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कॉलेजों में क्लास बंक हावी, पढ़ाई का माहौल नहीं इसलिए ग्रेजुएशन के नतीजे खराब

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 02:40 AM IST

Durg Bhilai News - बीए, बीकॉम, बीएससी समेत अन्य ग्रेजुएशन की पढ़ाई को लेकर विद्यार्थियों की दिलचस्पी कम हुई है। खासकर प्रथम वर्ष के...

कॉलेजों में क्लास बंक हावी, पढ़ाई का माहौल नहीं इसलिए ग्रेजुएशन के नतीजे खराब
बीए, बीकॉम, बीएससी समेत अन्य ग्रेजुएशन की पढ़ाई को लेकर विद्यार्थियों की दिलचस्पी कम हुई है। खासकर प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों में। बारहवीं के बाद वे दाखिला तो ले लेते हैं, लेकिन क्लास से गायब रहते हैं। इनकी उपस्थिति कम रहती है। कॉलेजों में शिक्षकों की कमी से भी पढ़ाई का माहौल नहीं बनता। इस तरह के कई अन्य कारण हैं, जिसकी वजह से उच्च शिक्षा से जुड़े विश्वविद्यालय व उसके संबद्ध कॉलेजों में ग्रेजुएशन के नतीजे खराब आ रहे हैं। रविवि, बिलासपुर व दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलपति से तैयार की गई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।

सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट यह भी कहती है कि कई कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है, इसके बाद भी वहां अधिक संख्या में विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है। इसका असर भी रिजल्ट पर पड़ रहा है। पिछले कुछ बरसों से प्रथम वर्ष में बीए, बीकॉम, बीएससी, बीसीए का रिजल्ट 30 से लेकर 35 फीसदी तक रहा है। इसके अलावा पीजी के नतीजे भी खराब हरे। कमजोर नतीजों को लेकर शासन व विश्वविद्यालय दोनों चिंतित थे। आखिरी किन वजहों से रिजल्ट कमजोर आ रहा है? इसे लेकर बीते साल उच्च शिक्षा विभाग ने रविवि, बिलासपुर और दुर्ग विवि के कुलपतियों की कमेटी बनाई। इस कमेटी में बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.जीडी.शर्मा, रविवि के तात्कालिक कुलपति डॉ.एसके.पांडेय और दुर्ग विवि के तात्कालिक कुलपति डॉ.एनपी.दीक्षित की कमेटी बनाई। सूत्रों के मुताबिक करीब तीन-चार बैठकों के बाद इन्होंने रिपोर्ट तैयार की। कुछ महीने पहले इसे उच्च शिक्षा विभाग को सौंपा गया। इसके अनुसार उच्च शिक्षा विभाग नए शिक्षा सत्र में नए निर्देश जारी कर सकता है।

एक जैसी फीस की सिफारिश

कुलपतियों की रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि राज्य के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में संचालित एक जैसे कोर्स के लिए एक तरह का फीस हो। फीस विनियामक आयोग के माध्यम इसका निर्धारण किया जाना चाहिए। वर्तमान समय में राज्य के विश्वविद्यालय व कॉलेजों में संचालित कई कोर्स ऐसे हैं जिसका फीस अलग-अलग है। जैसे यदि पीजीडीसीए का कोर्स सरकारी कॉलेज में है तो इसका सेमेस्टर का फीस अलग है। प्राइवेट कॉलेजों में यही फीस ज्यादा है।

कॉलेजों से मांगी थी जानकारी

कुलपतियों ने रिजल्ट की समीक्षा के लिए कॉलेजों से विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसमें कॉलेज से शिक्षकों की संख्या, कोर्स, भवन की स्थिति, छात्रों की संख्या, लाइब्रेरी समेत अन्य के बारे में जानकारी ली गई। इसके आधार पर फिर कुछ चुनिंदा कॉलेजों का निरीक्षण किया गया। इसमें यह बात सामने आई कि कई प्राइवेट कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है। इसके बाद भी वहां विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है। कई कॉलेजों में क्वालिफाईड शिक्षक भी नहीं है।

रविवि की वार्षिक परीक्षा के नतीजों पर गौर करें तो पिछले कुछ बरसों से यह कमजोर ही रहा है। ग्रेजुएशन प्रथम वर्ष में बड़ी संख्या में विद्यार्थी फेल हुए। पिछली बार बीकॉम व बीसीए प्रथम का रिजल्ट सबसे खराब रहा। बीकाम में 34.74 और बीसीए पार्ट-1 में 21.74 फीसदी छात्र पास हुए।

कई कॉलेजों में स्थिति यह तक बनी की 10 से भी कम छात्र पास हुए। एक बार फिर रविवि की वार्षिक के नतीजों पर सबकी नजर है। होमसाइंस के साथ इसकी शुरुआत हो चुकी है। बड़ी परीक्षाओं के नतीजे मई के आखिरी सप्ताह से शुरू होंगे।

नतीजे लगातार हुए कमजोर

एक जैसी फीस की सिफारिश

कुलपतियों की रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि राज्य के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में संचालित एक जैसे कोर्स के लिए एक तरह का फीस हो। फीस विनियामक आयोग के माध्यम इसका निर्धारण किया जाना चाहिए। वर्तमान समय में राज्य के विश्वविद्यालय व कॉलेजों में संचालित कई कोर्स ऐसे हैं जिसका फीस अलग-अलग है। जैसे यदि पीजीडीसीए का कोर्स सरकारी कॉलेज में है तो इसका सेमेस्टर का फीस अलग है। प्राइवेट कॉलेजों में यही फीस ज्यादा है।

कॉलेजों से मांगी थी जानकारी

कुलपतियों ने रिजल्ट की समीक्षा के लिए कॉलेजों से विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। इसमें कॉलेज से शिक्षकों की संख्या, कोर्स, भवन की स्थिति, छात्रों की संख्या, लाइब्रेरी समेत अन्य के बारे में जानकारी ली गई। इसके आधार पर फिर कुछ चुनिंदा कॉलेजों का निरीक्षण किया गया। इसमें यह बात सामने आई कि कई प्राइवेट कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है। इसके बाद भी वहां विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है। कई कॉलेजों में क्वालिफाईड शिक्षक भी नहीं है।

रविवि की वार्षिक परीक्षा के नतीजों पर गौर करें तो पिछले कुछ बरसों से यह कमजोर ही रहा है। ग्रेजुएशन प्रथम वर्ष में बड़ी संख्या में विद्यार्थी फेल हुए। पिछली बार बीकॉम व बीसीए प्रथम का रिजल्ट सबसे खराब रहा। बीकाम में 34.74 और बीसीए पार्ट-1 में 21.74 फीसदी छात्र पास हुए।

कई कॉलेजों में स्थिति यह तक बनी की 10 से भी कम छात्र पास हुए। एक बार फिर रविवि की वार्षिक के नतीजों पर सबकी नजर है। होमसाइंस के साथ इसकी शुरुआत हो चुकी है। बड़ी परीक्षाओं के नतीजे मई के आखिरी सप्ताह से शुरू होंगे।

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