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ये किसी गांव की नहीं दुर्ग शहर की तस्वीर है..

फिलहाल कोई ठोस कदम नहीं उठाया पानी की लगातार भयावह होती स्थिति के बावजूद सरकारी तंत्र ने ठोस कदम नहीं उठाया।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:50 AM IST

ये किसी गांव की नहीं दुर्ग शहर की तस्वीर है..
फिलहाल कोई ठोस कदम नहीं उठाया

पानी की लगातार भयावह होती स्थिति के बावजूद सरकारी तंत्र ने ठोस कदम नहीं उठाया। संकटग्रस्त इलाकों में पानी सप्लाई के लिए बोर खनन, हैंडपंप में पावर पंप लगाने जैसे कार्यों से पानी सप्लाई के लिए योजना बनाई गई है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान तलाशने कोई प्रयास नहीं हो रहे। पानी की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने स्टोरेज बढ़ाने भी प्लान नहीं है।

पानी के लिए ऐसी कतार कि घंटों करना पड़ रहा इंतजार



ऐसी है सच्चाई

गांवों में स्थिति और खराब, 200 फीट तक गिरा भूजल स्तर, पिछले साल से 20% ज्यादा

बालसमुंद से लौटकर हनीफ निजामी

सूखे और खारे पानी के संकट से जूझते बेमेतरा जिले में एक गांव ऐसा है, जहां नाम लिखे बर्तनों की कतार लगती है। साल के बारहों महीने लंबी कतार। ग्रामीण बिना नागा किए रोज बर्तनों की लाइन लगाते हैं। 10 से 12 घंटे के इंतजार के बाद पीने और भोजन पकाने लायक पानी मिलता है। 16 किलोमीटर दूर बालसमुंद गांव में साफ पानी के लिए लाइन लगाने में जरा सी चूक होने पर 12 घंटे बाद ही साफ पानी मिल पाता है।

शासन के कामों की गति बेहद धीमी, इसलिए नहीं मिल पा रहे नतीजे

झगड़े से बचने बर्तनों में लिख दिए अपने नाम

हालत ये है कि सुबह 9 बजे फिल्टर बंद होने पर शाम की पाली में पानी लेने के लिए खाली बर्तनों की लाइन लगने लगती है। एक जैसे बर्तन और डिब्बे होने के कारण झगड़े और विवाद से बचने ग्रामीणों ने पहचान के लिए अपने नाम लिखना शुरू कर दिया। भोला, पूर्णिमा, कृष्णा, राजेश जैसे नामों की कतारें दिख जाएंगी।

24 घंटे कतार के बाद मिल रहा है पेयजल

फिल्टर सिस्टम लगे पर पर्याप्त नहीं

पीएचई विभाग ने 3 साल पहले भूजल का खारापन दूर करने फिल्टर सिस्टम लगाया। फिल्टर का साफ पानी सुबह 7 से 9 बजे और शाम को 5 से 7 बजे तक के बीच मिलता है। सुबह 7 बजे पानी लेने के लिए ग्रामीण एक दिन पहले शाम 7 बजे से बर्तन और डब्बे की लाइन लगाते हैं।

खेती करने बेतहाशा भूजल दोहन से

बारिश न होने पर किसानों ने खेती करने भूजल का दोहन शुरू कर दिया। नतीजा, इस साल फरवरी में ही भूजल स्तर तेजी से गिरने लगा। अप्रैल में हाल ये है कि अधिकांश बोरपंपों से पानी की जगह हवा निकल रही है। पिछले साल जुलाई में जिले का औसत भूजल स्तर 20 मीटर था। इस बार 20 फीसदी ज्यादा गिरावट हुई है।

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