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चार महीने में खामियों के टाटीबंध चौक पर हुईं चार मौतें कोर्ट ने सुधार को कहा लेकिन नहीं दूर कर पाए समस्या

राजधानी के खामियों वाले टाटीबंध चौक में लगातार हादसे होने के बाद भी उसकी डिजाइन को लेकर अब तक कोई बदलाव नहीं किया...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 08, 2018, 02:36 AM IST

चार महीने में खामियों के टाटीबंध चौक पर हुईं चार मौतें 
कोर्ट ने सुधार को कहा लेकिन नहीं दूर कर पाए समस्या
राजधानी के खामियों वाले टाटीबंध चौक में लगातार हादसे होने के बाद भी उसकी डिजाइन को लेकर अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है। अप्रैल से लेकर अब तक यहां हुए एक्सीडेंट में दो महिलाओं के साथ चार लोगों की मौत हो चुकी है। बार-बार हो रहे हादसे के बाद कोर्ट ने सरकारी एजेंसियों को सर्वे कर इसकी खामियों को जल्द सुधारने के निर्देश दिए थे। लेकिन इसके बाद सर्वे तो किया गया लेकिन इसमें सुधार नहीं हुआ। अब बारिश में सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे रोजाना लोगों को दिक्कत हो रही हैं।

टाटीबंध चौक को खामियों का चौक इसलिए कहा जा रहा है कि इसकी डिजाइन को लेकर ट्रैफिक एक्सपर्ट भी कई कमियां बता चुके हैं। इससे यहां लगातार हादसे हो रहे हैं। भूलभुलैया चौराहे के तौर पर इसे डिजाइन किया गया है, जिससे अलग-अलग रूट से आने वाले लोगों को काफी दिक्कत है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस को सर्वे करके चौक की खामियां दूर करने के निर्देश दिए।

इसमें रोड इंजीनियरिंग के एक्सपर्ट की मदद लेने की सलाह भी दी गई थी, लेकिन चौक की डिजाइन में सुधार करना तो दूर गड्ढे भी नहीं भरे गए हैं। इन जिम्मेदार एजेंसियों के अफसरों का कहना है कि हादसों के बाद चौक में जो स्पीड ब्रेकर बनाए गए थे, उसे तोड़ दिया गया है। उन स्पॉट पर सीमेंट भर दिया गया है। वहां पर सफेद पट्टी बनाई गई है। इसके साथ ही दावा तो यह है कि हादसों को रोकने के लिए चौक पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती रहती है।

बारिश में सड़क पर हुए बड़े गड्ढे जिनसे लगातार हो रहे हैं हादसे

चौक में गड्‌ढे से बने तीन डेंजर प्वाइंट

टाटीबंध से रायपुरा रोड पर दो बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जो इस कदर खतरनाक हैं कि जिसमें अक्सर बाइक सवार हादसे का शिकार हो जाते हैं। इस तरह टाटीबंध चौक से भनपुरी की तरफ जाने वाले रोड के मोड़ पर भी बड़ा गड्‌ढा है। जिसमें बाइक के साथ बड़ी गाड़ियां फंसती हैं। वाहनों को निकालने के लिए क्रेन बुलाना पड़ता है। बारिश व अंधेरे के दौरान वहां गड्ढा नहीं दिखाई देता है। जबकि चौड़ीकरण से हादसा रोकने का दावा किया जाता रहा है।

पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस को सर्वे कर डिजाइन सुधारना था

तेलीबांधा-रायपुरा दिशा से आ रहे वाहनों को चौक के पास हटाए गए ब्रेकर से हुए गड्‌ढे के कारण हादसे की आशंका रहती है।

कोर्ट का निर्देश था कि खामियां बता सुधारें

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के चेयरमैन तथा तत्कालीन डीजे ने टाटीबंध चौक पर अप्रैल में हुए हादसे में एक महिला की मौत हो गई, इसे संज्ञान में लिया था। उन्होंने जिम्मेदारों को चर्चा के लिए बुलाया था। उनसे हादसों को रोकने के लिए सुझाव मांगे। इन एजेंसियों को 7 दिन का समय देते हुए एक्सपर्ट के साथ चौक का सर्वे कर उसकी खामियों की पहचान कर उसे दूर करना था। इस रिपोर्ट के आधार पर ही चौक की डिजाइन सुधारी जानी थी।

जीई रोड की ओर से आ रही गाड़ियों को चौराहे के पास इस तरह सड़क पर निकले पत्थरों से रोजाना गुजरना पड़ता है।

एजेंसियों की सहमति से बनेगा

पीडब्ल्यूडी के साथ ही अन्य एजेंसियों की सहमति के बाद ही टाटीबंध चौक पर काम किया जा सकता है। एनएचआई अपने स्तर पर जरुरी सुधार कर रहा है। - बीएल मीणा, क्षेत्रिय अधिकारी एनएचएआई

जिम्मेदारों का ये कहना है

चौक पर सुधार किया जा रहा

टाटीबंध चौक पर बनाए गए ब्रेकर को तोड़ दिया गया है। सुरक्षा के लिए वहां पर ट्रैफिक पुलिस तैनात हैं। जिम्मेदार एजेंसियां काम कर रही हैं। - बलराम हिरवानी, एएसपी ट्रैफिक

दुर्ग से शहर की तरफ आने वाले वाहनों को चौक के इस गड्‌ढे के कारण हादसे का शिकार होना पड़ रहा है।

प्रस्ताव केंद्र को भेजा है

चौराहे की डिजाइन ठीक करने का प्रस्ताव केंद्रीय परिवहन मंत्री को भी दिया गया है। नेशनल हाईवे के अफसरों को सुधारने की जिम्मेदारी दी है। ओपी चौधरी, कलेक्टर

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