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छत्तीसगढ़ सहित देश में 8 इकोनॉमिक एक्सप्रेस-वे बनेंगे; खेतों-जंगलों से गुजरेगी सड़क, 90% तक कम देना पड़ेगा मुआवजा

केंद्र सरकार देश में आठ इकोनॉमिक एक्सप्रेस-वे बनाएगी। इसमें छत्तीसगढ़ के दुर्ग-रायपुर-आरंग 90 किलोमीटर और...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 02:55 AM IST

केंद्र सरकार देश में आठ इकोनॉमिक एक्सप्रेस-वे बनाएगी। इसमें छत्तीसगढ़ के दुर्ग-रायपुर-आरंग 90 किलोमीटर और रायपुर-विशाखापट्नम 500 किलोमीटर का भी प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। यह एक्सप्रेस-वे कम लागत और कम समय में बनाए जाएंगे। यह कम विकसित क्षेत्रों, खेतों या जंगलों से गुजरेंगे। इससे भूमि अधिग्रहण में ज्यादा परेशानी नहीं होगी और मुआवजा भी 90 फीसदी तक कम देना होगा। मौजूदा समय में प्रति हेक्टेयर औसतन 7 से 8 करोड़ रुपए मुआवजा देना पड़ता है। अभी अक्सर पुरानी सड़क को चौड़ा कर 2 से 6 या 8 लेन किया जाता है।

नए एक्सप्रेस-वे का एलाइनमेंट अलग होगा। नए एलाइनमेंट तय होने के बाद इनकी लागत पता चलेगी। नए एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी काम शुरू हो चुका है। नेशनल अथॉरिटी ऑफ इंडिया इस साल के आखिरी तक कई एक्सप्रेस-वे के अवार्ड जारी कर देगी। अगले साल की शुरुआत में निर्माण शुरू होने की संभावना है। दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेस-वे की डीपीआर सड़क परिवहन मंत्रालय से मंजूर हो चुकी है। बाकी सात के लिए डीपीआर तैयार हो रही है।

एक प्रोजेक्ट की डीपीआर मंजूर, बाकी सात की डीपीआर अभी तैयार

इस साल के अंत तक काम अवार्ड हो जाएगा, अगले साल काम शुरू होगा

यह आठ इकोनॉमिक एक्सप्रेस-वे बनाए जाएंगे, रायपुर भी शामिल

कॉरिडोर - लंबाई

दिल्ली-वडोदरा - 840 किलोमीटर

इस्माइलाबाद-नारनौल बाइपास - 230 किलोमीटर

(ट्रांस हरियाणा कॉरिडोर)

सनगरिया-संचोर-संतालपुर - 730 किलोमीटर

(ट्रांस हरियाणा कॉरिडोर)

दिल्ली-सहारनपुर - 160 किलोमीटर

दुर्ग-रायपुर-आरंग - 90 किलोमीटर

रायपुर-विशाखापट्नम - 500 किलोमीटर

चेन्नई-सलेम - 300 किलोमीटर

चित्तूर-तंचूर - 130 किलोमीटर

मंत्रालय ने कहा- इकोनॉमिक एक्सप्रेस वे ये होंगे फायदे

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव युद्धवीर सिंह मलिक ने बताया कि जमीन अधिग्रहण का मुआवजा कम देने की वजह से एक्सप्रेस-वे सस्ते पड़ेंगे। शहरी और रिहायशी इलाकों की तुलना में खेतों और खाली स्थानों के अधिग्रहण में समय कम लगेगा। पुरानी सड़क के आसपास अंडरग्राउंड केबल, पाइप लाइन शिफ्ट करने में अलग-अलग विभागों से समन्वय बैठाना पड़ता है। इसमें समय लगता है। चालू रोड को चौड़ा करने में सड़क से गुजरने वाला यातायात प्रभावित होता है। इसके अलावा जिस ग्रामीण और पिछड़े इलाके से होकर कोरिडोर जाएंगे, वे इलाके विकसित होंगे।

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