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शहर में 28 साल से है एक ऐसी मोहल्ला समिति जिसमें सुलझाए जाते हैं पारिवारिक झगड़े, अब तक 512 मामलों का निराकरण

शहर का पुलगांव वार्ड जहां एक जन विकास नाम से ऐसी समिति गठित की गई है, जिसका आदेश वार्ड की करीब 5 हजार की आबादी मानती...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 13, 2018, 03:55 AM IST

शहर में 28 साल से है एक ऐसी मोहल्ला समिति जिसमें सुलझाए जाते हैं पारिवारिक झगड़े, अब तक 512 मामलों का निराकरण
शहर का पुलगांव वार्ड जहां एक जन विकास नाम से ऐसी समिति गठित की गई है, जिसका आदेश वार्ड की करीब 5 हजार की आबादी मानती है। यह समिति पिछले करीब 28 सालों से काम कर रही है।

इस समिति का गठन आपसी व पारिवारिक झगड़ों के निराकरण के लिए किया गया। ताकि इस प्रकार का मामला क्षणिक आवेश के लिए पुलिस व न्यायालय तक न पहुंचे। समिति का दावा है कि अब तक उन्होंने 512 मामलों का निराकरण किया है। निराकरण भी ऐसा कि दोबारा किसी प्रकार के विवाद की स्थिति नहीं बनी। इसमें दंपत्ति के बीच के झगड़े, भाइयों के झगड़े, सास-बहू के झगडे, पड़ोसियों के झगड़े, जमीन से जुड़े विवाद शामिल हैं। समय के साथ इस समिति ने अपनी खुद की आर्थिक स्थिति भी मजबूत की। गांव के तालाबों को लीज पर देकर उससे राशि एकत्रित की है। इसका उपयोग समिति धार्मिक आयोजनों व वार्ड के विकास के लिए कर रही है।

बदलते रहते हैं पदाधिकारी व सदस्य : बनाई गई इस समिति में नियमित रूप से पदाधिकारी व सदस्य बदलते रहते हैं। वर्तमान में कपिल निषाद इस समिति के अध्यक्ष हैं। उनके अलावा संरक्षक सुरेंद्र सिंह राजपूत, रमेश सिंह, मनोहर साहू, खोरबहारा निषाद, मोतीलाल साहू, सचिव राम निषाद, कोषाध्यक्ष लल्लू साहू, उपाध्यक्ष संतराम निषाद सहित अन्य 22 लोग शामिल हैं। समिति के सदस्यांे में बदलाव होता रहता है।

पुलगांव की 5 हजार की आबादी मानती है समिति का हर आदेश, पुलिस और न्यायालय तक नहीं पहुंचते मामले

गांव के तालाबों को भी लीज पर देती है समिति

इस प्रकार होती है बैठक, जिसमें लिए जाते हैं निर्णय।

सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में सहयोग

जन विकास समिति के सदस्यों ने पिछले करीब 12 सालों से सामाजिक व धार्मिक आयोजन में सहयोग देना भी शुरू किया है। इसके तहत समिति प्रतिवर्ष रामकथा, सावन मेला, जन्माष्टमी जैसे आयोजन करता है। इतना ही नहीं स्कूल, मंदिर, गुरुद्वारा में पहुंचकर श्रमदान करते हैं।

आपसी रजामंदी से समझौते कराते हैं समिति सदस्य

प्रदेश के लगभग सभी शहरों में यह अपने तरह का संभवत: पहला वार्ड है, जहां इस प्रकार से आपसी रजामंदी से समझौते के जरिए मामलों का निराकरण किया जा रहा। हर 15 दिन से महीनेभर के अंदर समिति की बैठक होती है।

पूरे देश में 70 फीसदी मामले आपसी रंजिश से जुड़े

अधिवक्ता सौरभ चौबे ने बताया कि देश में 70 फीसदी से अधिक मामले आपसी रंजिश से जुड़े होते हैं। हर गांव में ऐसे अपराधों के लिए ग्राम अपराध पंजी भी बनी है। यदि कोई समिति ऐसे मामलों की निष्पक्ष सुनवाई कर रही है, तो एक बेहतर काम है।

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