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छोटे तालाब जैसा विसर्जन कुंड तैयार, छोटी-बड़ी 15 हजार मूर्तियों की क्षमता

गणेश प्रतिमाओं के अलावा सभी मूर्तियों के विसर्जन के लिए राजधानी में पहला बड़ा विसर्जन कुंड अगस्त के अंत तक तैयार...

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2018, 03:55 AM IST
छोटे तालाब जैसा विसर्जन कुंड तैयार, छोटी-बड़ी 15 हजार मूर्तियों की क्षमता
गणेश प्रतिमाओं के अलावा सभी मूर्तियों के विसर्जन के लिए राजधानी में पहला बड़ा विसर्जन कुंड अगस्त के अंत तक तैयार हो जाएगा। प्रदेश में भी विसर्जन के लिए नदी के किनारे अलग कुंड बनाने की यह पहली व्यवस्था है। दो साल पहले नगर निगम ने महादेवघाट में खारुन नदी के किनारे 15सौ वर्गमीटर का कुंड बनाया था। पिछले साल इसमें 5 हजार गणेश प्रतिमाएं विसर्जित हुईं। इस तरह यह छोटा पड़ गया क्योंकि यहां 15 हजार से ज्यादा प्रतिमाएं बिठाई जाती हैं। इसलिए इसका साइज बढ़ाकर करीब ढाई गुना (35 सौ वर्गमीटर) कर दिया गया है। महादेवघाट मेन रोड से कुंड तक करीब पौन किमी लंबी और 30 फीट चौड़ी कंक्रीट रोड बना दी गई है। इस कुंड का फायदा ये होगा कि शहर के किसी भी तालाब के बजाय यहीं आकर लोग प्रतिमाएं आसानी से विसर्जित कर पाएंगे। इससे खारुन ही नहीं, तालाबों की भी बड़ी दिक्कत दूर होगी।

दो साल से महादेव घाट के पास खारुन नदी किनारे विसर्जन कुंड बनाने का काम चल रहा है। 2016 में यहां पर सिर्फ गड्ढा खोदा गया था। उसमें पानी भरकर छोटी मूर्तियों का विसर्जन शुरू किया गया। पिछले साल इसी गड्ढे को पक्के कुंड में बदला गया। लेकिन यहां तक के लिए न सड़क बनाई गई, न पार्किंग एरिया था। इसलिए वहां लोग पहुंचे पर उतनी संख्या में नहीं। यह सब जरूरतें इस बार पूरी कर दी गई हैं। अगले महीने गणेश उत्सव है। स्मार्ट सिटी की तैयारी है कि इस बार शहर की सारी (15 हजार से ज्यादा) गणेश प्रतिमाएं तथा उसके बाद दुर्गा प्रतिमाएं भी यहीं विसर्जित हों।

पिछले साल से ढाई गुुना बड़ा

पानी तक जाने के लिए ढाल : मौके पर भास्कर टीम ने पाया कि कुंड के चारों ओर बड़ी दीवारें बनी हैं। लोग इसके पीछे रहेंगे। मूर्तियों के विसर्जन के लिए कुंड में भीतर जाने के लिए दो तरफ सीढ़ियां हैं। यहीं से ढलान वाला एक रैंप पानी के भीतर तक जाएगा। इसी में लोग आसानी से जाकर प्रतिमाएं विसर्जित कर पाएंगे। स्मार्ट सिटी के इंजीनियर संजय शर्मा ने बताया कि पहले छोटा कुंड बनाने की योजना थी, लेकिन पिछले दो सालों के दौरान लोगों शहर में इतनी जागरुकता आई है कि लोग तालाबों-नदी में विसर्जन नहीं कर रहे हैं। इसलिए बड़ा कुंड बनाया गया है। इसे इसी माह के अंत तक खारुन नदी के पानी से भरना शुरू कर देंगे। यह कुंड 3432 वर्गमीटर का है।

इसमें करीब 4 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। कुंड के आसपास गार्डन और बच्चों के खेलने का पार्क बनेगा

पूजन सामग्री से बनेगी खाद

निगम कमिश्नर और स्मार्ट सिटी के एमडी रजत बंसल ने बताया कि विसर्जित पूजन सामग्री निकालकर खाद बनाई जाएगी। इसे शहर में लगे पेड़-पौधों में डाला जाएगा। बड़ी मूर्तियों विसर्जित होते ही उनके लकड़ी के ढांचे निकाल लिए जाएंगे। सितंबर के पहले हफ्ते तक इसे पानी वगैरह भरकर पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा।

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गार्डन

विसर्जन कुंड की कुछ खास बातें जिनसे होगी सहूलियत

चारों ओर रेलिंग

सुरक्षा के लिए कुंड के चारों ओर रेलिंग लगेगी। यहीं गार्ड और गोताखोर तैनात रहेंगे।

पार्किंग भी अलग

कुंड के पास 500 वाहनों की पार्किंग रहेगी। महादेवघाट में यह अभी बड़ी समस्या है।

कुछ छोटे कुंड

बड़े कुंड से लगकर छोटे कुंड बन रहे हैं। ये छोटी मूर्तियों और पूजन सामग्री के लिए हैं।

बच्चों का गार्डन

लगी हुई ढाई एकड़ सरकारी जमीन में बच्चों के लिए गार्डन डेवलप किया जाने वाला है।

ओपन जिम भी

कुंड

कुंड के पास अोपन जिम का सेटअप बना रहे हैं। यह भी पार्क में ही डेवलप करेंगे।

पार्किंग

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