्द पैसे दे दिए जाएंगे।

मई में राहुल गांधी के रायपुर आने के दौरान छात्र शिरीष ने उनसे मिलकर दाखिले की मांग की थी।

हिंदी मीडियम स्कूलों में एडमिशन कम हुए

रायपुर के निजी स्कूलों में आरटीई की करीब आठ हजार सीटें आरक्षित की गई। इसके लिए 12614 आवेदन मिले। इसके आधार पर लॉटरी व अन्य माध्यमों से बच्चों को सीटें मिली और प्रवेश हुआ। इस बार भी इंग्लिश मीडियम को लेकर लोगों में ज्यादा रुचि दिखाई दी। इसकी तुलना में इस बार हिंदी मीडियम स्कूलों के प्रति दिलचस्पी कम रही। रायपुर शहर में करीब 25 ऐसे हिंदी मीडियम वाले प्राइवेट स्कूल हैं, जिन्होंने आरटीई में सीटें दी। लेकिन इन स्कूलों के लिए एक भी आवेदन नहीं आए।

आरटीई में इतने बच्चों को मिला प्रवेश

जिला आवेदन दाखिला

रायपुर 12614 5103

दुर्ग 6892 2454

बिलासपुर 5991 3026

रायगढ़ 5849 3051

जांजगीर-चांपा 5290 1134

कोरबा 4707 1297

राजनांदगांव 4567 1501

दंतेवाड़ा 104 20

नारायणपुर 95 41

बीजापुर 150 113

आरटीई में दाखिले के बाद निकाल दिया, राहुल गांधी से मिलने के बाद भी राहत नहीं

दो साल पहले आरटीई सीट में शिरीष पाठक का एडमिशन राजकुमार कॉलेज में पहली कक्षा में हुआ था। लेकिन दूसरी क्लास में जाने के दौरान उसे स्कूल से निकालते हुए परीक्षा नहीं देनी दी गई। उनका कहना था कि शासन की तरफ से बच्चे की फीस प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं दिया गया है। दो साल से उसे एडमिशन देने के नाम पर वेटिंग लिस्ट रखा गया है। अब बच्चे का एडमिशन न होने से उसकी आगे की पढ़ाई भी नहीं हो पा रही है। मई में जब राहुल गांधी रायपुर आए तो अपने पिता प्रभास पाठक के साथ उनसे मुलाकात कर स्कूल में एडमिशन कराने की मांग की। उनसे आश्वासन तो मिला लेकिन अब तक स्कूल में दाखिला नहीं।

निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए 80 हजार सीटें 
 लेकिन इस बार 46 हजार पर नहीं हो पाया दाखिला
X
निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए 80 हजार सीटें 
 लेकिन इस बार 46 हजार पर नहीं हो पाया दाखिला
निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए 80 हजार सीटें 
 लेकिन इस बार 46 हजार पर नहीं हो पाया दाखिला
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..