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राग-द्वेष से मन में अहंकार व बदले की भावना आती है, इन बुराइयों को त्यागें तो हर जगह मिलेगा सम्मान

पानी का कोई रंग नहीं होता, उसे जिस पात्र में रखा जाए उसके अनुसार रंग दिखाई देता है। ऐसे ही जीवन का कोई निश्चित फल...

Dainik Bhaskar

Aug 08, 2018, 02:36 AM IST
पानी का कोई रंग नहीं होता, उसे जिस पात्र में रखा जाए उसके अनुसार रंग दिखाई देता है। ऐसे ही जीवन का कोई निश्चित फल नहीं होता, जीने का तरीका जैसा होगा वैसा ही जीवन का रंग दिखाई देगा। जीवन को शांति से चखने पर मिठास और उग्रता व्याग्रता से चखने पर कड़वाहट का अनुभव होगा। मन अमूल्य निधि है। इससे मुक्ति को प्राप्त की जा सकती है। हमारे मन में उत्पन्न विचार ही आत्मा के उत्थान और पतन का कारण बनते हैं। यह विचार पार्श्व तीर्थ में व्याख्यानमाला में साध्वी लक्ष्ययशा मसा ने रखे।

प्रवचन श्रृंखला में साध्वी लब्धि यशा ने कहा कि वीत राग अर्थात राग और द्वेष से परे। दुनिया में जितने भी संघर्ष और संताप होते हैं, उसका मूल है राग और द्वेष। ममत्व की भावना हमें स्वार्थी बना देती है। राग के कारण हमारी विचारधारा मैं और ‘मेरा’ इन दो शब्दों से आगे बढ़ नहीं पाती। राग के कारण व्यक्ति अंधा हो जाता है। जबकि द्वेष व्यक्ति को शांति से जीने नहीं देती। राग खुद की सुरक्षा की चिंता में लगा रहता है। द्वेष दूसरों के संहार के षडयंत्र हमेशा बनाता रहता है। जो इन दुर्गुणों से दूर होता है वह जगत पूज्य बन जाता है। हर जगह आपका सम्मान होगा।

नगपुरा में पहुंचे देशभर के आराधक रोजाना तप क्रिया कर रहे

पार्श्व तीर्थ में साध्वी लक्ष्य यशा और लब्धियशा का प्रवचन सुनने बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुुंच रहीं।

जिनमें संकल्प शक्ति नहीं, वे मन के गुलाम: मणिप्रभा

दुर्ग|शरीर में सभी क्रियाएं आत्मा के रहने तक ही संभव है। सही उम्र में जिन्हें समझ आया वे धन्य हैं। उम्र निकल जाने पर आई समझ मन में शूल सी चुभती है। यह विचार मंगलवार को विचक्षण सत्संग सभा साध्वी मणिप्रभा मसा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि शरीर में आत्मा के बिना कोई भी क्रिया संभव नहीं है। आत्मा से शरीर की महत्ता है। मनुष्य जीवन में आत्म चिंतन करें, आत्मा को समझें और जानें तो जीवन सफल हो पाएगा। साध्वी ने कहा कि स्वाद हमारी भोग रूचि को बढ़ाता है। यह तृष्णा है जो कभी समाप्त नहीं होती। एकाग्रता से किया गया सत्संग श्रवण अनंत जीवन में सम्यक ज्ञान का उजाला भर देता है। मसा ने कहा कि जिनमें संकल्प शक्ति का गुण नहीं होता वे मन के गुलाम होते हैं।

प्रवचन सुनने देशभर से पहुंच रहे हैं श्रद्धालु।

जीवनशैली में सुधार लाने के लिए साहित्यों से करें मित्रता: चंद्रपभा

भाखारा में मेवाड़ प्रवर्तक रूपचंद मसा के स्वास्थ्य लाभ के लिए महामंत्र नवकार का सामूहिक पाठ किया गया।

जामगांव आर|भखारा के चातुर्मास प्रवचन में डॉ. चंद्रप्रभा मसा ने कहा कि जीवनशैली में सतत सुधार लाने के लिए सद साहित्यों से मित्रता करें, स्वाध्याय करें। स्वाध्याय की आदत बनने के बाद जब आगम को जानने के लिए मन चल पड़ेगा तब जिंदगी संवर जाएगी। सार्थक जीवन के लिए आगम अनमोल खजाना है। स्वाध्याय के डगर में सतत चलने वाले लोग इस खजाना का भरपूर आनंद लेते हैं। स्वाध्याय के सहारे मनुष्य नश्वर संसार और निर्वाण के तमाम रहस्यों को जान पाता है। जिसके बाद आनंद ही आनंद का मार्ग परमानंद की ओर ले जाता है। डॉ. चंद्रप्रभा ने कहा कि संत, महापुरुषों के देश भारत में आगम का, महापुरुषों द्वारा लिखित ग्रंथों का जब कोई स्वाध्याय करते हैं, तब दिव्य किरण मनः मस्तिष्क को प्रकाशित कर रही है।

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