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ऋषि कपूर और अनिल कपूर : मित्र और प्रतिद्वंद्वी

ऋषि कपूर और अनिल कपूर चरित्र भूमिकाओं में चमक रहे हैं। दोनों ही मिट्‌टी पकड़ पहलवान हैं गोयाकि पटखनी खाते हैं परंतु...

Dainik Bhaskar

Aug 07, 2018, 02:36 AM IST
ऋषि कपूर और अनिल कपूर : मित्र और प्रतिद्वंद्वी
ऋषि कपूर और अनिल कपूर चरित्र भूमिकाओं में चमक रहे हैं। दोनों ही मिट्‌टी पकड़ पहलवान हैं गोयाकि पटखनी खाते हैं परंतु चित नहीं होते और उनका दंगल जारी है। ऋषि कपूर ‘खुल्लम खुल्ला’ नामक जीवन-कथा लिख चुके हैं। अपने बचपन और लड़कपन में दोनों पड़ोसी और प्रतिद्वंद्वी भी रहे हैं। अनिल कपूर के पिता सुरेन्द्र कपूर पृथ्वीराज के मित्र रहे हैं और उनकी सिफारिश पर ही के. आसिफ ने उन्हें मुगल-ए-आजम में सहायक निर्देशक का काम दिलवाया था। दोनों ही परिवार चेम्बूर में रहते थे। उसी दौर में सुरेन्द्र कपूर गीता बाली का कामकाज भी देखने लगे। गीता बाली ने ही उन्हें निर्माता बनने की प्रेरणा दी और सहायता भी की। उन्होंने दारा सिंह के सात ‘टारजन गोज़ टू डेल्ही’ बनाई, जिसे आंशिक सफलता मिली। राज कपूर के ज्येष्ठ पुत्र के साथ ‘पोंगा पंडित’ बनाई और छोटे पुत्र ऋषि कपूर के साथ बनाई ‘फूल खिले हैं गुलशन गुलशन’ जिसके निर्देशक की मृत्यु हो गई और दूसरे निर्देशक के साथ फिल्म पूरी करने में लंबा वक्त लगा, जिस कारण घाटा हुआ। सुरेन्द्र के ज्येष्ठ पुत्र बोनी कपूर ने ‘हम पांच’ बनाई। इसके मुनाफे से कुछ कर्ज चुक गया।

सलीम-जावेद की सफल पारी एक गलतफहमी और एक सितारे की साजिश से टूट गई। उस समय उनके पास ‘मि. इंडिया’ और ‘दुर्गा’ नामक दो पटकथाएं लगभग पूरी लिखी जा चुकी थी। सलीम साहब ने जावेद अख्तर से कहा कि वे दोनों में से एक चुन लें। इस तरह ‘मि. इंडिया’ जावेद अख्तर को मिली और ‘दुर्गा’ सलीम साहब ने रखी परंतु अलगाव से आहत सलीम साहब ने न ‘दुर्गा’ पूरी की और न फिल्म बनाई। ‘हम पांच’ के दरमियान बोनी कपूर की शबाना आजमी से मित्रता हो गई थी और इसी मित्रता ने ‘मि. इंडिया’ का पथ प्रशस्थ किया। अनिल कपूर ने एमएस सथ्यू की फिल्म ‘कहां कहां से गुजर गया’ अभिनीत की। एक दौर में राज कपूर ‘परमवीर चक्र’ बनाना चाहते थे। सोचा लोकेशन खोजते हैं और उसी प्रक्रिया में कथा भी बना लेंगे। वे कश्मीर गए जहां फौज ने युवा मेजर अशोक कौल को उन्हें जगह-जगह ले जाने का जिम्मा सौंपा। कौल ने फिल्मकार बनने की महत्वाकांक्षा पाल ली। उन्होंने ‘परमवीर चक्र’ बनाई परंतु वह राज कपूर की कथा नहीं थी वरन कुछ और चरबा था। तब राज कपूर ने कुछ संकेत दिए थे कि वे अनिल कपूर को अपनी तीन नायकों वाली फिल्म में ले सकते हैं। अनिल कपूर ने खड़कवासला जाकर प्रशिक्षण भी लिया। उनका यह जोश कायम है।

ऋषि कपूर की ‘मुल्क’ में उनकी और तापसी पन्नू की प्रशंसा हो रही है। ऋषि कपूर की दूसरी पारी ‘दो दुनी चार’ से प्रारंभ हुई और उन्होंने दोबारा बनाई गई अग्निपथ में कसाई की भूमिका बड़ी विश्वसनीयता से निभाई। हाल ही में वे ‘राजमा-चावल’ की शूटिंग पूरी कर चुके हैं। ऋषि कपूर ने ‘अा अब लौट चलें’ नामक फिल्म भी निर्देशित की है। ऋषि कपूर के सुपुत्र रणवीर कपूर की ‘संजू’ अत्यंत सफल रही है। अनिल कपूर के सुपुत्र हर्षवर्धन की ‘मिर्जिया’ घोर असफल रही परंतु उनकी बेटी सोनम कपूर ने कुछ फिल्मों में बढ़िया काम किया है। ऋषि कपूर की बेटी दिल्ली में ब्याही है और सुखद दाम्पत्य के सुख में आकंठ डूबी हैं। अनिल कपूर बहुत अनुशासित हैं और फिटनेस के प्रति जागरूक भी हैं। ऋषि कपूर को खाने-पीने का शौक है। पृथ्वीराज के वंशजों को बाहरी शत्रु से भय नहीं लगता परंतु उनका भोजन प्रेम कभी कम नहीं हो सकता। उनका भोजन प्रेम विविध भोजन चखने तक सीमित है। यह संभव है कोई पटकथा दोनों को एक फिल्म में साथ ला खड़ा करे। नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी प्रतिभावान हैं। ये सभी चरित्र भूमिकाएं अभिनीत करने वालों का जमावड़ा एक फिल्म हो तो वह अत्यंत रोचक हो सकती है। शिखर सितारे सभी निर्माताओं को उपलब्ध नहीं। इसलिए चरित्र कलाकारों को जमावड़ा भी बॉक्स ऑफिस पर आर्थिक रूप से सुरक्षित माना जा सकता है। इसी तरह रजनीकांत और कमल हासन एक फिल्म में आ जाए तो धन की बरसात हो सकती है।

जयप्रकाश चौकसे

फिल्म समीक्षक

jpchoukse@dbcorp.in

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