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कचरे से खाद बनाने की मशीन शुरू भी नहीं हुई और एजेंसी को दे दिए साढ़े 15 लाख रु.

ट्रेचिंग ग्राउंड मंे इस तरह डंप किया जा रहा है कचरा। पुराने को बदलकर नया संयंत्र लगाया, इसका भी उपयोग नहीं किया...

Dainik Bhaskar

Aug 07, 2018, 02:40 AM IST
कचरे से खाद बनाने की मशीन शुरू भी नहीं हुई और एजेंसी को दे दिए साढ़े 15 लाख रु.
ट्रेचिंग ग्राउंड मंे इस तरह डंप किया जा रहा है कचरा।

पुराने को बदलकर नया संयंत्र लगाया, इसका भी उपयोग नहीं किया और कर दिया भुगतान

30 मार्च 2015 को सबसे पहले जैविक खाद बनाने के नाम पर करीब ढाई लाख की एक मशीन खरीदी गई थी। इसका उपयोग कचरे से प्लास्टिक, लोहे व अन्य कचरे को अलग करने के लिए किया जाना था। इसका उपयोग भी हुआ, बाद में इसे कबाड़ में डाल दिया गया। इसके बाद जून 2016 में एक नई मशीन करीब साढ़े 8 लाख रुपए में क्रय की गई। इसका उपयोग भी नहीं हुआ। तकनीकी खामियों के चलते निगम ने भुगतान नहीं किया। बाद में 3 महीने बाद इस संयंत्र को बदलकर नया संयंत्र लगाया गया। इसका भी उपयोग नहीं हो हुआ, लेकिन भुगतान कर दिया गया।

इन योजनाओं पर विचार

अक्टूबर 2017 में निगम ने दिल्ली-गाजियाबाद की कंपनी फाइन वेस्ट प्राइवेट से संपर्क किया। प्रजेंटेशन के माध्यम से कचरा डिस्पोजल का पूरा कांसेप्ट समझा गया। इसमें प्रति टन कचरे के हिसाब से करीब 2000 रुपए तक का खर्च आना बताया गया। प्रोजेक्ट के तहत पूरे शहर की सफाई की जिम्मेदारी एजेंसी लेगी। कचरा कलेक्शन कर सूखे कचरे में पॉलीथिन, कागज, गत्ता आदि रिसाइकेबल मटेरियल के अलावा गीला कचरा कम्पोस्टिंग से खाद बनाई जाएगी। खाद बनाने के अलावा बॉयो गैस, डीजल और बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। यदि निगम कचरा उपलब्ध कराए, तो 40 फीसदी तक कम खर्चा आएगा।

धरी की धरी ही रह गई एसएलआरएम सेंटर योजना

शहर में 7 एसएलआरएम सेंटर बनाए गए हैं। दावा है कि इन सेंटरों में करीब 80 टन कचरा निकल रहा है। यह सेंटर को तैयार करने में करीब 28 लाख रुपए खर्च किए गए। कचरे से बॉयो गैस तैयार करने की बात कही गई। कचरा डिस्पोजल कर प्लास्टिक, लोहा अन्य कचरा बेचने की बात की गई। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। जनवरी में उच्च अधिकारियों को दिखाने बॉयो गैस तैयार की गई। इसके बाद थोड़ी भी गैस तैयार नहीं की जा सकी।

यदि गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई


लैंड फिलिंग के नाम पर सवा सौ करोड़ रुपए

स्वच्छ भारत मिशन के तहत जीरो वेस्ट सेंटर व ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरे से खाद बनाने पर एक और नया कांसेप्ट लाया गया। इसमें सेल वाइस सेनिटरी लैंड फिलिंग साइट तैयार की जाएगी। यहां वेस्ट को तकनीकी रूप से लैंड फिलिंग के जरिए डिस्पोज किया जाएगा। इस पर करीब 1 करोड़ 46 लाख 1 हजार 135 रुपए इसमें खर्च किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ शासन ने इसके लिए दयाचरण एंड कंपनी नई दिल्ली को अधिकृत भी कर दिया है।

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कचरे से खाद बनाने की मशीन शुरू भी नहीं हुई और एजेंसी को दे दिए साढ़े 15 लाख रु.
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