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सीनियर छोड़ जूनियर को बना दिया नर्सिंग काउंसिल का रजिस्ट्रार, विवाद बढ़ा

रायपुर। छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल में रजिस्ट्रार की नियुक्ति विवादों में घिर गई है। सीनियरों को किनारे कर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 07, 2018, 02:40 AM IST

रायपुर। छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल में रजिस्ट्रार की नियुक्ति विवादों में घिर गई है। सीनियरों को किनारे कर जूनियर को रजिस्ट्रार बना दिया गया। इसमें प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया। रजिस्ट्रार की नियुक्ति के आदेश अभी स्वास्थ्य संचालनालय से जारी किए गए हैं, जबकि पोस्टिंग चिकित्सा शिक्षा संचालक को करना है। एक ओर जूनियर की नियुक्ति और दूसरी ओर प्रक्रिया गलत होने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। इसमें स्वास्थ्य विभाग के कुछ आला अफसरों की भूमिका पर अंगुली उठ रही है।

स्वास्थ्य विभाग में बदलाव के बाद नए समीकरण बन रहे हैं। उसी के बाद रजिस्ट्रार की पोस्टिंग का विरोध तेज हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसमें सीनियर नर्सिंग प्रोफेसरों की अनदेखी की गई है। अभी तक सीनियर नर्सिंग प्रोफेसर इसका विरोध नहीं कर रहे थे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में बदलाव के बाद वे खुलकर सामने आ रहे हैं। गौरतलब है कि नर्सिंग रजिस्ट्रार पी. त्रिवेदी 30 जून को रिटायर हो गईं। उनके स्थान पर शासकीय नर्सिंग व मिडवाइफरी प्रशिक्षण केंद्र की अधिकारी रहीं जूनियर प्रोफेसर दुर्गावती उसारे को रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी नियुक्ति के आदेश स्वास्थ्य संचालनालय से जारी किए गए। भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि अभी जिनकी पोस्टिंग की गई है उन्होंने जीएनएम के बाद एमएससी की है, लेकिन चिकित्सा शिक्षा संचालनालय की वरिष्ठता सूची में उनका नाम नहीं है। वे सिस्टर ट्यूटर पद की समकक्ष हैं। यानी वह इस पद के लिए योग्य ही नहीं है। रजिस्ट्रार के लिए सरकारी नर्सिंग कॉलेज में 20 से ज्यादा असिस्टेंट प्रोफेसर व प्रोफेसर हैं, वे सभी अभी जिनकी पोस्टिंग की गई है उनसे सीनियर हैं। नियुक्ति से जुड़े एक अन्य विवाद में यह भी है कि रजिस्ट्रार की नियुक्ति स्वास्थ्य संचानालय ने की है जबकि यह नियुक्ति संचालक चिकित्सा शिक्षा को करना था। प्रस्ताव भी उन्हीं को बनाना था। दरअसल 2015-16 में शासन ने जीएनएम कोर्स के संचालन की जिम्मेदारी चिकित्सा शिक्षा विभाग को दी। तब से नर्सिंग व जीएनएम कॉलेजों का संचालन चिकित्सा शिक्षा संचालनालय से होता है। विवादास्पद नियुक्ति को लेकर कहा जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के एक आला अफसर से करीबी रिश्तेदारी भी इस पोस्टिंग की वजह है। प्रदेश में 95 सरकारी व निजी नर्सिंग कॉलेज व 50 से ज्यादा जीएनएम कॉलेज हैं।

जिम्मेदारों ने भी माना सीनियरों को देना था पद

मुझे नियुक्ति की जानकारी नहीं है। मामले की जानकारी ली जाएगी कि आखिर इस तरह की नियुक्ति किस आधार पर की गई है? आर. प्रसन्ना, कमिश्नर हेल्थ

नर्सिंग कॉलेजों की सीनियर फैकल्टी ने जूनियर को रजिस्ट्रार बनाने की शिकायत की थी। कायदे से सीनियर को रजिस्ट्रार बनाना था। डॉ. एके चंद्राकर, संचालक चिकित्सा शिक्षा

क्या जिम्मेदारी?

रजिस्ट्रार पंजीयन कार्यालय के प्रमुख होते हैं। यहां प्रदेशभर की नर्सिंग व जीएनएम पास छात्र व छात्राएं पंजीयन करवाते हैं। इसका कार्यालय पुराने स्वास्थ्य संचालनालय में है। बिना पंजीयन के कोई भी नर्सिंग छात्रा न नौकरी कर सकती है और न ही निजी अस्पतालों में सेवाएं दे सकती हैं। जिस तरह छग मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के बाद एमबीबीएस की डिग्री को मान्यता मिलती है, इसी तरह नर्सिंग को मान्यता मिलती है।

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